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छत्तीसगढ़ के गौरव गाथा ऐतिहासिक पहचान को मिटाने का प्रयास

छत्तीसगढ़ के गौरव गाथा ऐतिहासिक पहचान को मिटाने का प्रयास

बेमेतरा। रामायण कालीन शिवरीनारायण समीपस्थ ग्राम कोसला भगवान राम की मां कौशल्या की जन्मभूमि है इतिहास के अतिथि प्राध्यापक विद्वान चंद्रशेखर तिवारी  ने बताया उन्हें महाविद्यालय में 22 वर्षों का अध्यापन कार्य  का अनुभव है  साक्ष्य पुरातत्वविद  और इतिहासकार  यह मानते हैं कि कोसला ही कौशल राज्य है    वैदिक संस्कृति से ओतप्रोत छत्तीसगढ़ प्राचीन काल में दक्षिण कोशल कहलाता था और यहां की बोली भाषा को  कोसली कहते थे जो दक्षिण कौशल की राजधानी कुश स्थली से विकसित हुई थी कालिदास के रघुवंश काव्य में राम के पुत्र कुश दक्षिण कौशल के ग्राम केसला, कौशल के शासक बने थे। 

 राजा भानु दक्षिण कौशल के राजा थे और जिन की पुत्री कौशल्या का विवाह उत्तर कौशल के राजा दशरथ से हुआ था यह सर्वविदित तथ्य है किंतु भानु  के पुत्र नहीं होने के कारण  यह राज्य राजा दशरथ को मिल गया था इस तरह या तथ्य है कि कोसला वर्तमान कोसला श्री राम का ननिहाल है यह भी सर्वविदित तथ्य है कि राम के वनवास का अधिकांश समय इस क्षेत्र में व्यतीत हुआ यहां के अभयारण्य एवं प्रांत ऋषि मुनियों के तपस्थली थे जहां तक कौशल क्षेत्र या प्रदेश के नामकरण का प्रश्न है तो इतिहासकारों ने बताया है कि राजा  भानुमत के पिता महाकौशल के नाम पर क्षेत्र का नामकरण कौशल प्रदेश हुआ था राम के वंश  इक्ष्वाकु का साम्राज्य रामायण में दंडकारण्य के नाम से सर्वाधिक वर्णन है जो कि समीपस्थ भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है इस तरह अयोध्या के राजा दशरथ का वर्तमान छत्तीसगढ़ शिवरीनारायण क्षेत्र से पारिवारिक राजनीतिक संबंध स्पष्ट होता है भगवान राम का वन गमन समय महानदी क्षेत्रों पर व्यतीत हुआ उस समय समाज  अहिंसक और हिंसक समाज में बटा हुआ था वनवासी क्षेत्रों में निवासरत लोगों  के बीच भगवान राम नदी तटों के आसपास से अपनी तपस्या की साधना करते हुए आगे बढ़े हिंसक समाज अथवा हिंसक प्रवृत्ति वाले बस्तियों से बचते हुए आगे बढ़ते गए भगवान राम जहां गए गोपालक समाज गौराहा लोगों की उपस्थिति थी।   

 इस लेख का उद्देश्य भगवान राम की मां कौशल्या की जन्मभूमि को इंगित करना है प्राचीन मान्यता प्रचलित कथाओं यहां के नृत्य गीतों में  किंवदंतियों में एवं पुरातत्व पुरातात्विक साक्ष्यों से ज्ञात होता है कि केसला वर्तमान स्थिति पामगढ़ के पास महानदी के आसपास शिवरीनारायण क्षेत्र है इसका वर्णन प्यारेलाल गुप्त ने अपनी पुस्तक में  किया है एक और पुस्तक की edam मम में ग्राम केसला को ही कोसला माता कौशल्या की जन्मभूमि बताया है यहां वैदिक कालीन नदी चित्र पल्ला महानंदा नीलोत्पल  भगवान राम का स्पर्श पाकर गंगा नदी के समान पवित्र हो गई है इस नदी को गंगा की तरह पवित्र  माना गया है है भगवान राम के स्थान एवं दैनिक दिनचर्या का गवाह है  महानंदा नदी प्राचीन जनजीवन नदी घाटियों में विकसित होता था अतः ग्राम केसला राज्य क्षेत्र में विकसित हुआ इस काल में अन्य किसी प्रभावशाली राजाओं के नाम  उस समय में ज्ञात नहीं होते हैं ईशान कोण में नदी संगम का महत्व पुराणों में विदित है इसलिए क्षेत्र का महत्व और बढ़ जाता है वर्तमान केसला जिसका वर्णन कर रहा हूं चारों तरफ   खाई बनी हुई है  यहां की पवित्रता का आभास यहां के लोगों को हुआ तब वहां के लोगों ने यहां की मिट्टियों को अपने खेत खेत में बिखेर दिया है मान्यता है कि इस पवित्र मिट्टी के प्रभाव से ऊपर अच्छे होते हैं यहां के लोगों ने कुछ सिक्के हरिहर सिंह गौर सागर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बाजपेई को दिया  है जिसमें राज्य कोसला अंकित है लोगों ने बताया कि मां कौशल्या का बाल्यकाल क्षेत्र के तीन ग्रामों में व्यतीत हुआ केसला जन्मस्थली और बोरसी कोसीर छत्तीसगढ़ राज्य सरकार वर्तमान में इतिहासिक तथ्यों की अवहेलना कर कौशल्या का जन्म स्थल चंदखुरी रायपुर में पर्यटन स्थल विकसित कर रही है जो कि ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ है और छत्तीसगढ़ के गौरव गाथा ऐतिहासिक पहचान को मिटाने का प्रयास है।