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जानें एम्स के डायरेक्टर का जवाब ... क्या ऑक्सीजन के जरिए भी फैलता है ब्लैक फंगस, कौन-कौन से हैं लक्षण?

जानें एम्स के डायरेक्टर का जवाब ... क्या ऑक्सीजन के जरिए भी फैलता है ब्लैक फंगस, कौन-कौन से हैं लक्षण?

Desk: कोरोना महामारी के मोर्चे पर संघर्ष कर रहे केन्द्र और राज्य की सरकारों को ब्लैक फंगस ने चिंताएं बढ़ाकर रख दी है. ब्लैक फंगस कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो पहली बार देखने को मिल रही हो, इसके केस पहले भी आते रहे हैं. लेकिन, इस बार जितनी बड़ी तादाद में ब्लैक फंगस के नए मरीज सामने आ रहे हैं, वह हैरान करने वाला है. ऐसे में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच फंगल इन्फैक्शन के इतने केस पाए जाने के बाद लोगों के जेहन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने सोमवार को साफ किया है कि ब्लैक फंगस एक से दूसरे में नहीं फैलता है.


ऑक्सीजन के जरिए नहीं फैलता ब्लैक फंगस

डॉक्टर गुलेरिया ने बताया कि ऑक्सीजन के जरिए ब्लैक फंगस नहीं फैलता है. उन्होंने बताया कि 92-95% जिनमें फंगस दिखा, उनको या तो डायबिटीज है या फिर स्टीरॉयड यूज किया गया है. उन्होंने कहा कि कई मरीज जो घर में रह रहा था और सुगर कंट्रोल नहीं था और उन्होंने स्ट्रोरॉयड लिए, उसमें भी ब्लैक फंगस देखा गया. ऑक्सीजन ही एक बड़ा फैक्टर नहीं है. साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी है. ऑक्सीजन इस्तेमाल कर रहे है तो उसके ट्यूब साफ हो.


ब्लैक फंगस के मरीज अस्पताल के लिए चुनौती?

डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने बताया कि ब्लैक फंगस ज्यादातर मरीजों को शुरुआती स्टेज में हो रहा है. उन्होंने बताया कि जिनको म्यूकरमायोसिस कोविड के वक्त होता है, ऐसे में अस्पताल के लिए चुनौती बढ़ जाती है. अस्पताल के लिए चुनौती बनी रहती है, क्योंकि उसका इलाज कई हफ्ते चलता है. कोविड पॉजिटिव में अग्रेसिव सर्जरी करने पर मौत की संभावना रहती है. उन्होंने कहा कि कई बार कोरोना मरीज जिनमें ब्लैक फंगस रहता है, वो अगर निगेटिव पाए जाते हैं तो दूसरे वॉर्ड में शिफ्ट करना पड़ता है. ऐसे में ब्लैक फंगस मरीजों के लिए दो वॉर्ड बनाए गए हैं, एक जहां पर ब्लैक फंगस के पॉजिटिव कोविड मरीज हैं जबकि दूसरा जहां पर ब्लैक फंगस के निगेटिव मरीज है. 


क्या है ब्लैक फंगस के लक्षण?

एम्स के डायरेक्टर ने बताया कि सिरदर्द, नाक बंद हो जाना, नाक से खून आना, चेहरे के एक साइड पर फूल जाना ये सभी ब्लैक फंगस के लक्षण हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि किसी को ऐसे लक्षण है और जो हाई रिस्क यानी डायबिटीज और सुगर वाले मरीजों को हुआ तो फौरन डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 1 महीने में डेथ को एम्स में एनालाइज किया है. पिछले wave से दूसरे wave में डेथ वैसा ही है. डेथ में फर्स्ट वेव और सेकंड वेव में फर्क नहीं.