breaking news New

संवैधानिक अधिकार की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज हुए एकजुट

संवैधानिक अधिकार की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज हुए एकजुट


स्थानीय मुद्दा कन्हैया गावड़े, एवं आरोपी एसआई किशोर की गिरफ्तारी

भानुप्रतापपुर। सर्व आदिवासी समाज के साथ हो रहे अन्याय पर कार्यवाही, संवैधानिक अधिकार को पूर्ण रूप से लागू करने सहित अन्य कई मांगो को लेकर सोमवार को समाज के द्वारा ब्लाक स्तरीय धरना प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौपा गया व अपने चरणबद्ध आंदोलन की शुरुवात की गई। समाज प्रमुखों ने कहा कि नगर में 2 ऐसी ज्वलन्त समस्याएं जिनपर तत्काल प्रशासन से कार्यवाही की उम्मीद है। पहला कन्हैयालाल गावड़े जमीन खरीदी बिक्री मामला में दोषियों पर कार्यवाही, वहीं दूसरे बलात्कार के फरार आरोपी एसआई किशोर तिवारी की गिरफ्तारी। बस्तर व सरगुजा से 29 विधायक आदिवासी समाज ने देकर सरकार बनाई है। शासन स्तर से बारमबार पत्राचार करने के बाद भी समाज के साथ प्रताड़ना, अत्याचार, शोषण नहीं रुक रहा है। अनुसूचित क्षेत्रों की संवैधानिक प्रावधानों की लगातार अव्हेलना कर उल्लंघन किया जा रहा है। समाज की ज्वलन्त समस्याओं का निराकरण तत्काल किया जाए तब तक चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।


समाज के द्वारा दिये गए ज्ञापन में जिला सुकमा के ग्राम सिलगेर में शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे निर्दोष ग्रामीणों के ऊपर अंधाधुंध गोलीबारी करने वालों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कर परिवार को न्याय प्रदाय किया जाए। बस्तर संभाग की नक्सल समस्या पर स्थायी समाधान हेतु सभी पक्षों से समन्वय स्थापित कर स्थाई समाधान की ओर राज्य सरकार द्वारा शीघ्र पहल करें। पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में जब तक माननीय उच्च न्यायालय के स्थगन समाप्त नहीं हो जाता तब तक किसी भी हालत में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पदोन्नत रिक्त पदों को नहीं भरे जाने , उसे सुरक्षित रखे जाने और जितने सामान्य वर्ग के अधिकारी / कर्मचारी अनुसूचित जाति / अनुसूचचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पदों पर नियम विरूद्ध पदोन्नत हुए उसे तत्काल पदावनत किया जाकर पदोन्नति नियम 2003 एवं आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 06 नियम 1998 एवं समय - सयम पर जारी निर्देशों को उल्लंघन कर नियम विरूद्ध पदोन्नति देने वाल अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं धारा आरक्षण अधिनियम 1994 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही करने बाबत् । शासकीय नौकरी में बैकलॉग एवं नई भर्तियों पर आरक्षण रोस्टर लागू किया जावे । पंचवी अनुसूची क्षेत्र में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती में मूलनिवासियों की शत - प्रतिशत आरक्षण लागू किया जावे । संभाग एवं जिलास्तर पर भर्ती कराया जाए । प्रदेश में खनिज उत्खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की जगह लीज में लेकर जमीन मालिक को शेयर होल्डर बनाए जाए । गांव की सामुदायिक गौण खनिज का उल्खन्न एवं निकासी का पूरा अधिकार ग्राम सभा को दिया जावे । ग्राम सभा के द्वारा स्थानीय आदिवासी समिति के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को खनि पट्टा दिया जाए । फर्जी जाति प्रकरण पर दोषियों पर शीघ्र कार्यवाही हो । छत्तीसगढ़ राज्य के 18 जनजातियों की मात्रात्मक त्रुटि में सुधार किया जाकर उन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए । अनुसूची में उल्लेखित जनजातियों का जाति प्रमाण - पत्र जारी नहीं करने वाले संबंधित अधिकारी पर दण्डात्मक कार्यवाही किया जाए । छात्रवृत्ति योजना में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए आय की 2.50 लाख की पात्रता सीमा समाप्त किया जावे । आदिवासी समाज की लड़कियों से अन्य गैर आदिवासी व्यक्ति से शादी होने पर उक्त महिला को जनजाति समुदाय के नाम से जारी जाति प्रमार पत्र आधार पर जनप्रतिधिनित्य , शासकीय सेवा तथा जनजाति समुदाय की जमीन खरीदी पर रोक लगाने के लिए संबंधित अधिनियमों में आवश्यक संशोधन किया जाए । आदिवासियों पर उत्पीड़न जैसे - जमीन का हस्तातरण , महिला एवं बच्चों पर अत्याचार , हत्या , जातिगत अपमान पर अनुसूचित जाति , जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पीड़ित की प्राथमिकी दर्ज नहीं किया जा रहा है । वन अधिकार कानून 2006 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करवाया जाए । पेसा कानून की क्रियान्वयन नियम तत्काल बनाकर अनुपालन सुनिश्चित करवाया जाए ।


अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को नियम विरूद्ध नगर पंचायत बनाया गया है, इन नगर पंचायतों को विखण्डित कर पुनः ग्राम पंचायत में परिवर्तित किया जाए । ग्राम पंचायत चौगेल की जमीन जो बिना ग्राम सभा प्रस्ताव लिए बिना नगर पंचायत में स्थानांतरित किया गया उसे जल्द वापस लाया जाय । श्री गैंदसिंह दुग्गा पिता स्व . श्री गणेश राम दुग्गा निवासी ग्राम नारायणपुर ( कोकरीपारा ) के जमीन ख.न. 170 रकबा 5.386 हे , को बिना परिवार के सहमति के बगैर नगर पंचायत द्वारा गौठान बनाया जा रहा है, उसे तत्काल वापस किया जाए ।

गदिया पहाड़ आदिवासियों का यह मूल निवासियों का आराध्य देवी देवताओं से छेड़छाड़ बंद करें। आदि मांगे प्रमुख रूप से रखी गयीं है जिनमे कुछ प्रदेश स्तर के ब कुछ स्तानीय स्तर के मुद्दे हैं जिनपर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की गई है। इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी,एवं सामान्य जन उपस्थित रहे।