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मानस है गृहस्थ जीवन शिक्षा शास्त्र- संत श्री रविकर साहेब

मानस है गृहस्थ जीवन शिक्षा शास्त्र- संत श्री रविकर साहेब

 धमतरी, 4 जनवरी। सोरम भटगांव में 1 से 4 जनवरी तक संपन्न हो रहे चार दिवसीय ग्रामउत्सव मानसगान एवं मड़ई मेला कार्यक्रम संपन्न हो रहा है जिसमें 1 से 3 जनवरी तक विभिन्न मंडली द्वारा मानस गायन कार्यक्रम संपन्न हुआ तथा 4 जनवरी को मड़ाई मेला का आयोजन है। 

3 जनवरी को विशेष मानस प्रवचन के लिए संत कबीर सेवा संस्थान देवपुर एवं यथार्थ फाउंडेशन धमतरी के संरक्षक परम पूज्य संत श्री रविकर साहेब ने लोगों को जीवन जीने का संदेश दिया ।

संत श्री ने कहा, जहां दूसरे के हक को भी लेने का मन हो वहां महाभारत की शुरुआत होती है और जहां अपने हक को भी दूसरे के लिए त्याग करने का मन हो वहां रामायण की शुरुआत होती है  मानसग्रंथ संपूर्ण शिक्षा शास्त्र है।  राम से ज्ञान और आज्ञा पालन का सीख मिलती है, लक्ष्मण से वैराग्य, सीता से भक्ति और पतिव्रता, भरत से त्याग और विनम्रता, शत्रुघ्न से मौन का संदेश मिलता है रावण- अहंकार का प्रतीक है।

राम और कृष्ण ने भी गुरु के आगे नतमस्तक हुए हैं स्वयं राम ने शिवरी से नवधा भक्ति में कहा है, प्रथम भगति संतन कर संगा, दुसरि  रति मम कथा प्रसंगा।

गुरु पद पंकज सेवा, तीसरी भक्ति अमान।

सतवी सबमो मै जग देखै, मोते अधिक संत करी लेखै ।।

संपूर्ण नवधा भक्ति ज्ञान का संदेश देती है।


हम राम को मानते हैं लेकिन राम का नहीं मानते इसलिए हमारे जीवन में दुख है । इसलिए सत्संग कथा और संतों में प्रेम रखें और संपूर्ण जीवों से प्रेम करें । ज्ञान भक्ति और कर्म से आत्म कल्याण और परोपकार में अपने जीवन को लगाएं ।

धर्मार्थ कल्याण मानस समिति ने संतों का आभार व्यक्त किया साथ ही श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया ।