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टी वी चैनलों के माध्यम से वैकल्पिक पढाई की व्यवस्था करे सरकार

टी वी चैनलों के माध्यम से वैकल्पिक पढाई की व्यवस्था करे सरकार

बलौदाबाजार।  वैश्विक महामारी कोरोना आपदा के चलते प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थाएं पिछले डेढ़ साल से बंद हैं ।कोरोना के दूसरे लहर का कहर पूरी दुनिया देख चुकी है और तीसरे लहर की आशंकाओं से भयान्वित भी  हैं ।इस विकट स्थिति को देखते हुए स्कूल खोलने का सवाल ही नहीं उठता हालांकि निजी स्कूल संचालकों की ओर से सरकार के समक्ष मांग की गई है । बच्चों की पढ़ाई को लेकर पालकों सहित समुदाय व सरकार में बैठे सभी लोग स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं. निजी शालाओं में पढ़ने वाले अपेक्षाकृत संपन्न पालकों के पाल्य  ' आनलाइन क्लासेज ' के माध्यम से पढाई कर रहे हैं . सरकार की ओर से भी पारंपरिक कक्षाओं के विकल्प में नवाचार अपनाते हुए ' पढाई तुंहर दुआर ' योजना का जोर -शोर से प्रचार करते हुए ' आन-लाइन क्लासेज ' शुरुआत की गई .यह योजना एंड्रॉयड स्मार्टफोन की अनुपलब्धता .नेट कनेक्टिविटी की कमी व पालकों की गरीबी के कारण 'नेट -चार्ज ' वहन नहीं कर सकने जैसी समस्याओं के  कारण अधिकतम दस प्रतिशत विद्यार्थियों तक ही पहुंच बना पाई । अपेक्षित सफलता न मिलते देख इसे जारी रखते हुए ' पढ़ई तुंहर पारा ' योजना लांच की गई .इस योजना में स्कूल से परे समुदाय के द्वारा उपलब्ध कराए गए भवन या चौंक- चौराहों में जाकर शिक्षक कोविड  नियमों का पालन करते हुए मोहल्ला क्लास लाउडस्पीकर क्लास व अन्यान्य ' नामधारी ' कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं ।कोरोना संक्रमण को देखते हुए गली -मोहल्लों में जाकर महामारी की दृष्टि से असुरक्षित स्थानों में तुलनात्मक रूप से ' सुविधायुक्त स्कूलों ' को छोड़कर भिन्न -भिन्न विषयों को अलग-अलग विषयों के शिक्षक कैसे स्तरीय अध्यापन  कराते हुए निर्धारित कोर्स पूरा करा पाएंगे इस यक्ष प्रश्न का उत्तर तो शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के पास भी नहीं है । इस प्रकार आनलाइन क्लासेज  रस्म अदायगी  और आफलाइन मोहल्ला क्लासेज  हो-हल्ला क्लासेज   बनकर रह गई है। धमतरी व कुछ अन्य जगहों से मोहल्ला क्लासेज के माध्यम से  बच्चों के संक्रमित होने की खबरें भी आ रही हैं । उक्त दोनों विधियों से पाठ्यक्रम की पूर्णता ही  कल्पनातीत है । जब तक पाठ्यक्रम के अनुकूल गुणवत्ता युक्त शिक्षा नहीं मिल पाएगी तब तक बच्चों के कक्षानुरूप ज्ञान की उपलब्धियों का स्तर प्रभावित होना निश्चित है. सत्र 2020-21 में जैसे-तैसे पढ़ाई कराकर बच्चों को कक्षोन्नति दे दी गई मगर भविष्य में भी यदि यही नीति अपनाई जाती है तो विद्यार्थियों को भारी बौद्धिक रिक्तता का सामना करना पड़ सकता है ऐसे ही अनेक अनुत्तरित प्रश्न पालकों सहित बुद्धिजीवियों के मनोमस्तिष्क में गूंज रहा है। सरकार आनलाइन क्लासेज व आफलाइन मोहल्ला क्लासेज की कमियों को पूरा करने ' दूरदर्शन ' व अन्य निजी टीवी चैनलों से अनुबंध कर समस्या का समाधान ढूंढ़ सकती है । आजकल किसी का घर टीवी से अछूता नहीं है  . अगर इस लोकप्रिय माध्यम को शिक्षा के लिए अपनाया जाए तो वर्तमान संदर्भ में कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन किए बिना ही घर बैठे विद्यार्थी महामारी से भयमुक्त होकर शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे.  इसके लिए अलग-अलग कक्षाओं व विषयों को निर्धारित करते हुए  प्रसारण की व्यवस्था व रिकार्डिंग कर यू-ट्यूब आदि में पुनः देखने समझने की व्यवस्था की जा सकती है . कोरोना महामारी के फैलाव को देखते हुए सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए यही अपेक्षा है ।