breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - प्रधानमंत्री का अमेरिका दौरा

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - प्रधानमंत्री का अमेरिका दौरा

-सुभाष मिश्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अमेरिका दौरे से लौट आये। हाऊडी मोदी के समय जिस तरह से डोनाल्ड ट्रम्प के समय मोदीजी का स्वागत सत्कार अमेरिका में हुआ था, वैसा इस बार नहीं हो पाया। कोरोना संक्रमण के चलते देश की बदनामी और यात्राओं पर रोक की वजह से इस बार वैसा नजारा नहीं था। अमेरिका में सत्कार की कमी को भाजपा ने दिल्ली आगमन पर पूरा किया। भारत लौटने पर विमानतल पर मोदीजी का बहुत ऐतिहासिक स्वागत करके उनकी यात्रा और उपलब्धि का महिमा मंडन किया गया। मोदी जी से व्यापारिक कंपनियों से बातचीत को उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। अमेरिका में राष्ट्रपति के चुनाव में जिस तरह से मोदीजी ने जाकर ट्रम्प के पक्ष में प्रचार किया उससे बाइडेन खुश तो नहीं होंगे। वैसे भी यह देश की डिप्लोमेसी के खिलाफ था, किन्तु मोदीजी जानते हैं कि अपना आभा मंडल कैसे बड़ा किया जाता है। कोरोना संक्रमण के दौरान हमारे देश में जो हालात पैदा हुए उससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख प्रभावित हुई। बहुत से देश अभी भी भारतीयों की आवाजाही को रोके हुए हंै। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को भारत का दुनिया में डंका बजाने वाली यात्रा करार देकर कह रहे हैं कि मोदी जी के नेतृत्व के कारण दुनिया भारत को नई दृष्टि से देख रही है। उनका कहना है कि मोदी जी ने वैश्विक समस्या का समाधान कैसे किया, यह भी बताया। दरअसल, भारत विश्व गुरु बनने की जिस राह पर चल पड़ा है, उसके चलते भाजपा का ऐसा कहना लाजिमी है।

अफगास्तिान से बीस साल बाद अपनी सेना की वापसी और तालिबानी लड़ाकों द्वारा वहां उत्पन्न हालात के कारण अमेरिका की बहुत किरकिरी हुई है। कोरोना वायरस के कारण उपजी वैश्विक बीमारी और उसके बाद उपजी स्थिति को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ा है। चीन के खिलाफ मोर्चे पर अमेरिका हमें अपने सहयोगी के रूप में देखता है। हमारी डिप्लोमेट स्नेहा दुबे द्वारा पाकिस्तान को दिये गये जवाब को गोदी मीडिया राष्ट्रवाद से जोड़ रहा है। मशहूर टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप जब इस मामले में बाईट लेने पहुंची तो उन्होंने मना कर दिया।

स्नेहा दुबे न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की 76वीं सालाना बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जब-जब कश्मीर राग अलापा और भारत की छबि को खराब करने की कोशिश की तब स्नेहा दुबे ने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तानी मंसूबों पर पानी फेर कर करारा जवाब देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लहाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश हंै और भारत के अभिन्न और अभिभाज्य अंग थे, हैं और रहेंगे। इसमें वे भी क्षेत्र शामिल हैं जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं। हम पाकिस्तान से उसके अवैध कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करने के लिए कहते हैं। राष्ट्रवाद से उनके बयान को जोडऩे वालों को मालूम होना चाहिए कि एक डिप्लोमेट वही कहता है जो उसके देश का पक्ष है। पश्चिमी मीडिया ने मोदी जी की अमेरिका यात्रा को लगभग ब्लेकआउट कर दिया, किन्तु हमारे देश के बहुत से मीडिया समूह ने उनकी यात्रा को ऐतिहासिक करार दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काट मारिसन और जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा के साथ मिलकर पहली बार व्यक्तिगत रूप से क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लिया। अमेरिका राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अमेरिका के समर्थन को दोहराया है। भारत ने क्वाड सम्मेलन में यह साफ कर दिया है कि वह मानवता के विकास के लिए और सुरक्षा में पूर्ण सहयोग देगा। इस तरह अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया ने भी सुरक्षा के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर कदम उठाने की बात कही है। अप्रत्यक्ष तौर पर यह साफ है कि चीन का नाम लिए बिना इस तरह सुरक्षा में सहयोग करने की बात हुई है।

क्वाड समूहों के देशों के शिखर सम्मेलन से पाकिस्तान पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है। भारत और अमेरिका ने कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित समूहों सहित सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेंगे। दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद की निंदा की और 26/11 के मुंबई हमलों के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने की भी बात कही है। इससे पहले मोदी जी ने 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र संबोधित किया था। भारत और अमेरिका ने तालिबान से मानवाधिकारों, महिलाओं के मुद्दों, अल्पसंख्यकों पर अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाने और अफगानिस्तान की धरती को आतंकवाद के लिए इस्तेमाल नहीं करने देने का आह्वान किया है। 1 मई से शुरू हुई अमेरिकी सेना की वापसी की पृष्ठभूमि में तालिबान ने पिछले महीने अफगानिस्तान में लगभग सभी प्रमुख शहरों और शहरों पर कब्जा कर लिया था। 15 अगस्त को राजधानी काबुल में विद्रोहियों का कब्जा हो गया था। इस समय में तालिबान में जो कुछ घटित हो रहा है वह मानवीयता के खिलाफ है। पूरी दुनिया की नजरें इस समय तालिबान पर है।

11 सितंबर, 2021 के आंतकवादी हमलों के हफ्तों बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने अफगानिस्तान पर युद्ध की घोषणा की, जिस पर तब तालिबान का शासन था। तत्कालिन तालिबान शासन ने ओसामा बिन लादेन सहित अल-कायदा नेताओं को सौंपने की उनकी मांग को ठुकरा दिया था, जिन्होंने हमलों की साजिश रची थी। पाकिस्तान उन तीन देशों में से एक था जिसने 1990 के दशक में तालिबान शासन को मान्यता दी थी। इस समय भी पाकिस्तान तालिबान के साथ खड़ा है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान में भारत के प्रभाव को रोकना चाहता है और तालिबान को काबुल में लाना चाहता है।

प्रधानमंत्री मोदी का नाम आए और विदेश यात्रा का जिक्र न हो, ऐसा होना थोड़ा मुश्किल है। मई 2014 में प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले पीएम मोदी तब से अब तक 104 देशों की यात्रा कर चुके हैं। अपने विदेश यात्राओं में प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे ज्यादा बार अमेरिका का दौरा किया है, वहीं दूसरे स्थान पर रूस है। उन्होंने अमेरिका की यात्रा छह बार, रूस की यात्रा पांच बार और जापान और चीन की यात्रा चार-चार बार की है। 2014 के बाद से अब तक प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2015 में सबसे ज्यादा विदेश यात्राएं कीं। अपनी विदेश यात्राओं के चलते अक्सर चर्चा में रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 10 महीनों से एक भी विदेशी दौरा नहीं किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछला विदेश दौरा ब्राजील का किया था, जहां वह नवंबर 2019 में गए थे। नरेंद्र मोदी श्रीलंका में बम धमाकों के बाद वहां जाने वाले पहले विदेशी नेता थे। लगभग छह महीने बाद उनकी अमेरिका यात्रा हुई। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी का अमेरिका का यह सातवां दौरा है। उनका पहला अमेरिकी दौरा सितंबर 2014 में हुआ था।

अपनी चार दिवसीय प्रवास के 65 घंटों में प्रधानमंत्री मोदी ने 20 बैठकें की जिनमें से 5 बैठकें अलग-अलग कंपनियों के सीईओ के साथ की। विमान और होटल में पांच बैठकें करके प्रधानमत्री ने अपनी यात्रा के समय का बेहतर उपयोग किया। इस दौरान उन्होंने जापान और आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री, अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का आने वाले समय में भारत के साथ अमेरिका के क्या संबंध रहते हंै, उस आधार पर आंकलन होगा। यह बात सही है कि पूरी दुनिया में भारत बहुत बड़ा बाजार है। दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियां यहां इन्वेस्ट करना चाहती हंै। हमारी आबादी हमारी ताकत भी है और हमारी परेशानी भी।