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डूबते सूर्य देव को पहला अर्घ्य दिया जाएगा, संतान की मंगल कामना के लिए 36 घंटों का निर्जला व्रत रखती हैं माताएं

 डूबते सूर्य देव को पहला अर्घ्य दिया जाएगा, संतान की मंगल कामना के लिए 36 घंटों का निर्जला व्रत रखती हैं माताएं

नईदिल्ली। आज छठ महापर्व का तीसरा दिन है। आज  शाम को डूबते सूर्य की उपासना की जाएगी और सूर्य देव को पहला अर्घ्य दिया जाएगा।  इस अर्घ्य को संध्या अर्घ्य भी कहते हैं।  अर्घ्य देने से पहले सूर्य देव और छठी मइया की पूजा की जाती है।  छठ व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। 

 इसमें महिलाएं अपने सुहाग और संतान की मंगल कामना के लिए 36 घंटों का निर्जला व्रत रखती हैं. छठ पूजा का प्रारंभ चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होता है और सप्तमी के दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है.

आज शाम डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा. संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 25 मिनट पर है. सूर्य देव को अर्घ्य देने से पहले बांस की टोकरी को फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू और पूजा के सामान से सजाया जाता है. सूर्यास्त के समय सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पांच बार परिक्रमा की जाती है.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सायंकाल में सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं. इसलिए छठ पूजा में शाम के समय सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उनकी उपासना की जाती है. कहा जाता है कि इससे व्रत रखने वाली महिलाओं को दोहरा लाभ मिलता है. जो लोग डूबते सूर्य की उपासना करते हैं, उन्हें उगते सूर्य की भी उपासना जरूर करनी चाहिए.