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कोरोना श्रृंखला में जाने माने सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताएं

कोरोना श्रृंखला में जाने माने सुप्रसिद्ध कवि  ध्रुव शुक्ल की  कविताएं

हमने इसके पहले ध्रुव शुक्ल की कोरोना को लेकर कविता बाजार से खरीदी मृत्यु और  दूसरी कविता “जरूरत से ज्यादा “  जारी की थी । आज उसी श्रृंखला में दो और कविताएं....


लाक- डाउन आल्हा


गाहक बिना बजरिया सूनी,

सूनी दौलत बिन व्यापार

बिन आगी के चूल्हो सूनो,

सूनी रात बिना उजयार

चले बिना सब रस्ता सूनो,

सूनो बिना मिले परिवार

बिन पनहारी पनघट सूनो,

सूनी बिना चिरैया डार

बिना पात कौ तरवर सूनो,

सूनो है पानी बिन ताल

बिना साँस सब दुनिया सूनी,

सूनी बिन जीवन चौपाल

बिन काँधों के अरथी सूनी,

रूप बिना सूनो परकास

बिन हरयाये धरती सूनी,

सूनो बिन बातन आकास

बिना राज के परजा सूनी,

सूनो बिन परजा के राज

बिन जोतें सब खेती सूनी

सूनो खेतीहर बिन काज

बिना जहर के अमरित सूनो,

सूनो है बिन वैद इलाज

जहर की खेती करी है भैया

दुनिया भुगत रही है आ


उनके मरने का किसको ग़म

उनको सबकी मौत दिखाई देती है

वे विपदा आने से पहले रोने लगते हैं

न जाने किस बेचैनी में नींद तोड़ते रहते हैं

हमको विपदा में फँसा जानकर

पीछे-पीछे आते हैं

उनका रोना सुने न कोई

सुनें, तो चिढ़कर गुने न कोई

उनको आवारा समझ

मार देती जब चाहे नगर निगम

उनके मरने का किसको गम


अब सूनी सड़कों पर

वे गुमसुम घूम रहे हैं

एक-दूसरे को आपस में चूम रहे हैं

कोई तो घर से निकलेगा

जिसके पीछे फिर हो लेंगे

अगर कोई विपदा आई तो

विपदा से पहले रो देंगे