कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः तुलसीदास से प्रार्थना

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः तुलसीदास से प्रार्थना

 

ओ रामबोला महाकवि

कैसे दुहूँ 

अपनी श्रद्धा-धेनु

कैसे करूँ 

अपने आप पर विश्वास


देह-रथ बिखर रहा

कहाँ से लाऊँ 

शौर्य-धैर्य के पहिए

कैसे बांधूँ

बल-विवेक-संयम के घोड़े

कैसे खीचूँ

क्षमा-दया-समता की लगाम

कैसे बना पाऊँ

अपनी प्रार्थना को सारथी

निर्मल मन ही नहीं रहा


देह-वृक्ष पर बैठे

मेरे संशय के पक्षी

नहीं उड़ा पाती मेरी करताल


मानस की गहराई का

जल सूख रहा

धीरज का तट टूट रहा

खोती जा रही

मेरी भाषा की सुगंध

दूर जा रहे मुझसे

शब्द-अर्थ और भाव

डूब रही पथरायी-सी

मेरे तन की नाव


कठिन जगत-हठ-धार

कोउ सुने न मोर पुकार