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चारामा शराब दुकान के आगे नतमस्तक हुई आबकारी विभाग

चारामा शराब दुकान के आगे नतमस्तक हुई आबकारी विभाग

नियम कायदों की धज्जियांउड़ाते,ग्राहकों को खुलेआम लूटा जा रहा

भानुप्रतापपुर, 22  अक्टूबर। चारामा अंग्रेजी एवं देशी शराब दुकान के मैनेजर व कर्मचारियों के दबंगाई को देखने से ऐसा लग रहा है मानो कि आबकारी विभाग को  शराब कर्मचारी चला रहे है। ग्राहकों को खुलेआम लुटा जा रहा है, शिकायत करने पर आबकारी अधिकारी न तो फोन उठाना उचित समझते है,ओर न ही शराब कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही   की जाती है। चारामा ब्लाक के अंग्रेजी एवं देशी शराब दुकान की बिक्री प्रतिदिन लाखो में होती है,अवैध कमाई भी लाख रुपए की है। शराब कर्मचारियों द्वारा प्रति बोतल शासन द्वारा निधार्रित मूल्य से 100 रुपए से अधिक राशि ग्राहकों को देखकर वसूले जाते है। नियमतः शराब के साथ ही ग्राहकों को बिल भी दिया जाना है ताकि सही मूल्य व क्वालिटी के शराब मिल सके लेकिन कर्मचारियों द्वारा किसी को भी बिल नहीं दिया जाता, यदि कोई जागरूक ग्राहक बिल की मांग करता है तो उसे डराते धमकाते हुए शराब न दिए जाने की बात कही जाती है।


  क्या कहते है लोग 

मन्दिरा प्रेमी सत्यम निषाद, राजा शर्मा, राज कुमार, संजय केवट,,गोपाल नेताम, राज उइके योगेश दर्रो,दिनेश ठाकुर सहित आदि ने बताया कि कांग्रेस सरकार से तो भाजपा सरकार अच्छी थी शराब के मूल्य कम होने के साथ ही अतिरिक्त राशि नहीं वसूली जाती थी, वही शिकायत होने पर शराब कर्मचारियों के खिलाफ आबकारी विभाग द्वारा तत्काल व सख्त कार्यवाही किया करते थे। लेकिन अब शराब दुकान कि स्थित बद से बत्तर व गुंडा राज हो गई है। अधिक राशि देने के बावजूद न तो सही शराब मिल पाती है और न ही शराब के क्वालिटी है। 

नगरवासियों का कहना है कि पहले शराब ठेकेदारी प्रथा ही ठीक थी क्योंकि शराब के मूल्य सस्ती एवं वेरायटी व क्वालिटी के शराब आसानी से मिल जाती थी लेकिन जब से शासन स्तर से शराब बेचा जा रहा है तब से केवल ग्राहकों को लूटने का काम किया जा रहा है। 

 आबकारी अधिकारी  के कार्य प्रणाली संदेहास्पद 

आबकारी विभाग के अधिकारियों के अधिकांश समय तक मोबाइल नम्बर बंद ही रहते है, यदि भूलवश चालू भी हो तो मोबाइल उठाना भी अधिकारी मुनासिब नहीं समझा जाता है। बुधवार को शाम चार बजे के आसपास शराब अधिक कीमत बिक्री किये जाने से ग्राहक व शराब कर्मचारियों के बीच विवाद हो रहा था,उसी दरम्यान जिला आबकारी अधिकारी को स्थिति से अवगत कराने फोन किया गया, लेकिन उनका मोबाइल बंद रहा, चारामा शराब दुकान के प्रभारी आबकारी अधिकारी को भी जानकारी दिए जाने फोन किया गया था लेकिन अधिकारी द्वारा फोन रिसीव करना मुनासिब समझा गया। स्थिति को देख कर आप स्वयं अंदाज लगा सकते है कि अधिकारी अपने कार्य के प्रति कितने गंभीर है।

 क्या कहता है मैनेजर 

शराब अधिक मूल्य पर बिक्री व ग्राहकों को शराब के साथ बिल नहीं दिया जा रहा था इस सम्बध में जब अंग्रेजी शराब दुकान चारामा के मैनेजर का कहना है कि जो ऊपर से निर्देश मिला है,शराब उसी दर पर बेची जा रही है,क्योंकि सभी को मैनेज करना पड़ता है।