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‘राइट टू एजुकेशन’ फोरम ने की शिक्षा पर जीडीपी का छह प्रतिशत खर्च करने की मांग

‘राइट टू एजुकेशन’ फोरम ने की शिक्षा पर जीडीपी का छह प्रतिशत खर्च करने की मांग

नयी दिल्ली।  ‘राइट टू एजुकेशन’ फोरम ने मोदी सरकार से अगले बजट में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत खर्च करने तथा कोविड-19 महामारी को देखते हुए शिक्षा के क्षेत्र में एक विशेष पैकेज देने की मांग की है। राइट टू एजुकेशन फॉर्म के संयोजक अम्बरीष रॉय ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बजट पूर्व चर्चा के दौरान यह मांग की।

उन्होंने सीतारमण के सामने पेश अपने प्रतिवेदन में कहा कि स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए जरूरी यह है कि शिक्षकों को नियुक्त किया जाए, नए सरकारी स्कूल खोले जाएं तथा आधारभूत संरचनाओं को सुधारा जाए। साथ ही एक वित्तीय रोड मैप भी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि सालों से बार-बार मांग उठती रही है कि शिक्षा का बजट सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत किया जाए लेकिन आज तक यह नहीं हो पाया। इसलिए हम एक बार फिर सरकार से मांग करते हैं कि शिक्षा को समावेशी बनाने तथा ड्रॉपआउट की समस्या को दूर करने और आधारभूत ढांचागत सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा का बजट छह प्रतिशत किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 के कारण बहुत सारे बच्चे स्कूलों में दाखिला नहीं ले पाए और बीच में छोड़ कर चले गए । उनके लिए ऑनलाइन पढ़ने की सुविधा मुहैया कराई जाए। इस सब के लिए एक विशेष पैकेज भी दिया जाए ।

उन्होंने यह भी बताया कि अक्टूबर 2020 तक शिक्षा के बजट का 36 प्रतिशत ही खर्च हो पाया है इसलिए जरूरी यह है कि जो राशि आवंटित की जाती है उसका समय रहते पूरा का पूरा इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में असमानताओं को दूर करने की भी मांग की।