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उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने गांव जाकर अनाथ बच्चों को दिया मुआवजा

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने गांव जाकर अनाथ बच्चों को दिया मुआवजा

रांची।  झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष अपरेश कुमार सिंह की पहल पर राज्य में कोविड-19 से अनाथ हुए बच्चों के लिए प्रोजेक्ट शिशु लांच किया गया है।
न्यायमूर्ति श्री सिंह शुक्रवार को प्रोजेक्ट शिशु के तहत खुद रांची के मांडर प्रखंड अंतर्गत गुरगुरजारी गांव पहुंचे। पिछले दिनों इस गांव में चार बच्चों के माता-पिता की मौत कोरोना के कारण हो गयी थी और अब उनके घर में सिर्फ बूढ़े दादा है। न्यायमूर्ति ने स्वयं पीडित परिवारों से मुलाकात की और बच्चों की शिक्षा और परवरिश को लेकर हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उनकी ओर से प्रोजेक्ट के तहत दिये जाने वाले लाभ के बारे में पूरी जानकारी भी दी गयी और तत्काल अंतरिम सहायता के रूप में परिवार को दस हजार रुपये का चेक दिया गया तथा बच्चों के दादा को पेंशन के लाभ से संबंधित दस्तावेज प्रदान किया।
न्यायाधीश के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी संबंधित परिवार को दिया गया, साथ ही चारों बच्चों का नामांकन प्रखंड के विद्यालय में कराने की अनुशंसा की गयी है। इन चारों बच्चों को स्पांसरशिप स्कीम के तहत जोड़कर तीन माह की राशि प्रदान की गयी। वहीं, झालसा द्वारा उस परिवार को आवश्यक सामग्री भी प्रदान की गयी। साथ ही उनके परिवार के सभी सदस्यों का मेडिकल चेकअप कराया और किताबें तथा पढ़ाई से संबंधित सामग्रियों का भी वितरण किया गया।
गौरतलब है कि मांडर प्रखंड के गरगुरजारी गांव में पिछले दिनों कोरोना काल में कुलदीप उरांव और उसकी पत्नी गंगोत्री उराईन की मौत हो गयी। बच्चों की उम्र 5 से 16 वर्ष के बीच है।