‘पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट के लिए सभी लाइटें बंद करें, मोमबत्ती-दिया-मोबाइल फ्लैश जलाएं’

‘पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट के लिए सभी लाइटें बंद करें, मोमबत्ती-दिया-मोबाइल फ्लैश जलाएं’

नई दिल्ली, 3 अप्रैल। कोरोना वायरस के संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज फिर देशवासियों को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने देशव्यापी लॉकडाउन के नौ दिन के दौरान लोगों के अनुशासन और सेवाभाव की तारीफ की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘शासन प्रशासन और जनता ने इस स्थिति को अच्छे ढंग से संभालने का पूरा प्रयास किया है.’ प्रधानमंत्री ने 22 मार्च के जनता कर्फ्यू का जिक्र भी किया. उन्होंने कहा, ‘आपने जिस प्रकार 22 मार्च रविवार के दिन कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले हर किसी का धन्यवाद किया वो भी आज सभी देशों के लिए एक मिसाल बन गया है. आज कई देश इसको दोहरा रहे हैं.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक और विशेष कवायद की अपील भी की. उन्होंने कहा कि इस रविवार यानी पांच अप्रैल को सब लोग घर की सभी लाइटें बंद करके, दरवाजे पर या बालकनी में खड़े रहकर नौ मिनट के लिए मोमबत्ती, दिया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाएं. उनका कहना था, ‘चारों तरफ जब हर व्यक्ति एक-एक दीया जलाएगा, तब प्रकाश की उस महाशक्ति का हसास होगा, जिसमें एक ही मकसद से हम सब लड़ रहे हैं.’ प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के संकट के अंधकार को चुनौती देता यह 130 करोड़ देशवासियों की महाशक्ति का जागरण होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, ‘उस प्रकाश में, उस रोशनी में, उस उजाले में, हम अपने मन में ये संकल्प करें कि हम अकेले नहीं हैं, कोई भी अकेला नहीं है. 130 करोड़ देशवासी, एक ही संकल्प के साथ कृतसंकल्प हैं.’ प्रधानमंत्री का यह भी कहना था कि इस दौरान कोई गली-मोहल्ले में बाहर न जाए. उन्होंने कहा, ‘मेरी एक और प्रार्थना है कि इस आयोजन के समय किसी को भी, कहीं पर भी इकट्ठा नहीं होना है. रास्तों में, गलियों या मोहल्लों में नहीं जाना है. अपने घर के दरवाजे, बालकनी से ही इसे करना है.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लॉकडाउन के इस समय में 130 करोड़ देशवासियों की सामूहिक शक्ति हर व्यक्ति के साथ है. उनका कहना था, ‘हमारे यहां माना जाता है कि जनता जनार्दन, ईश्वर का ही रूप होती है. इसलिए जब देश इतनी बड़ी लड़ाई लड़ रहा हो, तो ऐसी लड़ाई में बार-बार जनता रूपी महाशक्ति का साक्षात्कार करते रहना चाहिए. हमें निरंतर प्रकाश की ओर जाना है, जो इस कोरोना संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, हमारे गरीब भाई-बहन उन्हें कोरोना संकट से पैदा हुई निराशा से आशा की तरफ ले जाना है.’