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छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मामला संसद मे उठाने पर साहित्यकार अनंत थवाईत ने सांसद अरुण साव का आभार जताया

छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मामला संसद मे उठाने पर साहित्यकार अनंत थवाईत ने सांसद अरुण साव का आभार जताया

चांपा, 11 फरवरी। बजट सत्र के दौरान बिलासपुर के सांसद अरुण साव ने छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है सांसद साव के इस मांग का स्वागत करते हुए नगर के साहित्यकार अनंत थवाईत ने सांसद अरुण साव का आभार जताया है ।

हिन्दी के साथ ही छत्तीसगढ़ी भाषा मे लेख और गीत लिखने वाले अनंत थवाईत ने कहा कि सांसद अरुण साव द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग करते हुए जो तथ्य संसद में प्रस्तुत किया उसके एक शब्द में सच्चाई है। देश के छब्बीसवें राज्य के रुप छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई । छत्तीसगढ़ की अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत है और छत्तीसगढ़ी भाषा का भी समृद्धशाली इतिहास है। यहां का अपना राजकीय गीत भी घोषित हो गया है इसके बावजूद भी छत्तीसगढ़ी भाषा को पूर्ण से भाषा का दर्जा न मिलना नियमानुसार 377  के तहत संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल न करना छत्तीसगढ़ के साथ अन्याय है।