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प्रतिबंध मुक्त अक्षय तृतीया तीन को... डिजाईनर बेबी डॉल ने दर्ज करवाई आमद, मिट्टी के गुड्डे गुड़िया बहुत जल्द

 प्रतिबंध मुक्त अक्षय तृतीया तीन को... डिजाईनर बेबी डॉल ने दर्ज करवाई आमद,  मिट्टी के गुड्डे गुड़िया बहुत जल्द

राजकुमार मल

भाटापारा- अक्षय तृतीया या अक्ती, या कहें आखा तीज। सुख समृद्धि और शांति का यह पर्व इस बरस तीन मई को मनाया जाएगा। 15 दिन बाद आ रहे इस पर्व के लिए बाजार में अच्छी-खासी तैयारी दिखाई दे रही है क्योंकि कोविड नियमों से मुक्त, यह क्षेत्र दो साल बाद पहली बार खुली हवा में सांस ले रहा है।


सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक अक्षय तृतीया के लिए जहां बाजार ने विशेष तैयारियां की हुई हैं। वहीं शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-ब्याह की तैयारियां जमकर हो रहीं हैं।खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में यह तैयारी, जरूरी वस्तुओं की प्राथमिकता के साथ खरीदी के रूप में दिखाई दे रही है।शहरी इलाकों में भी यह पर्व इसी रुप में देखा जा रहा है लेकिन यहां फिलहाल कपड़े और फर्नीचर दुकानें विशेष रूप से मांग में बनी हुई है।

सर्व सिद्धी मुहूर्त


अक्षय तृतीया को अपने प्रदेश में 'अक्ती' के नाम से पहचान मिली हुई है। सर्व सिद्धी मुहूर्त के रूप में महत्व रखने वाले इस पर्व में विवाह, गृह प्रवेश, जैसे मांगलिक कार्य किए जाते हैं, तो वस्त्र , आभूषण, वाहन और नए भवन की खरीदी के लिए भी यह पर्व विशेष महत्व रखता है।

पहचान इससे भी

अक्षय तृतीया याने मिट्टी से बने गुड्डे और गुड़िया बहुत जल्द दिखाई देने वाले हैं।बांस शिल्प बेचने वाली दुकानों में इनके लिए जगह सुरक्षित करने की तैयारियों ने जोर पकड़ा हुआ है, तो फैंसी सामान बेचने वाली संस्थानों में डिजाईनर गुड्डे-गुड़ियों ने अपनी आमद दर्ज करवा दी है।इंतजार है, उन बच्चों का जो किसी भी दिन आ सकते है,खरीदी के लिए।

यहां बड़ी राहत


महामारी और संक्रमण की रफ्तार कम होने के बाद अक्षय तृतीया का पर्व, मिट्टी और बांस शिल्पकारों के लिए सुखद संदेश लेकर आ रहा है। यह इसलिए क्योंकि यही ऐसा पर्व है, जिसमें इन दोनों से बनाई सामग्रियों की मांग और खरीदी सर्वाधिक रहती है।यह मांग इस बरस अच्छी निकलने की संभावना है।लिहाजा तैयारियां विशेष रुप से किए जाने की खबर है।