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डॉ एम डी सिंह की कविताः आंदोलन

डॉ एम डी सिंह की कविताः आंदोलन


विरोध और विवेक 

जब तक रहें साथ

हिंसक नहीं होंगे हाथ

इच्छाएं लक्ष्य पर अड़ी रहेंगी 

बिन भटके खड़ी रहेंगी

आतंक नहीं 

आंदोलन जन्म लेगा


लक्ष्य पाने की जिद्द 

पीड़ा सहने का माद्दा

भय को पराजित करेंगे

अभय धुआं बन कर फैलेगा

समसोची दिमागों को अपनी चपेट में लेगा 

सुलगेगा धू-धू कर जलेगा

लोग भविष्य की आतताई परिणामों को 

दरकिनार करेंगे

आंदोलन चल पड़ेगा


जब चेतना चित पर घर बना लेगी

मन को पकड़कर भीतर बिठा लेगी

धारणा पर धैर्य सवार हो जाएगा

विरोधी लक्ष्य साधक योगी बन जाएगा

हठ तप को जन्म देगा

तप विस्मयकारी ताकत को

प्रतिरोध विखंडित होने लगेंगे

आंदोलन लक्ष्य के निकट होगा


विकार और विध्वंस विलुप्त हो जाएंगे

विरोध की विवेचना विवेक को साधेगी 

गाठें खुलेंगी अवरोध अवमुक्त हो जाएंगे

गूंगा भी बोलेगा बहरा भी सुनेगा

प्रतिरोधी सर सत्य के आगे झुकेगा 

साधक समाधि को 

आंदोलन आनंद को पा लेगा