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मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान: कर्तव्य पथ पर डटीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

 मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान: कर्तव्य पथ पर डटीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

० बच्चों में कुपोषण दूर करने सप्ताह में तीन दिन गरम पौष्टिक भोजन

महासमुंद ।  कोरोना काल की पहली और दूसरी लहर के बीच कर्तव्य पथ पर डटे रहकर काम करना सीखना हो तो महासमुंद जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सीखा जा सकता है। विपरीत स्थिति और विषम परिस्थितियों में डटे रहकर पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जि़म्मेदारी से काम करना जैसे इनकी फि़तरत में है। ये वो आंगनबड़ी कार्यकर्ताएं हैं, जो जिले के दूरस्थ अंचल में रहने वाले गरीब, कमजोर वर्ग के लोगों के साथ आदिवासी जनजाति लोगों के घर पर सूखा राशन और रेडी-टू-ईट का वितरण कर रहीं थीं। ताकि, उनके मासूम बच्चों और परिवार को भूखा नहीं रहना पड़े। लॉकडाउन के चलते पहले चरण और दूसरे में मुख्यमंत्री सुपोषण कार्यक्रम के तहत 15 से 49 आयु वर्ग की एनीमिया पीडि़त, शिशुवती माताओं और 06 माह से 3 वर्ष के आयु वर्ग के कुपोषित बच्चों के घर पर पोषणयुक्त सूखा राशन उपलब्ध कराया था। लॉकडाउन के दूसरे चरण में भी और राशन पहुंचाने की व्यवस्था की। साथ ही जिले की 1780 आंगनबाड़ी केन्द्रों में दर्ज बच्चों गर्भवती और शिशुवती समेत कुल हितग्राहियों को हेल्दी रेडी-टू-ईट फूड घर-घर जाकर दिया था।

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत पिछले माह 10 अगस्त से पुन: सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार एवं शक्रवार को गुणवत्तापूर्ण गरम पौष्टिक भोजन हितग्राहियों को पुन: उपलब्ध कराया जा रहा है। लॉकडाउन और कोरोना के चलते बच्चों के बेहतर सेहत के चलते बंद किया गया था। पुन: 10 अगस्त से जिले की 1710 ऑगनबाड़ी केन्द्रों में 6645 कुपोषित बच्चों और 15 से 49 आयु के 9489 एनीमिक पीडि़त बालिकाएं एवं महिलाओं को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और सहायिकाएं अब गरम भोजन परोस रही है। ताकि, बच्चे सुपोषित हो और बालिका और महिलाएं एनीमिक की कमी से बाहर निकले। इस योजना के तहत जिले के ऑगनबाड़ी केन्द्रों में 16134 हितग्राहियों को सप्ताह में तीन दिन गरम पौष्टिक भोजन मिल रहा है। इसी प्रकार खनिज न्यास निधि से कमार जनजाति के 3 से 6 आयु वर्ग के 96 बालकों और 1 से 49 आयु वर्ग की 1428 बालिका और महिलाओं को सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को उनके घर जाकर उबला अण्डा प्रदाय किया जा रहा है। जिले में 6 माह से 3 वर्ष तक के कुपोषित बच्चों की संख्या अलग-अलग श्रेणियों 23613 है। वहीं 15 से 49 आयु वर्ग की एनीमिक पीडि़त बालिका एवं महिलाओं की संख्या 39521 है।