आनन-फानन में निगम ने खरीदे लाखों के सेनेटाईजर, मास्क

आनन-फानन में निगम ने खरीदे लाखों के सेनेटाईजर, मास्क



0 गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल

0 मास्क में सिलाई की जगह टेप चिपका कर हो रही सप्लाई


संजय जैन
धमतरी 15 अप्रैल। अति प्राचीन निगम में वर्षों बाद कांग्रेस समर्थित शहरी सत्ता में नागरिकों के सहयोग से अपना कब्जा जमाया। रोजमर्रा की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में पूर्ववर्ती शहरी सत्ता के सरमायादारों ने अधिकांश नागरिकों को नाराज कर दिया जिसके चलते नागरिक इसका विकल्प तलाशते रहे और चुनाव के समय कांग्रेस समर्थित पार्षद पद के प्रत्याशियों को विजयश्री दिलाई ताकि उन्हें पानी, बिजली, साफ सफाई आदि का लाभ निरंतर मिलता रहे। लेकिन पूर्ववर्ती शहरी सत्ता की तर्ज पर नई शहरी सरकार भी चल रही है। पिछले दिनों संदिग्ध टेंडर निकालकर उसे रद्द किया गया। अभी पिछले दिनों कोरोना कोविड-19 के लिये बिना निविदा निकाले लगभग 5 लाख रूपये के मास्क, सेनेटाईजर की खरीदी की गई जिसकी चर्चा समूचे शहर में चल रही है। मास्क एवं सेनेटाईजर की जो खरीदी थोक में की गई है उसका खुले बाजारों में दर उतना ही है जबकि थोक में खरीदी करने पर कुछ छूट अवश्य प्राप्त होती है। लेकिन ए.व्ही.इंटरप्राइजेस द्वारा की गई सप्लाई में निगम के लिये कोई रियायत न करना भी अनेक संदेहों को जन्म दे रहा है।  

मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि स्थानीय स्तर से लेकर अनेक लोगों द्वारा मास्क एवं सेनेटाईजर का निर्माण किया जा रहा है। इसे लेकर किसी ने भी उसकी जांच पड़ताल कराये बिना ही इसे उपयोग में ला दिया है। खबर है कि प्रदेश में सिर्फ 6 कंपनियों को सेनेटाईजर एवं मास्क बनाने का ठेका के लिये अनुमोदित किया गया है और यह कंपनी शराब कंपनी चलाने वाले लोगों के हाथों में है। लेकिन इसे नजरअंदाज करते हुए नगर पालिक निगम द्वारा विभिन्न लोगों को कोरोना कोविड-19 से बचाये जाने हेतु आवश्यक वस्तुओं में एक मास्क एवं सेनेटाईजर की खरीदी की गई। बिना निविदा निकाले एक बड़े कांग्रेसी नेता के ईशारे पर यह ठेका दे दिया गया और आनन फानन में यह सप्लाई भी हो गया। जब इसे वितरित किया गया तो लोगों ने पाया कि उक्त मास्क चिपका हुआ है जो पहनने के बाद उसके रोएं उखड़कर मुंह के अंदर जा रहे हैं। इस मामले को लेकर इस प्रतिनिधि ने आयुक्त आशीष टिकरिहा से जानकारी चाही तो उन्होंने कार्यपालन अभियंता से बात कर जानकारी प्राप्त करने को कहा। कार्यपालन अभियंता ने बताया कि 5 लाख रूपये का मास्क एवं सेनेटाईजर की खरीदी एक ही कंपनी के द्वारा सप्लाई की गई है तथा इस कार्य के लिये निविदा आमंत्रित नहीं की गई है। आनन-फानन में मिलीभगत कर तीन लोगों से कोटेशन बुलाकर उक्त सप्लायर को सप्लाई आदेश जारी कर दिया गया। शासकीय नियम के मुताबिक किसी भी खरीदी अथवा निर्माण कार्य के लिये निविदा का निकाला जाना लाजिमी होता है परंतु 5 लाख रूपये की खरीदी में निविदा का नहीं निकाला जाना इस बात का परिचायक है कि नियम, कायदों को ताक में रखकर शहरी सत्ता में बैठे कांग्रेसजन भी भाजपा की तर्ज पर चल रहे हैं।

बताया जाता है कि मास्क एवं सेनेटाईजर की खरीदी के लिये किसी प्रकार का कोई बैठक में प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है। कुर्सी में बैठे-बैठे सारी चीजें तय कर ली गई है। कुछ लोगों का कहना था कि उक्त चीजें खरीदना ही था तो अखबार में निविदा प्रकाशित किया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया और जो मास्क एवं सेनेटाईजर खरीदी की गई है, उसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ए.व्ही.इंटरप्राइजेस से जो सेनेटाइजर खरीदे गये हैं वह 7 हजार नगर 100 एमएल के 50 रूपये में लिया गया है जो मार्केट में भी इसी दाम में खरीदे गये हैं। मास्क भी 10 हजार नग 10 रूपये प्रति नग के हिसाब से खरीदी की गई है जबकि 200 एमएल का सेनेटाईजर 100 रूपये में 500 नग खरीदा गया है। उपरोक्त वस्तुएं खुले बाजार में भी उतने ही दर पर उपलब्ध हैं। थोक में खरीदी पर कोई रियायत नहीं की गई है। लोगों ने तो यहां तक कहा कि जो वस्तुएं निगम द्वारा दी गई है वह उपयोग करने के लायक ही नहीं है। इस मामले को लेकर अनेक लोगों ने कलेक्टर रजत बंसल से मांग की है कि स्तरहीन मास्क की जांच कर संबंधितों पर उचित कार्यवाही करेंगे। गौरतलब रहे कि समूचे देश में कोरोना कोविड-19 से बचाव के लिये सेनेटाईजर एवं मास्क को आवश्यक कर दिया गया है। बिना मास्कधारी व्यक्ति पर पुलिस द्वारा कार्यवाही की जा रही है। शासन एवं प्रशासन ने स्वयं अपने आदेश में इसका पालन करने को कहा है और सुरक्षा की दृष्टि से कलेक्टोरेट, पुलिस अधीक्षक कार्यालय सहित जिले के अन्य शासकीय दफ्तरों में भी मास्क एवं हाथ धुलाई के पश्चात ही भीतर प्रवेश दिये जाने की व्यवस्था की गई है। लेकिन ऐसे निम्र स्तर के मास्क एवं सेनेटाईजर से कोविड-19 से बचाव नामुमकिन माना जा रहा है।