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लोकतंत्र को कमजोर करने और चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश में फ़ेसबुक : कांग्रेस

लोकतंत्र को कमजोर करने और चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश में फ़ेसबुक : कांग्रेस

नयी दिल्ली।  कांग्रेस ने फेसबुक पर भारत के चुनावों को प्रभावित करने और लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए इसकी संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की है।

कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोमवार को यहाँ संवाददाता सम्मेलन में आरोप लागत कि फेसबुक सत्तारूढ़ भाजपा के सहयोगी के रूप में काम कर रहा है और अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने फ़ेसबुक पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस देश से आप कमा रहे हैं और इस देश में ही बांटने की एक विचारधारा को प्रचारित कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी यह नहीं होने देगी, लोकतंत्र के साथ इससे बड़ा खिलवाड़ होते हुए नहीं देखा, जहाँ आप पाँच साल तक एक एजेंडा, एक विचारधारा चलाते हैं और फिर चुनाव के वक्त आप लोगों का जो वोटिंग बिहेवियर प्रभावित करते हैं।

यह एक चुनाव फ्रॉड से कम नहीं माना जाएगा कि हमारे वोटिंग में भी हस्तक्षेप अगर हो रहा है तो वो फेकबुक या फेसबुक, जो भी आप कहना चाहें, उसके माध्यम से हो रहा है। उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति की मांग की ताकि पता चल सके फेसबुक भारत के लोकतंत्र के साथ किस प्रकार खिलवाड़ कर रहा है।

उन्होंने फेसबुक की व्हिसलब्लोअर फ्रांसेस हौगेन के खुलासे का हवाला देते हुए बताया कि हिंदी और बांग्ला भाषा के जानकार हिंदुस्तान की फेसबुक की टीम में नहीं है। हिंदी और बांग्ला में फ़ेक और नफ़रत फैलाने वाले संदेशों को फिल्टरिंग करने का स्टाफ उनके पास नहीं है। भारत में केवल नौ प्रतिशत उपयोगकर्ता अंग्रेजी में हैं और फिर भी उनके पास क्षेत्रीय भाषाओं के पोस्ट, कंटेंट को फिल्टर करने की व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने कहा कि 2020 में फेसबुक की सुरक्षा टीम ने कहा था कि बजरंग दल कुछ वर्ग विशेष के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है । फेसबुक बजरंग दल जैसी संस्था को एक खतरनाक संस्था घोषित करने वाला था लेकिन उनको सलाह दी गई कि ऐसा करने से देश की सत्ताधारी पार्टी नाराज हो सकती है और और फिर फ़ेसबुक ने बजरंग दल के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की।

 खेड़ा ने कहा कि पिछले साल भाजपा से जुड़ी अंखी दास का मामला सबके सामने आया था जिससे पता चला था कि भाजपा के लोग फेसबुक के अंदर घुस चुके हैं। बात सिर्फ हेट स्पीच की नहीं है, बात है कि हिंदुस्तान फेसबुक का सबसे बड़ा मार्केट है, 37 करोड़ उपभोक्ता हैं फेसबुक के हिंदुस्तान में। तो उन 37 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ जो धोखा हो रहा है, कैसे एक विचारधारा को उन पर थोपा जा रहा है।

कैसे गलत, फेक न्यूज, फेक इमेजिस, फेक पोस्ट के माध्यम से देश में एक माहौल बनाया जा रहा है जो सत्ताधारी पार्टी के माफिक है, वह चाहते हैं कि ऐसा माहौल हो।