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कन्हैयालाल गावड़े कि रहस्यमय मौत अब भी रहस्य बना हुआ है

कन्हैयालाल गावड़े कि रहस्यमय मौत अब भी रहस्य बना हुआ है

पुलिस व डॉक्टरों के बयानों में विरोधाभास,जांच से संतुष्ट नही परिजन


हत्या या फिर सामान्य मौत,  जांच में दोषी कौन


भानुप्रतापपुर। कन्हैयालाल गावड़े कि रहस्यमय मौत अब भी रहस्य ही बना हुआ है। हालांकि हत्या के आरोप में पुलिस ने एक आरोपी को मृतक के मोबाइल लोकेशन के माध्यम से गिरफ्तार किया है। कांकेर पुलिस अधीक्षक ने 22 जुलाई गुरुवार को प्रेस कांफ्रेन्स के तहत इसका खुलासा किया है। वही इसके पूर्व इस मामले पर नज़र डालें तो मृतक का पोस्ट मार्डम एवं फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ही कह रही थी, कि यह हत्या नही बल्कि डी हाइड्रेशन व सामान्य मौत है। आखिर क्या है इसकी सच्चाई यह एक सोचनीय पहलू बनी हुई है। पुलिस अपने इस बयान में खुद ही घिरती नजर आ रही है। इस मामले में प्रकाश डाला जाए तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। डॉक्टर, पुलिस एवं फॉरेंसिक टीम सभी के बयानों में विरोधाभास है।


 *यह है पूरा मामला* 


कन्हारगांव निवासी मृतक कन्हैयालाल गावड़े का शव विक्षिप्त हालात में 3 जून को रेल्वे स्टेशन के समीप ताला बंद एक झोपड़ी में मिला था। पत्नी सम्पतिन गावड़े की रिपोर्ट पर थाना भानुप्रतापपुर में मर्ग क्र.049/21 धारा 174 सीआरपीसी के तहत मामला पंजीबद्ध कर मर्ग पंचनामा कर जांच की जा रही थी।

 *पुलिस का कथन* 

पुलिस के जांच अधिकारी पहले इस मामले में पीएम एवं फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर डी-हाइड्रेशन एवं सामान्य मौत बता कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। एसआई रूपेंद्र पटेल ने बताया कि घटना स्थल पर मृतक का मोबाइल व मोपेड नहीं मिली थी। मृतक के पास कई दिनों से मोबाइल नहीं था और वह विवादित व्यक्ति था। वहीं अब समाजिक एवं राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस एक फिल्मी अंदाज में अपने पुराने बयानों को खारिज करते हुए नए व रोचक तथ्य सामने लेकर आई है और हत्या का मामला बनाकर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि हत्या का कारण बीड़ी लाने को लेकर युवक व कन्हैया के बीच विवाद हुआ था जिसके चलते युवक ने पत्थर मार कर हत्या कर दी।

 *डाक्टरों का बयान* 

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर के बीएमओ डॉ अखिलेश ध्रुव ने बताया कि 3 जून को शव का पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान कहीं पर भी चोट के निशान नहीं मिले। वहीं डॉ पलास शर्मा ने बताया कि चेहरे पर हल्के से घाव का निशान नजर आया था जिसमे कीड़े लगे हुए थे, और चमड़ी अंदर से बाहर की ओर उभरी हुई थी। पूरे शरीर मे कहीं भी ब्लड के निशान नहीं थे जिसका उल्लेख पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किया गया है। 


 *जांच अधिकारी ने फॉरेंसिक* *रिपोर्ट में बताया* 

 फॉरेंसिक टीम की माने तो घटना स्थल व पास के एरिया में सूक्ष्मता से जांच की गई तो न ही वहाँ ब्लड के निशान मिले और न ही ऐसी कोई सामग्री जिससे हत्या की जा सके। शरीर पर चोट के निशान ब नहीं मिले जिसे देख कर लगा कि सामान्य मौत हुई है।

 *पुलिस की कार्यवाही में कई जवाब अधूरे* 

पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा द्वारा 22 जुलाई को कांकेर में पत्रकारों को बताया गया कि आरोपी युवक सुरेन्द्र गौर को पकड़कर पूछताछ करने पर कन्हैया गावड़े के पास इसका मामा कृपाराम रेल्वे स्टेशन पर समय पूर्व पहुंचने से ट्रेन समय तक रूकने के लिए रखना तथा कन्हैया गावड़े घर का काम कर मजदूरी दूंगा कहने पर दो - तीन दिन रूक कर साथ में रहकर काम करना व दारू पिना बताया। घटना दिनांक को बीड़ी नहीं लाने के बात पर गाली गलौच करने से पास में पड़े पत्थर से कन्हैया गावड़े के सिर में मारकर हत्या कर दरवाजे को सांकल और ताला लगाकर कन्हैया गावड़े की बाहर खड़ी टीवीएस लूना को लेकर घटना स्थल से भागे जाने की बात कही जा रही है। शुरुवात से ही इस मामले को पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। पहले सामान्य मौत बताना और अब हत्या के आरोपी को ढूंढ निकालना समझ से परे है। मामले की कई पहलुओं पर जांच अब भी अधूरी है जिससे कई बड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। 

 *जांच से संतुष्ट नहीं है परिजन* 

मृतक की पत्नी, बेटी व अन्य परिजनों से पूछा गया तो उन्होंने आरोपी सुरेंद्र गौर को कभी भी मृतक कन्हैया के साथ नहीं देखा जाने की बात कही। वहीं झोपड़ी इतनी छोटी है कि वहाँ कोई भी काम करने को नहीं है। पहले डॉक्टरों ने बताया था कि मृतक के शरीर पर कहीं कोई निशान व चोट नहीं है। पर अब पुलिस का कहना है कि पत्थर से मार कर उनकी हत्या हुई। अब यह कैसे हो सकता है कि न ही झोपड़ी में ब्लड के निशान मिले और न ही पत्थर मिला था। मृतक कभी भी बीड़ी नही पीता था तो बीड़ी के नाम पर विवाद कैसे हुआ।

जब हमने शव को देखा तो उसमें चिपचीपा पदार्थ नजर आ रहा था जिसकी फोटो भी हमारे पास है। हत्या तो हुई है पर इसमें कोई और भी शामिल है, पुलिस मामले की सही से जांच नहीं कर रही हैं। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि डी-हाइड्रेशन से मौत हुई थी जनकी झोपड़ी में खाना बना हुआ था जिसमे फफूंद लग गयी थी, उसी समय हमने हत्या की आशंका जताई थी। मृतक की छोटी बेटी ने बताया कि वह अपने पिता के साथ अक्सर बात किया करती थी लेकिन उन्होंने सुरेंद्र गौर व अन्य किसी व्यक्ति के बारे में नहीं बताया। वह अपने साथ किसी को रखना पसंद नहीं करते थे। पुलिस की इस कार्यवाही से हम सन्तुष्ट नहीं है, यदि अच्छे से जांच की जाए तो इसमें और भी लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। मृतक के पुत्र संजू गावड़े ने बताया कि सुरेंद्र गौर को वह नहीं जानता न ही कभी गांव में देखा और न कभी उसके बारे में सुना है। 

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