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होलिका दहन स्थलों में छाई वीरानी, जमीन पर आया रंग-गुलाल का बाजार

होलिका दहन स्थलों में छाई वीरानी, जमीन पर आया रंग-गुलाल का बाजार

होलिका दहन में केवल 5 लोग ही शामिल हो सकेंगे। इस एक लाइन ने, उस स्थल की रौनक छीन ली, जहां होलिका दहन होता है। नगाड़े नहीं बजाए जा सकेंगे, जैसे आदेश ने होली के बढ़ते कदमों पर ब्रेक लगा दिया है तो धारा 144 ने रंग-गुलाल की रंगत फीकी कर दी है। अब बचे मंदिर और देवालय, तो यहां भी सन्नाटा तेजी से फैलता नजर आ रहा है।

बीते बरस जैसे-तैसे करके कोरोना ने होली मनाने दिया लेकिन इस बार का यह पर्व मनाने का मौका उसने छीन लिया है। एक बार फिर से संक्रमण का बढ़ता सैलाब, कड़ाई के लिए मजबूर कर चुका है। मजबूरी, त्योहार, पर्व और शादी की धूम, पूरी तरह से गायब होने के रूप में दिखाई देने लगी है। शोक के पल भी, गिने-चुने लोगों के बीच बिताए जा सकेंगे। रही बात बाजार की तो, संभलने की तैयारी में जुटा यह क्षेत्र फिर से जमीन पर आ चुका है।


रौनक हुई गायब

होली के 1 सप्ताह पूर्व होलिका दहन स्थल पर पहली लकड़ी गड़ा कर, पर्व की शुरुआत पर इस बार पूरी तरह रोक लग चुकी है। शहर के बीच पुराना गंज मैदान, मारवाड़ी कुंआं के मैदान में सन्नाटा फैल चुका है तो, दूर रावणभाठा मैदान में तैयारी, हलचल से दूर हो चुकी है। कमोबेश ऐसी स्थिति हर उस स्थल की है, जहां होलिका दहन होता था।

उम्मीद पर कोरोना का कहर

ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर बंदिश ने लाउडस्पीकर और डीजे कारोबार को तगड़ा झटका दे दिया है सख़्ती ने। अच्छे कारोबार की तैयारी, नगाड़ा बेचने वालों को भी, वापस लेनी पड़ रही है, जो साल में केवल एक बार इसकी खरीदी से मिलने वाली रकम के सहारे परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सख्ती के बाद अब ऐसे लोग बाजार से लौटते दिखाई देने लगे हैं।


यहां सिर्फ इंतजार

शहर के रंग-गुलाल और पिचकारी कारोबार को चिंता सता रही है कि लागत कैसे निकाली जा सकेगी? आदेश में रंग-गुलाल खेलने से मनाही तो नहीं की गई है लेकिन धारा 144 ने इस बाजार की भी रौनक छीन ली है। खरीददार आ तो रहे हैं लेकिन खरीदी की मात्रा बाजार को हताश ही कर रही हैं।

होलिका दहन पूजा और शुभ मुहूर्त

रंगों का त्योहार होली इस वर्ष 29 मार्च को मनाया जाएगा, इससे पहले 28 मार्च को होलाष्टक समाप्ति के साथ होलिका दहन होगा। फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 28 मार्च रविवार की रात होलिका दहन किया जाएगा। भद्रा दिन 1 बजकर 33 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। साथ ही की पूर्णिमा तिथि रात 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के मुताबिक भद्रा रहित पूर्णिमा तिथि में होलिका दहन किया जाता है। इस कारण रात में 12 बज के 30 मिनट के पहले होलिका दहन हो जाना चाहिए क्योंकि इस समय के बाद प्रतिपदा तिथि लग जाएगी। होलिका दहन के दिन बन रहे यह शुभ मुहूर्त ऐसे होंगे। अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक होगा। अमृत काल- सुबह 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक होगा। ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 50 मिनट से सुबह 5 बजकर 38 मिनट तक होगा। सर्वार्थसिद्धि योग- सुबह 6 बजकर 26 मिनट से शाम 5 बजकर 36 मिनट तक होगा। इसके बाद शाम 5 बजकर 36 मिनट से 29 मार्च की सुबह 6 बजकर 25 मिनट तक होगा। अमृत सिद्धि योग- सुबह 5 बजकर 36 मिनट से 29 मार्च की सुबह 6 बजकर 25 मिनट तक होगा।