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सहकारी बैंक के सहायक लेखापाल व समिति प्रबन्धक की मिली भगत से शासकीय कमर्चारी के नाम ऋण

सहकारी बैंक के सहायक लेखापाल व समिति प्रबन्धक की मिली भगत से शासकीय कमर्चारी के नाम ऋण


कर्ज माफी में कराया छूट, खाद्य मंत्री से हुई शिकायत

चंद्र प्रकाश साहू 

सुरजपुर, 8 फरवरी। जिले के सहकारिता विभाग मानों भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है। सहकारी बैंक व समिति प्रबन्धक को मनमानी अपने चरम पर है। साथ ही जिले से सहकारी मंत्री, खाद्य मंत्री का पैतृक गांव जिले से होने के बाद भी सहकारिता में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नही ले रहा है। बल्कि एक से बड़े एक भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे है। यहां तक कि एक आदिवासी किसान के नाम से फर्जी तरिके से लाखों के धान बेचने का मामला की जांच होने के बाद भी प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नही होने से जिला प्रशासन के कार्य पर ही सवाल खड़े हो रहे है। एक बार फिर फर्जी तरिके से सहकारी बैंक के कर्मचारी ने अपने पत्नी के नाम से जो कि शासकीय कर्मचारी है। उसके नाम से ही लाखों रुपये का ऋंण नियमों को ताक में रख कर दे दिया गया। साथ ही शासन द्वारा हुए कर्जमाफी योजना में कर्ज माफ भी करा लिया है। जिसकी शिकायत जिले के डीएम के साथ खाद्य मंत्री से भी की गई है। 

गौरतलब है कि आदिमजाति सेवा सहकारी समिति के प्रबन्धक व बैंक के सहायक लेखापाल के खिलाफ संचालक मंडल के एक सदस्य ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शाखा विश्रामपुर में पदस्थ सहायक लेखापाल के विरुद्ध पद का दुरुपयोग कर अनियमितताएं बरते जाने की लगातार की जा रही है जिस पर कार्रवाई की मांग की है ।

इसकी शिकायत कलेक्टर सूरजपुर से भी किया गया है। शिकायतकर्ता सिलफिली सोसाइटी समिति के संचालक बोर्ड के सदस्य यार सिंह व पुकार राम ने उक्त आशय की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शाखा विश्रामपुर में पदस्थ सहायक लेखापाल द्वारा सहकारी समिति सिलफिली से महिला व बाल विकास विभाग में पदस्थ अपनी पत्नी के नाम से पद का दुरुपयोग करते हुए नियम विरुद्ध तरिके से पांच जून 2013 को 631382 रुपए का ऋण स्वीकृत कराया गया है , जबकि केसीसी लोन एक बार में अधिकतम पांच लाख तक दिया जा सकता है। ऋण की राशि जमा कराने के बजाय ब्याजसमेत 965340 रुपए शासन की ऋण  माफी योजना के तहत माफ कराया दिया गया।

इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि नियमों को ताक पर रखकर कर्मचारी होने की वजह से बकाया ऋण अदा किए बगैर हर वर्ष सिलफिली सोसायटीसे नया ऋण भी लिया है। शिकायत मे संबधित कर्मचारी के खिलाफ पूर्व में भी जयनगर सहकारी समिति में भी मनमानी पूर्वक दवाब बनाने के लिए बैंक प्रबंधक के पास भी मामले पहुंचे हैं। 

लेकिन पद का दुरूपयोग करते हुए आर्थिक अनियमितता लगातार बरती जा रही है। इस पर जांच कर कर्मचारी पति - पत्नी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है, जिस पर खाद मंत्री ने जांच उपरांत कार्यवाही का आश्वासन दिया है।