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खबर का असर- नरेगा में लाखो के घोटाला मामले में एक मनरेगा अधिकारी बर्खास्त , विभाग के दोषियों को बचाने में जुटी जिला पंचायत

खबर का असर- नरेगा में लाखो के घोटाला मामले में एक मनरेगा अधिकारी बर्खास्त , विभाग के दोषियों को बचाने में जुटी जिला पंचायत

चंद्र प्रकाश साहू

सूरजपुर। केंद्र सरकार की महवपूर्ण योजना ग्रामीण अंचलों की विकाश करने वाली महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में कई निर्माण कार्यो में सेमिस्कील  के नाम पर मैनिवल के जरिये से ग़लत तरीके से लाखों रुपये घोटाला करने का मामला आज की जनधारा ने समाचार प्रकाशित की थी। जिसके बाद जिला प्रशासन ने तत्कालीन नरेगा प्रोग्राम अधिकारी निर्मल श्याम को सूरजपुर जिला पंचायत में अटैच कर दिया था। साथ ही प्रेमनगर के पदस्थ पूर्व पीओ व वर्तमान सूरजपुर प्रोग्राम अधिकारी नरेंद्र जांगड़े को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिसके उपरांत लग़ातार समाचार प्रकाशन से जिला पंचायत ने बीते दिनों पूर्व मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी को 12 लाख रुपये रिकवरी के आदेश दिए थे। जिसकी राशि नही जमा करने पर सेवा से पृथक कर दिया गया है। तो वहीं पूर्व मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी घोटाला करने वाले एक और मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र जांगड़े को बचाने में जिला प्रशासन लगी हुई है।

 जिला पंचायत से जारी नोटिस में लिखते है कि

नरेगा में जांच के दौरान भुगतान होना पाया गया है। जिसको लेकर प्रेमनगर में पदस्थ दो तकनीकी सहायक, सहित कई पंचायतो को बीते 13 दिसम्बर 2018 को कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिवस के भीतर जवाब मांगा था। नोटिस में मिट्टी से सम्बंधित कार्यो को लेकर जवाब मांगा गया है। नोटिस में लिखा है कि वर्ष 2016-2017, 2018- 19 में पंचायत वार दर्शाते हुए 18 लाख 64 हजार 614 रुपये निकासी की गई है। इस सम्बध में तीन दिवस के भीतर जवाब मांगा गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सप्श्टिकरण तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक, प्रोग्राम अधिकारी ने जिला पंचायत तीन दिवस के भीतर दे दिया गया था।

 जिसके बाद फाइल बंद करने की कोसिस की गई किंतु जनधारा ने मामले को निष्पक्षत से उठाते रहा। ऐसे में कई जांच कमेटी गठित की गई थी। जो जिला पंचायत के अधीन कर्मचारी थे। ऐसे में जांच पर भी सवाल खड़े हो रहे है। जांच अधिकारी अपने सहयोगी के खिलाफ कतरा रहे थे।

इस सम्बंध में कई दफा समाचार व शिकायक्त देने के बाद जिला पंचायत सीईओ मामूली अर्थ दंड लगाकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की  कोसिस कर रहे थे। किंतु रकम को भी नरेगा कार्यक्रम अधिकारी द्वारा नही दिया गया। जिसके उपरांत मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी निर्मल श्याम को सेवा से पृथक कर दिया गया है। तो वहीँ इनके सहयोगी मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र जांगड़े के ऊपर कोई कार्यवाही नही की गई है। आरोपियों को बचाने का कार्य जारी है। जिसके लिए दस्तावेज से छेड़छाड़ की जा रही है।

बतादें कि प्रेमनगर जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नही ले रहा हैं। वहीं प्रेमनगर जनपद पंचायत में केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण योजना में से एक महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत हुए विभिन्न निर्माण कार्यो में बचे हुए शेष राशि का फर्जी तरीके से तस्तावेज तैयार कर कुछ रोजगार सहायक, ठेकेदारों से मिली भगत करके प्रेमनगर नरेगा प्रोग्राम अधिकारी निर्मल श्याम, नरेंद्र जांगड़े, इनके साथ प्रेमनगर जनपद में पदस्त मनरेगा विभाग में कार्यरत, ओपरेक्टर, सहायक ग्रेड (बाबू) रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक के द्वारा

 करीब 65-70 लाख रुपये का राशि फर्जी तरीके से मिस्त्री पेमेंन्ट के नाम पर मैनुवल मास्टर का भुगतान अपने करीबी ठेकेदारों के खाते में 50 प्रतिशत राशि कमीशन लेकर कई ग्राम पंचायतों में हुए निर्माण कार्य को लेकर पेमेंट कर दिया गया है।

  - कैसा हुआ खुलाशा..

जनपद पंचायत रामानुजनगर जनपद सीईओ प्रेमनगर जनपद के अतिरिक्त प्रभार में थे। इस दौरान गड़बड़ी किए जाने की जानकारी लगी सीईओ ने करीब 17 ग्राम पंचायतों के रोजगार सचिव, तकनीकी सहायक, इंजीनियर, पूर्व पीईओ नरेंद्र जांगड़े, वर्तमान पीईओ निर्मल श्याम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

और अग्रिम कार्यवाही के लिए जिला पंचायत को दस्तावेज भेज दिया था। जिला पंचायत सीईओ ने जांच की जिम्मेदारी एपीओ अनिल व जिला पंचायत मनरेगा प्रोग्रामर सुनील गुप्ता को जांच की जिम्मेदारों दी गई थी।

एपीओ अनिल ने जांच के दौरान रोजगार सहायको को जिला पंचायत में बुलाकर समझाइस दिया गया था। इस बीच तबादला हो जाने से जांच बीच मे छोड़ दिया गया था।

- रोजगार सहायकों ने बताया 'आजकी जनधारा' को

रोजगार सहायकों ने 'आज की जनधार' से चर्चा करते हुए बताया कि 17 ग्राम पंचायतों में मैनुवल मास्टररोल के पैसे निकालने के लिए प्रेमनगर पीईओ निर्मल श्याम, नरेंद्र जांगड़े ने तटबंध, डबरी, स्टापडेम, कुंप (कुंआ) शौचालय के अलावे अन्य कई निर्माण कार्यों के राशि निकलने के लिए रोजगार सहायकों को बुलाकर 50  प्रतिशत राशि देने की बात कही गई थी। कुछ रोजगार सहायकों ने सामने आकर मैनुवल मास्टरोल की राशि आहरण करने के लिए कहा गया कुछ रोजगार सहायक अपने अधिकरियो के झांसे में आकर पैसे निकलवा लिए तो वहीं कुछ ग्राम पंचायत के ठेकेदार को बुलाकर डायरेक्ट उनके बैंक खाता में पेमेंट कर दिया जिसमें तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक का सिग्नेचर भी नही किया गया है।

- कब किया घोटाला

- डाटा से भी किया गया था छेड़- छाड़..

 सुत्रों की मानें तो पीओ द्वारा फर्जीवाड़ा किए जाने के लिए जिला पंचायत में अटैच होने के दौरान अपने मन माफीक फाइल से छेड़छाड़ की गई है हालांकि वस्तुस्थिति पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही कई अधिकारी जांच के घेरे में आएंगे।

 जिला पंचायत को एक वर्ष से अधिक का समय लग गया मामले को जांच करने में जो दिखता है कि छोटे कर्मचारियों से लेकर बड़े कर्मचारी किस तरह से लाखों के घोटाला करने वाले अधिकारियों को मौन सहमति दिए हुए है।

- क्या कहा मनरेगा तकनीकी सहायक प्रदेश अध्यक्ष ने..

छत्तीसगढ तनीकी सहायक संघ प्रदेश अध्यक्ष शिवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मैनुवाल के जरिये लाखों रुपये का घोटाला किया गया है। जो गलत है इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के लिए संघ उच्च स्तर तक ज्ञापन जारी किया जाएगा, साथ ही जिला प्रशासन द्वारा अपने मनरेगा विभाग में हुए इतने बड़े घोटाला का तथ्य सब कुछ सामने होने के बाद भी जिला पंचायत द्वारा कोई भी कार्यवाही नही की जा रही है। आरोपियों को बचाने में जिला पंचायत लगी हुई है जो घोर लापरवाही है। जल्द ही ठोस कार्यवाही नही गई तो उच्च न्ययालय जाने के लिए बाध्य होंगे।

- वर्जन

 इस सम्बद्ध में जिला पंचायत सीईओ आकाश छिकारा ने कहा एक कार्यक्रम अधिकारी को सेवा से पृथक कर दिया गया है। सवालो के जवाब देते हुए कहा कि नरेंद्र जांगड़े द्वारा कार्य को पूर्ण करा दिया गया है। जांच चल रही है। सभी को नोटिस जारी किया गया है।