breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोरोना से मृतकों के परिवारजनों को मुआवजा

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - कोरोना से मृतकों के परिवारजनों को मुआवजा

-सुभाष मिश्र

सरकार की ना-नुकूर, आंकड़ों की आपाधापी और मृत्यु के कारणों को छिपाने, मृत्यु के आंकड़ों की गलत बयानबाजी के बीच बहुत जद्दोजहद के बाद अंतत: केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि वह कोरोना से हुई मौत से पीडि़त परिवार को 50 हजार रुपए का मुआवजा देगी।

मिर्जा गालिब का एक मशहूर शेर है-
की मिरे क़त्ल के बाद उसने जफ़ा से तौबा
हाए उस ज़ूद-पशीमाँ का पशीमाँ होना।।

कोरोना संक्रमण से होने वाली मृत्यु के मामले में मारे डर के या बदनामी के कारण लोग अस्पताल से मृतकों को सीधे अंतिम संस्कार के लिए संस्थान या जहां पर कब्रगाह है, वहां पर ले गए और उनका अंतिम संस्कार कोविड-19 के गाईड लाईन के तहत कर दिया गया। बहुत बार तो यह भी देखने में आया है कि जिनके घर के लोग मरे थे वह भी वहां उपस्थित नहीं हुए और जैसे-तैसे अंतिम संस्कार की रस्म को निपटाया गया। ना तो उनका पोस्टमार्टम हुआ, ना उनको ऐसा किसी प्रकार का मृत्यु प्रमाण-पत्र मिला जिसमें लिखा हो कि इनकी मृत्यु कोरोना संक्रमण से हुई है। सरकार उस समय इस बात को छुपाना चाहती थी कि कोरोना में जो मौत हो रही है उसका आंकड़ा लोगों तक जाए। लगातार जब लोगों ने देखा कि अलग-अलग शहरों में नदी के किनारे श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कराने वालों की भीड़ है तो फिर यह मामला थोड़ा बाहर आया और जब लाशें नदी में तैरने लगी तब यह मामला और उफनकर सामने आया। नदी में बहती हुई लाशें खुद अपनी कहानी कह रही थीं। अभी तक सरकारी आंकड़ों के हिसाब से हमारे देश में 3 लाख लोगों की मृत्यु कोरोना से होना बताई गई है जबकि जनचर्चा में इनकी संख्या बहुत अधिक है। देश में दूसरी लहर के दौरान कोरोना से होने वाली मृत्यु ने देश को चिंता में डाल दिया था। यह एक अजीब सी विचलन का समय था कि लोग कोरोना से हुई मृत्यु को छुपा भी रहे थे और बात भी नहीं करना चाहते थे। इसी दौरान यह बात भी सामने आई कि कोरोना से बचाव का तरीका सोशल डिस्टेंसिंग के अलावा टीकाकरण है।  

कोरोना संक्रमण के दौरान जब लोगों के पास किसी प्रकार की कोई दवाई नहीं थी, एक कोहरा छाया हुआ था और लोग अस्पतालों की ओर भाग रहे थे तो अस्पतालों को उनसे अनाप-शनाप कमाई करने का मौका मिला और इसमें कोई चूका नहीं। हाल ही में एक घटना हुई कि बिलासपुर अस्पताल के डॉक्टर का वहां का टेक्नीशियन स्टाफ और बाकी लोगों ने अपहरण कर लिया। दरअसल, अपहरण इसलिए किया गया कि क्योंकि दोनों ने मिलकर कोरोना काल में जो अनाप-शनाप कमाई की थी उसके बंदरबांट को लेकर यह अपहरण किया गया था। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि बहुत सारे अस्पतालों ने कोरोना संक्रमण के दौरान कितना पैसा कमाया।

आपदा को अवसर में बदलने वाले लोगों की कमी नहीं है। हमारे समाज में बहुत सारे लोग लोगों की जरूरतों का फायदा उठाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं। अभी जबसे कोरोना का प्रभाव कम हुआ है तो लोगों में एक लापरवाही भी दिखाई दे रही है। यह बात भी अभी सामने आई है कि कोरोना संक्रमित लोगों की जो एंटीबॉडी डेवलेप हुई है उसमें नए वेरिएंट के मुकाबले वह मददगार नहीं है। हाल ही में सीबीएसई, बीएससी ने भी एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कोरोना महामारी के चलते जिन-जिन बच्चों के सिर से अभिभावकों का साया छिन गया है, ऐसे बच्चों को आर्थिक परेशानी ना हो इसके लिए उनकी परीक्षा और पंजीयन शुल्क में उन्हें मुक्तिदी है। बहुत सारे छोटे-छोटे फौरी मदद के इंतजाम किए गए हैं मगर यह मदद दूसरे सी नहीं है जिस तरह लोगों पर संकट गहराया हुआ है। कोरोना काल के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरी गई, उनकी तनख्वाह में कटौती हुई, जो छोटे-छोटे रोजगार कर रहे थे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट हो गया। जिनके घर में जो एकमात्र कोई कमाने वाला व्यक्ति था यदि वह मर गया तो उस घर में जिस तरह का गम का साया है तो उसके लिए 50,000 की राहत उसके लिए कोई बड़ी नहीं है। फिर भी कहीं ना कहीं ऊंट के मुंह में जीरा ही सही पर यह राहत मिली है।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की लताड़ के बाद बहुत जद्दोजहद के बाद लोगों को दी है। सवाल यह है कि आने वाले समय में भी यदि कोई व्यक्ति इससे मरता है तो भविष्य की मौतोंं पर भी यह नियम लागू रहेगा।  इसके लिए प्रक्रिया तय की गई है। इस प्रक्रिया में यह कहा गया है कि केंद्र सरकार ने कहा कि यह अनुग्रह राशि कोविड-19 महामारी के भविष्य के चरणों में भी या अगली अधिसूचना तक जारी रहेगी। उन वितरकों के परिवारों को भी मुआवजा दिया जाएगा जो कोविड-19 में शामिल थे या तैयारी गतिविधियों से जुड़े थे। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार मृत्यु के कारण को कोविड-19 के रूप में प्रमाणित करने की आवश्यकता होगी। राज्यों द्वारा राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोर्ट से मुआवजा प्रदान किया जाएगा।  

अनुग्रह राशि के अंतिम भुगतान की प्रक्रिया मजबूत लेकिन सरल और लोगों के अनुकूल प्रक्रिया के माध्यम से हो। सभी दावों को आवश्यक दस्तावेज जमा करने के 30 दिनों के भीतर निपटाया जाएगा।

देश में नए कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में आज बढ़ोत्तरी हुई है। देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 31,923 नए मामले सामने आए हैं और 282 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हो गई है। वहीं कल यानी 22 सितंबर को 26,964 नए मामले सामने आए थे और 383 लोगों की मौत हो गई थी।

हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक, देश में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 3,35,63,421 पहुंच गई है। अब तक कुल 4,46,050 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हो चुकी है। देश में एक्टिव मामलों की संख्या 3,01,640 है, जो कि पिछले 187 दिनों में सबसे कम है। जब देश में मुआवजे की राशि का वितरण शुरू होगा तब बहुत सारे नये मामले सामने आयेंगे। सरकारी मशीनरी किस तरह से कोरोना पीडि़त परिवार जिन्होंने अपने सदस्य को खोया है, उनके साथ कैसा व्यवहार करती है, यह भी देखना होगा। टीकाकरण के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताने वाली सरकारी मशीनरी ने बहुत जगहों पर मृतकों के नाम पर भी टीकाकरण दर्ज कर लिया है। हमारे देश में जब भी मुआवजे का भुगतान होता है, उसमें अक्सर भ्रष्टाचार और लालफीताशाही बड़े पैमाने पर दिखाई देती है। कोरोना संक्रमण से टूट चुके परिवारों से यह बीमारी दूर रहे तभी लोगों को सही राहत मिलेगी।