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संडे स्पेशल : हेलमेट पर नए नियम लागू..01 जून से सिर्फ आईएसआई मानक वाले हेलमेट ही चलेंगे..खरीदने और बेचने वाले दोनों पर लगेगा जुर्माना..इसलिए अपना हेलमेट चेक कर लें

संडे स्पेशल : हेलमेट पर नए नियम लागू..01 जून से सिर्फ आईएसआई मानक वाले हेलमेट ही चलेंगे..खरीदने और बेचने वाले दोनों पर लगेगा जुर्माना..इसलिए अपना हेलमेट चेक कर लें

देशभर में बिना आईएसआई मानक वाले हेलमेट के इस्तेमाल पर एक जून 2021 से पूरी तरफ प्रतिबंध लग गया है। अगर कोई गैर-आईएसआई मार्का वाले हेलमेट को बेचता है या खरीदता है तो दोनों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि आप जिस हेलमेट को खरीद रहे हैं, उसकी दोबारा और अच्छी तरह से जांच करें कि वह सभी मानकों पर खरा उतरने वाला आईएसआई सर्टीफिकेशन वाली हेलमेट होना चाहिए। यानी एक जून, 2021 से दोपहिया वाहन चालकों और सवारों के लिए आईएसआई मार्का वाले हेलमेट अनिवार्य हो गया है। यह हेलमेट ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड सर्टिफाइड होना चाहिए।

क्या है नया नियम
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 26 नवंबर, 2020 को जारी अधिसूचना "दोपहिया मोटर वाहन सवारों के लिए हेलमेट (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2020" में कहा गया है कि सभी दोपहिया वाहनों में उपयोग किए जाने वाले हेलमेट भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रमाणित होने चाहिए और एक जून से उन पर भारतीय मानक (आईएसआई) का चिह्न लगा होना चाहिए।"

खरीदने और बेचने वाले, दोनों पर जुर्माना
इस कदम के साथ भारत सरकार ने सड़क पर दोपहिया सवारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की कोशिश की है। इसके साथ ही नए कानून का पालन न करने पर सख्त कदम उठाने और उल्लंघन करने वालों को दंडित करने का फैसला भी किया गया है। कोई भी व्यक्ति जो गैर-आईएसआई हेलमेट का निर्माण, भंडारण, बिक्री या आयात करता है, उसे एक साल तक की कैद या न्यूनतम एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है जो कि 5 लाख रुपये तक बढ़ाया भी जा सकता है।

इसके अलावा, देश में सिर्फ बीआईएस/आईएसआई सर्टीफिकेशन वाले दोपहिया हेलमेट बेचने की अनुमति होगी। यानी नॉन-आईएसआई हेलमेट बनाना या बेचना एक अपराध है और इस का उल्लंघन करने पर जेल की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है। भारत सरकार के इस बहुप्रतीक्षित कदम का कारण नकली और नकली दोपहिया हेलमेट की बिक्री को खत्म करना और कम गुणवत्ता वाले हेलमेट के कारण होने वाली घातक और जानलेवा सड़क चोटों के आंकड़ों को कम करना है।

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में 3 लाख से ज्यादा लोग मारे जा रहे हैं। लेकिन इस संख्या में सिर्फ वहीं आंकड़ा शामिल है जो भारत सरकार द्वारा रिपोर्ट और दर्ज किया गया है। इसके उलट सामान्य दृष्टिकोण के अनुसार भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 10 लाख से अधिक लोग मारे जा रहे हैं क्योंकि कई दुर्घटनाएं कभी रिपोर्ट और दर्ज नहीं की जाती हैं। मानव जीवन को बचाने के लिए ऐसे सुधारात्मक उपाय समय की जरूरत है। नियम के मुताबिक अब इस आदेश के पालन पर सख्ती से अमल किया जाएगा। इस नियम को ना मानने वाले लोगों को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा।