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वनों पर निर्भरता कम करने मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना एक अभिनव योजना: यू.डी मिंज

वनों पर निर्भरता कम करने मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना एक अभिनव योजना: यू.डी मिंज

वृक्षारोपण पर विधायक यू.डी. मिंज की सोंच पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुहर


सामाजिक वानिकी के इस स्वरूप से वृक्षारोपण करने पर पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा और बढ़ेगा जलस्तर 

जशपुरनगर - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रारंभ की मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के लिए संसदीय सचिव एवं विधायक कुनकुरी ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया है।

    

संसदीय सचिव एवं विधायक कुनकुरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने हेतु मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना प्रारंभ किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत निजी क्षेत्र, कृषकों, शासकीय विभागों एवं ग्राम पंचायतों की भूमि पर इमारती, गैर इमारती प्रजातियों के वाणिज्यिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण में सुधार लाकर जलवायु परिवर्तन के विपरीत प्रभावों को कम करना है। उन्होंने कहा कि यह योजना कृषकों की आय में वृक्षारोपण के माध्यम से वृद्धि करने एवं उनके आर्थिक सामाजिक स्थिति में सुधार लाने में महत्त्वपूर्ण होगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों एवं छोटे बड़े उद्योगों की लकड़ी की आवश्यकता की पूर्ति भी होगी। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा पर्यटन की संभावना बढेगी जिससे एवं जीडीपी में वृद्धि भी होगी है।


संसदीय सचिव यूडी मिंज ने कहा कि पिछले वर्ष कुनकुरी विधानसभा के साथ पूरे जिले में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को जिलेभर में जन सहभागिता से सामाजिक वानिकी के अंतर्गत वृक्षारोपण की शुरुआत की गई थी और यह वृक्षारोपण इस पर्यावरण दिवस पर दूसरे स्वरूप में होगा जिसमें हमारा प्रयास रहा की आम लोगों की जंगलों पर निर्भरता कम हो सामुदायिक रूप से वृक्षारोपण कर जंगलों को बचाने का एक सार्थक प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना ही सामाजिक वानिकी है जिसके तहत खरीफ वर्ष 2020-21 में धान की फसल लेने वाले किसान यदि इसके बदले अपने खेतों में मेडों में विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधे हैं जैसे ..सेंधवार ,फुटकल , बड़ ,पीपल ,बकाइन,गंभार,बेर,करंज , शीशम,जामुन,आम, अंजीर नासपाती पपीता, सेमल,कटहल अमरूद केला व अन्य )

वृक्षारोपण करेंगे तो उन्हें आगामी 3 वर्षों तक प्रतिवर्ष 10 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

इस योजना के तहत संयुक्त वन प्रबंधन समितियों द्वारा यदि राजस्व भूमि पर वृक्षारोपण किया जाता है, तो समिति को एक वर्ष बाद प्रति एकड़ के मान से 10 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वृक्षों को काटने और बेचने का अधिकार संबंधित समिति का होगा।  इस योजना हेतु छत्तीसगढ़ राज्य के सभी नागरिक, निजी भूमि की उपलब्धता अनुसार तथा सभी ग्राम पंचायतों एवं संयुक्त वन प्रबंधन समितिया योजना का लाभ लेने हेतु पात्र होंगे। प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के द्वारा कृषि उत्पादन आयुक्त की सहयोगिता से  किया जायेगा एवं जिले में इस योजना का क्रियान्वयन क्षेत्रीय वनमण्डलाधिकारी के द्वारा कलेक्टर की देख रेख में किया जाएगा।


संसदीय सचिव यूडी मिंज ने कहा कि यह सबसे सार्थक योजना साबित होगी जिसके माध्यम से किसान समृद्ध होंगे।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होगा की आम लोगों की जंगलों पर निर्भरता कम हो सामुदायिक रूप से वृक्षारोपण कर जंगलों को बचाने का एक सार्थक प्रयास करने की योजना की गई है।

विधायक यूडी मिंज ने बताया कि जिला प्रशासन के अधिकारियों कलेक्टर श्री महादेव कावरे, वनमंडलाधिकारी श्रीकृष्ण जाधव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री के. एस.मंडावी जी इस दिशा में रणनीति तैयार की जा रही है।उन्होंने ने बताया कि जशपुर जिले में सामाजिक वानिकी के आधार पर जंगलों से बाहर खाली जमीनों में वृक्षारोपण की तैयारी की जा रही है जिसमें वन विभाग ,पंचायत विभाग, आम नागरिक एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से वनों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जंगलों पर लोगों की निर्भरता कम करने का दिशा में कार्य किया जा रहा है। 

 

उन्होंने बताया कि हम सबके जीवन में सामाजिक वानिकी का बहुत ही ज्यादा महत्व है जशपुर जिला खूबसूरत जंगलों से आच्छादित है लेकिन लोग लगातार जंगल काटते जा रहे हैं जो भविष्य में हमारे पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदायक है वैसे तो हम दैनिक उपयोग के लिए जंगल से पूर्ति करते हैं पर इससे हम सबको काफी नुकसान होता है पर्यावरण को भी नुकसान होता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हम सबको अपने अपने स्तर पर वृक्षारोपण करना है जंगल बचाना है जल संरक्षण करना है सारे चीजें एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और हम सब को ही मिलकर इस दिशा में काम करना है ।


विधायक श्री यूडी मिंज ने कहा कि हमारी आवश्यकता जो जंगलों पर आधारित है यदि वह हमारे खेतों में मिल जाए तो जंगलों पर दबाव कम होगा इसके लिए सामाजिक वानिकी का महत्व बहुत ही अधिक है हम जंगलों से लकड़ियों की जो जरूरतें हैं वह अपने खेतों की मेड़ों में लगाकर पूरी कर सकते हैं विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधे हैं जैसे ..सेंधवार ,फुटकल , बड़ ,पीपल ,बकाइन,गंभार,बेर,करंज ,शीशम,जामुन,आम,सेमल,कटहल व अन्य ) इससे सभी किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगी। मवेशियों को खेतों में जाने से रोकने पर दलहन की खेती का रकबा बढ़ेगा । वहीं पेड़- पौधे से जलस्तर बढ़ेगा और हर बार गर्मी में पानी की कमी का रोना ख़त्म होगा ।मेरा मुख्य मकसद सामाजिक वानिकी को लोगों तक पहुंचाना है और इस एक मॉडल के रूप में स्थापित करना है ।हम अपने खूबसूरत जंगलों को कैसे बचाएं इसकी योजना सामाजिक वानिकी के रूप में पिछले साल किया गया था जिसे यशस्वी मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी ने योजना लागू करके हमें ऐसे कार्य करने की ऊर्जा प्रदान किया है कि हम सभी जलाऊ लकड़ी के तौर पर उपयोग कर अपनी पूर्ती कर सकते हैं उन्होंने कहा कि हम अगर सामाजिक वानिकी का उपयोग करते हैं तो हम सब के खेतों,कुंओ,तालाबों का जलस्तर बढ़ेगा और यह योजना कारगर होगी।