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इस्लामिक स्टेट आई एस आई एस ने 58 देशों की हजारों मुस्लिम महिलाओं को ' सबाया ' ( सेक्स स्लेव) बनाया

इस्लामिक स्टेट आई एस आई एस ने 58 देशों की हजारों मुस्लिम महिलाओं को ' सबाया ' ( सेक्स स्लेव) बनाया

अल गूना, मिस्र से अजित राय

पांचवे अल गूना फिल्म फेस्टिवल में कुर्दिश मूल के स्वीडिश फिल्मकार होगीर हीरोरी की डाक्यूमेंट्री " सबाया" की बड़ी चर्चा हो रही है। होगीर हीरोरी अपनी जान जोखिम में डालकर उत्तरी सीरिया के यजिदी होम सेंटर में रात के अंधेरे में चालीस बार गए और यह फिल्म शूट की। उन्होंने उन कई औरतों के इंटरव्यू लिए जिन्हें इस्लामिक स्टेट आई एस आई एस के लोगों ने अपहरण कर जबरन सेक्स स्लेव बनाया था। महमूद, जियाद और उनके समूह ने सिर्फ एक स्मार्ट फोन और पिस्तौल के बल पर रात के अंधेरे में सीरिया के सबसे ख़तरनाक कैंप अल होल से 258  यजीदी औरतों को निकाला था जिन्हें वहां सेक्स स्लेव बनाकर रखा गया था। उनमें से 52 औरतें बलात्कार से गर्भवती हुई और बच्चों को जन्म दिया। इसमें एक नौ साल की बच्ची मित्रा भी थी। 


फिल्म में एक सबाया रोते हुए बताती है कि आई एस आई एस के लोगों, जिन्हें डाएश कहा जाता है, ने उसके पिता और भाई की हत्या कर दी और वे उसे जबरन उठा ले गए। वे उसे पीटते थे और फोन पर पोर्न ( अश्लील वीडियो) देखते थे। वह कहती हैं कि उनके बलात्कार से पैदा हुए इस बच्चे का मैं क्या करूं? एक दूसरी सबाया पूछती है कि " यदि अल्लाह है तो उसने इस्लाम के नाम पर यह सब कैसे होने दिया ? " तीसरी औरत कहती हैं कि सीरिया ईराक सीमा पर उसे पंद्रह बार बेचा खरीदा गया। वह पांच साल इस्लामिक स्टेट की कैद में रही। चौथी औरत कैद से रिहा होते ही अपना काला बुर्का जला देती है। पांचवी औरत कहती हैं कि उसके माता-पिता है, भाई बहनें हैं, पर वह इस कैद में अकेली है। फिल्म में इसी तरह की औरतों की आपबीती है जिन्हें जबरन सेक्स स्लेव बनाया गया। महमूद और उसके साथी जब इन औरतों को मुक्त कराकर कार में भाग रहें हैं तो वे देखते हैं कि आई एस आई एस के डाएश ने रास्ते में कई गांवों को आग के हवाले कर दिया है। पता चलता है कि इस्लामिक स्टेट के इन कैंपों में 58 देशों से लाई गई हजारों मुस्लिम महिलाओं को सेक्स स्लेव बनाकर रखा गया है। 

सीरिया और ईराक के जिन हिस्सों पर आई एस आई एस ने कब्जा किया था, उससे सटे सिंजर जिले पर उन्होंने हमला किया और तीन लाख की आबादी वाले याजीदी समुदाय के शहर से अगस्त 2014 में हजारों औरतों को जबरन उठा लाए और उन्हें सेक्स स्लेव बनाया। जब सीरिया की सेना ने विदेशों की मदद से आई एस आई एस को वहां से खदेड़ दिया तो अधिकतर सेक्स स्लेव औरतों को अल होल कैंप में छुपा दिया गया जहां से महमूद और उनके साथियों ने उन्हें आजाद कराया।

" सबाया" फिल्म के निर्देशक होगीर हीरोरी का जन्म कुर्दिस्तान में हुआ था पर 1999 में वे शरणार्थी बनकर स्वीडन में आ गए। इस फिल्म को सन डांस फिल्म फेस्टिवल में ' वर्ल्ड डाक्यूमेंट्री प्राइज और हांगकांग अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में जूरी प्राइज से नवाजा गया है। यह फिल्म दुनिया के पचास फिल्म समारोहों में दिखाई जा चुकी है और इसे करीब तीस टेलीविजन चैनल प्रसारित कर चुके हैं। फिल्म में कैमरा वास्तविक व्यक्तियों, जगहों और घटनाओं को दिखाता है और तथ्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। उन गुलाम औरतों की आपबीती उन्ही की जुबानी सुनाई गई है और उनके कैंपों की अमानवीय हालत देखकर डर लगता है।