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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -ग्लोबल विलेज में अभिव्यक्ति के खतरे

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -ग्लोबल विलेज में अभिव्यक्ति के खतरे

-सुभाष मिश्र

जब भारत विश्वगुरु बनने का सपना देखता है, जब हमारे प्रधानमंत्री विश्व नेता की छवि गढऩा चाहते हैं तो निश्चित रूप से हमारे देश में जो कुछ हो रहा है उस पर विश्व की नजर तो रहेगी। हम नमस्ते ट्रम्प आयोजित करे, अमेरिका चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने में कोई कोर-कसरनहीं छोड़े और भारतीय मूल की मां की बेटी कमला हैरिस अमेरिका की उपराष्ट्रपति बन जाये तो खुशियां मनाएं, अपनी भावनाएं व्यक्त करें ऐसे में यदि उनकी भतीजी नीना हैरिस किसानों के फैसले को कुछ लिखकर ट्वीट कर दे, तो हमारे देश की संप्रभुता पर हमले की विदेशी साजिश कैसे हो जाती है। सवाल यह भी है कि गांधी जी को दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद मामले में नहीं बोलना चाहिए। हमारे आसपास के देशों में हो अन्याय और अत्याचार पर क्या हम हमेशा से चुप रहे हैं? मानव अधिकारों के संरक्षण के लेकर पूरी दुनिया के देशों में जो संधि, सहमति बनी है, वह नहीं होनी चाहिए? म्यांमार में एक लोकतांत्रिक सत्ता को हथिया कर सैनिक शासन स्थापित हो जाये और बाकी दुनिया के देश खामोशी से ये देखे, क्या ये संभव है। पूरी दुनिया में ऐसा कहीं और नहीं होता है कि अन्याय और अत्याचार का विरोध न हो। किसी देश में यदि अन्याय, अत्याचार हो तो संवेदनशील लोग जो इस समय एक विश्वग्राम के नागरिक है, निश्चित ही विरोध करेंगे। जब हम सोशल मीडिया के जरिये पूरी दुनिया से जुड़े हुए हैं तो दुनिया की प्रतिक्रियाएं चाहे वह अच्छी हो, खराब हो ,आयेगी ही।

देश में दो माह से अधिक समय से चल रहे किसान आंदोलन में 165 से अधिक किसानों के मरने और शांतिपूर्ण आंदोलन को समाप्त करने और किसान विरोधी कृषि कानूनों को वापस लेने केलिए जब हमारे देश के सिनेमा, क्रिकेट के सेलिब्रिटी आगे नहीं आये। जब इंटरनेशनल सेलिब्रिटी रिहाना ,ग्रेटा और नीना हैरिश आगे आए और प्रतिक्रिया दे तो अचानक से पूरे देश के सेलिब्रिटी जाग जाये यह तो चौंकाने वाली बात है। दरअसल, सरकार इन सेलिब्रिटी के जरिये देश के लोगोंके बीच यह संदेश देना चाहती है कि यह हमारे देश के आंतरिक मामला है।

किसान आंदोलन पर प्रतिक्रिया देने वाली इंटरनेशनल पॉप स्टार रिहाना भारत में चल रहे किसानआंदोलन पर ट्वीट करने के बाद से सुर्खियों में छाई हुई हैं। रिहाना ने भारत में जारी किसानआंदोलन पर ट्वीट करने के एक घंटे के भीतर ही एक अन्य दक्षिण एशियाई देश म्यांमार में जारी राजनीतिक उथलपुथल पर भी ट्वीट किया है। रिहाना ने लिखा है, म्यांमार मेरी प्रार्थनाएँ आपके साथ हैं। इससे पहले रिहाना को कुछ भारतीय ट्विटर यूज़र्स की ओर से म्यांमार पर नहीं बोलने को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा था।

सीएनएन की एक स्टोरी का लिंक शेयर करते हुए लिखा- आखिऱ हम इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं? इस ट्वीट के साथ उन्होंने हैशटैग भी लगाया। रिहानाके इस ट्वीट पर अभी तक 66.9 हज़ार रिएक्शन आ चुके हैं। 14 हज़ार से अधिक री-ट्वीट हो चुके हैंऔर 156.4 हज़ार से अधिक लाइक भारत में रिहाना टॉप ट्विटर ट्रेंड है।

रिहाना के ट्वीट को कुछ लोग इसे पब्लिसिटी स्टंट बता रहे हैं तो कुछ उनकी सराहना कर रहे हैं कि उन्होंने किसानों के लिए आवाज़ उठाई। किसान एकता मोर्चा ने लिखा है- शुक्रिया रिहाना, किसानों के आंदोलन के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करने के लिए, पूरी दुनिया देख सकती है लेकिन सरकार क्यों नहीं? लेकिन बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने लिखा है कि कोई इस बारे में बातइसलिए नहीं कर रहा है क्योंकि वे किसान नहीं हैं वे आतंकवादी हैं, जो भारत को विभाजित करनेकी कोशिश कर रहे हैं ताकि चीन हमारे देश पर कब्ज़ा कर सके।

किसान आंदोलन का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि रिहाना को किसानों के पक्ष में ट्वीटकरने के लिए '3.5 मिलियन डॉलर' मिले।  अमेरिकी उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस की भांजी मीनाहैरिस, पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और पूर्व पॉर्न स्टार मिया ख़लीफा ने भी किसानों के  मुद्देपर ट्वीट किया है। मीना हैरिस ने लिखा है, हम सभी को भारत में इंटरनेट शटडाउन और किसानप्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की हिंसा को लेकर नाराजग़ी जतानी चाहिए।

पूर्व क्रिकेटर और भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने भी इन्हीं दो हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए एकट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है, भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता। भारत मेंजो भी हो रहा है बाहरी ताकतें उसक दर्शक हो सकती हैं लेकिन प्रतिभागी नहीं। भारतीय भारत को जानते हैं और फैसला उन्हें ही लेना है। आइए एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहें।

लता मंगेशकर ने भी ट्वीट कर उन्होंने लिखा कि भारत एक गौरवशाली राष्ट्र है। एक गौरवांवितभारतीय होने के नाते मेरा पूरा यक़ीन है कि बतौर राष्ट्र हमारी कोई भी समस्या हो या परेशानी, हमउसे सौहार्दपूर्ण तरीक़े से, जनहित की भावना के साथ हल करने में पूरी तरह से सक्षम हैं।

भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली ने साथ ट्वीट किया है।विराट कोहली ने लिखा है। असहमति के इस दौर में हम सभी एकसाथ रहें। किसान हमारे देश काएक अभिन्न हिस्सा हैं और मुझे यक़ीन है कि सभी पक्षों सौहार्दपूर्ण समाधान निकाल लेंगें ताकिशांति बनी रहे और हम सब साथ मिलकर आगे बढ़ें। अभिनेता अजय देवगन ने लिखा है कि भारतऔर भारत की नीतियों के खिलाफ़  किसी तरह की ग़लत प्रोपगैंडा में न पड़ें। इस वक्त हमें आपसमें न झगड़ कर एक साथ खड़े रहना है।

भारत में जारी किसानों का आंदोलन अब दुनिया में सुर्खियां बटोर चुका है। पॉप स्टार रिहाना के आंदोलन के समर्थन में ट्वीट करने के बाद कई ग्लोबल सेलेब्रिटी ने इस मसले पर अपनी बात रखीहै, जिसके बाद भारतीय राजनीति में भी हलचल जारी है। इस सबसे इतर ट्विटर के सीईओ जैकडॉर्सी ने हाल ही में कुछ उन ट्वीट्स को लाइक किया है, जिनमें किसान आंदोलन के हक में बोलनेके लिए रिहाना की तारीफ  की गई है।

अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की पत्रकार कैरन ने हाल ही में रिहाना की तारीफ में कई ट्वीटकिए। कैरन के द्वारा रिहाना की तारीफ  की गई कि उन्होंने भारत में कई महीनों से जारी किसानोंके आंदोलन के हक में अपनी आवाज उठाई है। कैरन ने अपने एक ट्वीट में लिखा कि रिहाना ने कईआंदोलनों को लेकर सूडान, नाइजीरिया और अब भारत के मसले पर अपनी बात कही है।

रिहाना के ट्वीट के अगले दिन यानी तीन फरवरी को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने कहा है किभारत की संसद ने व्यापक बहस और चर्चा के बाद, कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी क़ानून पारितकिया। ये सुधार किसानों को अधिक लचीलापन और बाज़ार में व्यापक पहुंच देते हैं। ये सुधारआर्थिक और पारिस्थितिक रूप से सतत खेती का मार्ग प्रशस्त करते हैं। भारत के कुछ हिस्सों मेंकिसानों का एक बहुत छोटा वर्ग इन सुधारों से सहमत नहीं है। भारत सरकार ने प्रदर्शनकारियोंकी भावनाओं का सम्मान करते हुए, उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू की है। इस कोशिश में अब तक ग्यारह दौर की वार्ता हो चुकी है जिनमें केंद्रीय मंत्री हिस्सा ले रहे हैं सरकार ही नहीं, भारत के प्रधानमंत्री की ओर से इन क़ानूनों को स्थगित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

विदेश मंत्रालय ने अपने पोस्ट में  का इस्तेमाल किया है और कहा है कि इन विरोधोंको भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार और राजनीति के संदर्भ में और गतिरोध को हल करने केलिए सरकार और संबंधित किसान समूहों के प्रयासों के साथ देखा जाना चाहिए।

गृह मंत्री अमित शाह ने विदेश मंत्रालय के बयान के साथ ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है- कोई भीदुष्प्रचार भारत की एकता को नहीं तोड़ सकता। कोई भी दुष्प्रचार भारत को नई ऊँचाई पर जाने से नहीं रोक सकता। भारत का भविष्य दुष्प्रचार से नहीं प्रगति से तय होगा। भारत प्रगति के लिए एक होकर खड़ा है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने लिखा है, प्रोपगैंडा फैलाने वाले और फर्जी बातें फैलाने वालों की कोशिशों के खिलाफ़  हम एक साथ खड़े हैं। रिहाना, ग्रेटा, नीला हैरिस के बयान के बाद हमारे देश के फिल्म और क्रिकेट के सेलिब्रिटियों के प्रभाव का इस्तेमाल देश में प्रोपेगेंडाके लिए किया जा रहा है। सब जाते है कि इनका इंटरनेशनल स्तर पर कोई ज्यादा प्रभाव नहीं है, इन्हें देश के बाहर कम ही लोग जानते हैं। बौद्धिक स्तर पर अधिकांश फिल्मकार कमतर है औरजो बौद्धिक तरीके से विचार करने वाले है, उन्हें किसी भी तरह की आलोचना करने पर ट्रोल कियाजाता है। अधिकांश फिल्ममेकर संतुलन साधकर चलते हैं, ताकि उन्हें किसी प्रकार का नुकसान नहो। मेघा पाटकर से लेकर जितने ऐक्टिविस्ट हैं या सेलिब्रिटी हैं ये यदि सरकार के कार्यों कीआलोचना करते हैं तो उन्हें कभी अर्बन नक्सलाइट, देशद्रोही करार दिया जाता है। देश में तमामविफलताओं, प्रतिरोध और मत मंतातरन के बाद लोकतंत्र कायम है और रहेगा। अत्याचारी के खिलाफ आवाज उठाना लोकतंत्र धर्म है।