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आदिमजाति सेवा सहकारी समिति ने शासकीय उचित मूल्य की दुकान में बीपीएल कार्ड धारियों को नहीं दी अतिरिक्त चावल

आदिमजाति सेवा सहकारी समिति ने शासकीय उचित मूल्य की दुकान में बीपीएल कार्ड धारियों को नहीं दी अतिरिक्त चावल

सुरजपुर/प्रेमनगर, 22 जून। जिले के प्रेमनगर विकासखण्ड के ग्राम नवापारा कला के शासकीय उचित मूल्य दुकान का संचालक द्वारा ग्रामीणों को सरकार से मिलने वाले अतिरिक्त चावल ग्रामीणों को वितरण नही करने का मामला सामने आया है। 

प्रशासन द्वारा 19 जून की किसान पखवाड़ा दिवस मनाया जा रहा था। इस दौरान मौके पर ग्राम के स्थानीय जनप्रतिनिधि, कृषि विस्तार अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी सुरजपुर एसडीएम मौजूद थे। इस दौरान कार्यक्रम स्थल से परिसर में ही शासकीय उचीत मूल्य दुकान में का संचालन आदिमजाति सेवा सहकारी समिति गनेशपुर के सदस्य राशन दुकान में खाद्य सामाग्री का वितरण कर रहे थे। 


इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण राशन लेने आये थे जिसमें से ज्यादातर ग्रामीण गुस्से में थे। ग्रामीण ने कैमरे के सामने आकर बताया कि उन्हें शासन से मिलने वाले अतिरिक्त चावल जो कि बोनस के रूप में होता है उसे ग्रामीणों को नही दिया जा रहा है। ग्रामीण कहते है कि जून माह का राशन सेल्समैन वितरण कर रहा है। जिसमे इस माह का बोनस चावल भी दिया जा रहा है। किंतु मई माह का अतिरिक्त चावल नही दिया गया है। पूछे जाने पर कहते है कि सेल्समैन ने कहा था कि जून माह दिया जायेगा। किन्तु इस माह भी नही दिया जा रहा है। इस सम्बंध में मौके पर मौजूद एसडीएम पुष्पेंद्र शर्मा से ग्रामीणों ने गुहार लगाई तो उन्होंने जल्द ही चावल वितरण करने का आश्वासन दिया है। इस सम्बद्ध में सेल्समैन का कहना है खाद्य विभाग के साइट में ही मई माह के चावल वितरण का ऑप्शन नही आ रहा है। इस कारण वितरण नही हो पा रहा है। बाद में चावल वितरण किया जायेगा। 

बतादें कि पिछले वर्ष लॉक डाउन के दौरान ग्राम पंचायत द्वारा राशन वितरण कार्य में बड़ी गड़बड़ी की गई थी। ग्रामीणों को अतिरिक्त  चावल वितरण नहीं किए जाने पर जिसका समाचार लोकविचार ने प्रमुख्यता से प्रकाशित की थी। जिस पर अफसर के जांच में अनिमियता पाया गया और इस सोसायटी को निलंबन करते हुए गणेशपुर आदिमजाति सेवा समिति को वितरण का जिम्मा दिया गया था। किंतु इस समिति द्वारा भी राशन वितरण में बड़ी गड़बड़ी की जा रही है। जिस पर प्रेमनगर के फूड ऑफिसर स्वेता भगत की मौन सहमति है।