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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-घटती संवेदना बढ़ता वहशीपन

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-घटती संवेदना बढ़ता वहशीपन

 
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है इसलिए वह समाज में अपनी मानवीय संवेदना और सामाजिक समरसता के साथ जीना जानता है। यह मनुष्यता का पाठ उसने सदियों की सभ्यता के सफर से हासिल किया है। समाज जीवन में रहने और जीने के कुछ नियम कानून मर्यादाएं हैं जिसका उसे पालन करना होता है। समाज और संविधान द्वारा बनाये गये नियम कायदा, मर्यादा और आचरण को पालन कराने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर है, उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे मर्यादित आचरण करते हुए दूसरे की मदद करेंगे। हाल की कुछ घटनाएं बताती है कि समाज का ऐसा तबका जो एक नियम प्रक्रिया, सिविल सेवा आचरण अधिनियम या कहे बहुत से व्यवहारिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है, उनके द्वारा ही अमर्यादित, वहशी आचरण किया जा रहा है। एक सिपाही द्वारा एक मासूम बच्ची को पापा नहीं कहने पर सिगरेट से जगह दागने की बात हो या अस्पताल के वेंटिलटर पर मौत के मुंह से जूझ रही जवान लड़की से बलात्कार की बात हो। चुनाव प्रचार के लिए बुलाई गई महिला अभिनेत्री के भीतर बलात्कार की आशंका का भय हो या फिर एक एडिशनल कलेक्टर स्तर के अधिकारी द्वारा पत्नी बच्चों को कमरे में बंद करके प्रताडि़त करने की बात हो या एक वरिष्ठ आई.पी.एस अधिकारी द्वारा अपनी पत्नी की बेरहमी से पिटाई का मामला हो। घरेलू हिंसा और सामाजिक जीवन में जहां महिलाओं के साथ आये दिन होने वाली छेड़छाड़, बलात्कार, बदतमीजी की घटनाओं के साथ-साथ अब तो सोशल मीडिया पर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है।

ब्रिटेन के मानवीय संगठन योजना इंटरनेशलन की स्टेट ऑफ द वल्डर्स रिपोर्ट के मुताबिक, 58 प्रतिशत लड़कियों ने माना है कि वे सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक, इंस्ट्राग्राम, ट्विटर, व्हाट्सअप पर अपशब्द और उत्पीडऩ का शिकार होती हैं। 47 प्रतिशत लड़कियों को आनलाइन उत्पीडऩ के साथ-साथ शारीरिक और यौन हिंसा की धमकी मिली है वहीं 59 प्रतिशत लड़कियों को सोशल मीडिया पर अपशब्द और अपमानजनक भाषा का सामना करना पड़ता है। यदि हम ऐसी सारी बातों का एनालिसिस करें तो यह बात साफ होती है कि लड़कियों के साथ बदतमीजी, बदसलूकी और छेड़छाड़ करने वालों में पढ़े-लिखे जागरूक और जिम्मेदार समाज के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हंै। बाजार महिला को किसी माल किसी प्रोडेक्ट की तरह प्रस्तुत करता है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशाखा गाईड लाईन आने के बाद से सभी शासकीय और प्राइवेट संस्थाओं में जहां महिला कर्मचारी कार्यरत हंै, वहां कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीडऩ रोकने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश के साथ महिलाओं की समिति बनाकर उसकी नियमित बैठक होनी चाहिए। अधिकांश सरकारी संस्थानों में यह समिति केवल कागजों तक सीमित है। जब तक कोई बड़ी घटना नहीं हो जाए लोगों को महिलाओं की सुध नहीं आती है। हमारे देश में महिला उत्पीडऩ रोकने के लिए हर एक बड़ी घटना के बाद कड़े कानून बनते हैं। निर्भया कांड के बाद हाथरस कांड की पूरी श्रंृखला में कड़े कानूनों के बावजूद महिलाओं पर उत्पीडऩ की घटनाएं कम नहीं हो रही है। सबसे अफसोस और खतरनाक बात यह है कि जिस तंत्र पर महिलाओं के विकास की, सुरक्षा की, कानूनी अधिकार दिलाने की जवाबदारी है, उसी तंत्र में शामिल बहुत से लोग खुलेआम महिलाओं का उत्पीडऩ कर छाती चौड़ी करके घुमते हैं। दरअसल, महिलाओं के प्रति समाज की सोच और रवैया को बदले बिना ये हालात बदलेंगे यह सोचना हास्यास्पद है। सरकारी तंत्र को सतत प्रशिक्षणों के माध्यम से संवेदनशील और जवाबदेह बनाने की जरूरत है। पुलिस जनता के बीच मित्र बनने की कितनी ही कोशिश करें, बालोद जैसी घटनाएं पुलिस का खौफ बनकर सामने आती है। हमारे यहां अभी भी बच्चों को पुलिस के नाम से डराया जाता है जबकि अमेरिका जैसे देश में बच्चों को हर मुसीबत में पुलिस की मदद की सीख दी जाती है।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम सिवनी में घटित घटना के फोटोग्राफ देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का विचलित होना लाजिमी है। बालोद के रक्षित केंद्र में पदस्थ कांस्टेबल अविनाश राय ग्राम सिवनी में लक्ष्मी नांनदर के घर नशे में धुत होकर पहुंचा गुरुवार रात करीब 8.30 बजे लक्ष्मी डेढ़ साल का अविनाश पहुंचा और बच्ची से खुद को पापा कहने के लिए बोलने लगा। बच्ची ने इस पर मना किया तो अविनाश ने गाली देना शुरू कर दिया। इसके बाद बच्ची को बुरी तरह से पीटा और सिगरेट से उसके का चेहरा, पेट, पीठ और हाथ जला दिए। महिला बीच-बचाव के लिए पहुंची तो उसे भी बुरी तरह से पीटा। छत्तीसगढ़ के डीजीपी डीएम अवस्थी के निर्देश पर इस कांस्टेबल को गिरफ्तर कर बर्खास्त कर दिया गया है।
बच्चों के विरूद्घ बढ़ते अपराध के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि  नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की ओर से 2016 में जारी की गई अपराध पर आधारित आखिरी रिपोर्ट पर नजर डालें तो देशभर में बच्चों पर आपराधिक गतिविधियों में इजाफा हुआ है। 2014 में बच्चों के साथ अपराध की 89,423 घटनाएं दर्ज हुई। इसके बाद 2015 में 94,172 और 2016 में 1,06958 घटनाएं दर्ज हुई। इन 3 सालों में बच्चों के साथ अपराध की दर 24 फीसदी तक पहुंच गई। 2014-15 में 5.3 फीसदी की तुलना में 2015-16 में 13.6 फीसदी अपराध हुआ।

2016 में बच्चों के साथ घटी 1,06,958 घटनाओं में 26,022 मामले पॉक्सो एक्ट, 2012 के तहत दर्ज किए गए। बाल यौन शोषण के मामले में 34.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। पॉक्सो एक्ट और आईपीसी के सेक्शन 376 के तहत बाल यौन शोषण ( चाइल्ड रेप) के मामले में भी जम्मू-कश्मीर सुरक्षित सबसे कम और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बच्चों के साथ रेप केस दर्ज हुए।

2016 में बच्चों की पोर्नोग्राफी से जुड़ी कहानियों से जुड़े 48 केस (सेक्शन 14 और 15) देशभर में दर्ज किए गए। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार (एनसीआरबी) की 2016 में जारी रिपोर्ट कहती है कि पॉक्सो एक्ट के तहत 2015 में बाल यौन शोषण के 36, 022 मामले दर्ज किए गए। जबकि पिछले साल 12, 038 मामलों की जांच शुरु होनी थी। इस तरह से 48,060 मामले पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज है। 12, 226 मामले बच्चों के साथ यौन शोषण (पॉक्सो के सेक्शन 8 और 10/आईपीसी की धारा 354) के दर्ज हूुए जबकि रेप केस के 19, 765 मामले (पॉक्सो सेक्शन 4 और 6/आईपीसी की धारा 376 के तहत) सामने आए।
यू-ट्यूब की तर्ज पर ही एक समानांतर रेप-ट्यूब का अस्तित्व मेें होना भी देखा गया है जिस पर बलात्कार से संबंधित पोर्न वीडियोज डाले जाते हैं इसलिए बलात्कार के समय बलात्कारियों द्वारा घटना का वीडियो बनाना केवल ब्लैकमेल के उद्देश्य से नहीं होता होगा, बल्कि उसे ऐसी साइटों पर प्रदर्शित करने का उद्देश्य भी रहता होगा। कठुआ की आठ वर्षीय बच्ची असिफा के साथ हुआ जघन्य आमानवीय कृत्य भारत में पोर्न साइटों पर पहले स्थान पर ट्रेंड कर रहा था। साल 2006 में जापान में एक वीडियो गेम रिलीज किया गया जिसका नाम था रेपले इस गेम में दिखाया गया कि किस तरह एक युवक बारी-बारी से एक मां और उनकी दो बेटियों का पहले तो जगह-जगह पीछा करता है और फिर अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तरीकों से उनके साथ बलात्कार करता है। हमें यह जानकर आश्चर्य हो लेकिन इस गेम को साल 2009 तक अमेजन डॉट काम पर भी खरीदा जा सकता था।

महिलाओं के विरूद्घ बढ़ती हिंसा वैशियनापन की पराकाष्ठा के रूप में हरियाणा की घटना है। गुरुग्राम का फोर्टिस अस्पताल में भर्ती एक लड़की से तब रेप हुआ जब वो आईसीयू में वेंटिलेटर पर थी। लड़की का आरोप है कि जब वो वेटिंलेटर पर पूरी तरह होश में नहीं थी, तब इस वारदात को अंजाम दिया गया है।

अभी हमारे देश में देवी-देवताओं त्यौहारों और कथित रूप से महिलाओं को महिमा मंडित करने, पूजने का माहौल है। नवरात्रि बीते सप्ताह भी नहीं हुआ है और ये घटनाएं हो रही है। नवरात्रि में कन्या भोज कराने वाले भारतीय समाज में हमें जिस कन्या की पूजा कर रहे थे, उसे ही बेरहमी से एक पुलिसकर्मी ने सिगरेट से दागा। हमारे समाज में शिक्षित लोग या यूं कहें कि जिन पर आप अधिक भरोसा करते हैं वे ही वहशीपन करते हैं। सरकारी क्षेत्र में जो लोग हैं जिन्हें नियम कानून मानने चाहिए वे ही इस तरह की हरकत करने पर कैसे उतारू हो जाते हैं? फरीदाबाद में एक सौतेले पिता ने पांच साल के मासूम पर जुल्म करने में मानवता की हदें पार कर दी। आरोपी ने उसके गुप्तांग को बीड़ी से जलाने का प्रयास किया व दांत काटकर घायल कर दिया।

दहेज के लालच में बहुओं को जलाने वाले, आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले, मासूम बच्चियों के साथ रेप करने वाले, सेक्स के नाम पर महिलाओं को तरह-तरह की प्रताडऩा देने वाले बहुत से वहशी दरिंदों की कहानी अक्सर सुनने को मिलती है। प्रताडऩा की घटनाएं इससे कहीं अधिक होती है। अक्सर बच्चे और महिलाएं घरेलू हिंसा की कहीं रिपोर्ट नहीं करते। शराब के नशे में औरतों, बच्चों के साथ मारपीट हमारे समाज में पुरुषों के अधिकार क्षेत्र में आता है। पुलिस के जवान द्वारा एक मासूम बच्ची को सिगरेट से दागना उसी मानसिकता का परिचायक है, जो हमें पितृसतात्मक समाज से मिलती है। यहां पावर और पद का दुरुपयोग और प्रदर्शन किस तरह होता है, यह बात भी साफ दिखाई देती है। धार्मिक बाबाओं और समाज के बहुत से प्रभावी और रसूखदार लोगों द्वारा अपने प्रभाव का उपयोग करके भी महिलाओं का शोषण किया जाता है।
धर्म की आड़ लेकर महिलाओं के शोषण की बहुत सी कथाएं, किस्से है अभी हाल में एम एक्त ओरिजनल आश्रय सीरिज के पार्ट वन बाबाओं के आश्रम के कच्चे चिट्ठे का वृतांत दिखाया गया। अब पार्ट टू भी आने वाला है जिसमें बाबी देओल ने ऐसे बाबाओं की भूमिका बखूबी निभाई है। ढोंगी बाबाओं का महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और रेप करने की खबरें लगातार आती रही है।

बिहार के विधानसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए पहुंची अभिनेत्री अमीषा पटेल के एक कथित ऑडियो ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी मचा दी है। बिहार के विधानसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए पहुंची अभिनेत्री अमीषा पटेल ने लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार डॉ. चंद्रप्रकाश पर आरोप लगा रही हैं कि उसने उन्हें ब्लैकमेल किया और अभद्र व्यवहार करने की कोशिश की। अमीषा ने कहा, वहां पर मेरा रेप-मर्डर हो सकता था। उसने मुझे कोई सुरक्षा उपलब्ध नहीं करवाई, वहां चारों ओर पागलपन दिखाई दे रहा था।  समाज के अलग-अलग तबके में बढ़ती संवेदनहीनता और वहिशानापन के कारण बाल अपराध और स्त्रियों के प्रति अपराध में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है और इसमें वे लोग भी शमिल हैं जिन पर इनकी सुरक्षा की जवाबदारी है।