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सुरक्षा बलों ने ली दो चौकियों की अतिरिक्त जिम्मेदारी,सडक निर्माण और विकास कार्यो में मिलेगी मदद

सुरक्षा बलों ने ली दो चौकियों की अतिरिक्त जिम्मेदारी,सडक निर्माण और विकास कार्यो में मिलेगी मदद

भिलाई। सीमा सुरक्षा बल वर्ष 2009 से छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सल विरूद्ध अभियान में तैनात है और दुर्गम क्षेत्रों में बड़ी कठिन परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी को बड़े ही निपुणता के साथ निभा रही है। जिला कांकेर के दुरदराज अतिसंवेदनशील इलाकों में आजादी के बाद वर्षों से सड़क निर्माण का कार्य नही हुआ था। जिसे सुरक्षा बल सुरक्षा देकर सड़क निर्माण का कार्य पूरा कराया। जिसका वहां के ग्रामिणों को छोटे शहर के साथ जुडऩे का अवसर प्राप्त हुआ।


सुरक्षा बल की तैनाती से पहले जिला कांकेर के क्षेत्र में नक्सलियों का आतंक और भय व्याप्त था। परन्तु सुरक्षा बल ने क्षेत्र से नक्सलियों के विरूद्ध लगातार कार्यवाही करके जनमानस के मन में सुरक्षा की भावना एवं बल के प्रति एक सकारात्मक रवैया पाने में सफलता हासिल की है। इस कार्य में सुरक्षा बल के प्रत्येक अधिकारी, अधिनस्थ अधिकारी एवं जवानों के साथ-साथ सुरक्षा बल के खुफिया विभाग की अहम भूमिका रही है।

सुरक्षा बल की कार्य क्षमता को देखते हुए अतिसंवेदनशील इलाके सीओबी महला, थाना प्रताप पुर जिला कांकेर से लगभग 6 किमी उत्तर पूर्व दिशा में स्थित ग्राम कटगांव में एक नया चौकी बनाने का जिम्मा मिला जिसे सुरक्षा बल ने पुरा करते हुए  अपने जवानों को तैनात किया। जिला कांकेर, थाना प्रतापपुर इलाके को माओवादियों का गढ़ माना जाता है। दूसरी तरफ सीओबी उदानपुर, थाना कोयलीबेड़ा जिला कांकेर से लगभग 3.5 किमी पश्चिम दिशा में घने जंगल में स्थित गांव कामतेड़ा में नया चैकी बनाकर अपने जवानों को तैनात किया। जहां के आदिवासी ग्रामीण लोग नक्सलियों के दबाव तथा भय के कारण शिक्षा एवं विकास से वंचित है। सुरक्षा बल ने यहां अपनी चौकी बनाकर ग्रामीण आदिवासी लोगों के दिल में नक्सलियों का भय तथा उनके दबाव को दूर करने का प्रयास कर रही है।


चारों तरफ जंगल से घिरे हुए एवं नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले इलाकों की जिम्मेदारी लेकर सुरक्षा बल ने अपने उच्च दर्जे के प्रशिक्षण तथा कुशल कार्यक्षमता की पहचान दी है। जिससेवहां आसपास गांव के लोगों में उत्साह बढ़ा है। सुरक्षाबलों के नए कैम्प की स्थापना होने से आसपास के गांवकलारटोला, डोरजे, वट्टेकाल, गट्टाकाल, गोमे, रामपुर, पुस्टर, वेरकोर, लोहारी, और गोटांज जैसे आदिवासी बहुल इलाके में विकास की रफ्तार तेज होगी जो वर्तमान में माओवादियों का सुरक्षित ठिकाना है। नए कैम्प कटगंाव एवं कामतेड़ाकी स्थापना से इलाके में माओवादियों की गतिविधियों में अवरोध उत्पन्न होगा। जो कि माओवादियोंका माढ़ एरिया़, एमएमसी और राजनांदगांव जाने का प्रमुख रास्ता हैं। साथ ही साथ इलाके में चल रहे विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा जिनका सीधा फायदा दूर स्थित ग्रामिणों को मिलेगा। माओवादियों द्वारा आसपास के ग्रामीणों को नए कैंप का विरोध करने के लिए उकसाया जा रहा है।


सुरक्षा बल के जवान दुर्गम क्षेत्रों में बड़ी कठिन परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, और बड़ी निपुणता के साथ अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। सुरक्षा बल अपने जवानों की मेहनत की बदौलत आज अपने इलाके के लोगों के बीच एक कार्यकुशल और कारगर फोर्स बनकर उभरी रही है, जिसके लिए हमें अपने जवानों पर गर्व है। सुरक्षाबल के जवान जहां नक्सल के खिलाफ  सख्त कदम उठाते हैं, वहीं अपने व्यवहार से लोगों का दिलजीत कर उनके दिलों में सुरक्षा की भावना भी पैदा कर रहे हैं।