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पढ़िए भागमती की करुणामय कहानी- शांति फाउंडेशन के सहयोग से मानसिक रोगी को भेजा गया हॉस्पिटल

पढ़िए भागमती की करुणामय कहानी- शांति फाउंडेशन के सहयोग से मानसिक रोगी को भेजा गया हॉस्पिटल


 भानुप्रतापपुर। नगर में कुछ दिनों से विचरण कर रही मानसिक रोगी को चोटग्रस्त हालत में 24 सितंबर के रात्रि 8 बजे शांति फाउंडेशन व कोठारी पेट्रोल पंप के कर्मचारियों द्वारा सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ रात्रि को ड्रिप लगे स्थिति में अस्पतल से कहीं भाग गई। तुषार ठाकुर व सहयोगियों के द्वारा 2 दिन तक उसकी तलाश की गई जो रविवार को मिली। इसकी जानकारी एसडीएम को दी गयी उनके निर्देश पर मानसिक रोगी को थाने लाया गया। सुबह उसे सखी सेंटर कांकेर ले जाया गया वहा से हायर उपचार के लिए मानसिक अस्पताल बिलासपुर भेजा जाएगा।

  दो वर्ष पूर्व ही भागमती कोरेटी मानसिक हालत ठीक नही होने के स्थिति के चलते नगर सहित आस-पास क्षेत्रों में घुम रही थी, जिसे भागमती के नाना के निवेदन व स्टाम्प पर लिखित आवेदन पर शांति फाउंडेशन के द्वारा प्रशासन के सहयोग से मानसिक अस्पताल बिलासपुर भेज गया था। उपचार के दौरान भागमती पहले से काफी बेहतर हो गई थी, पूर्णत स्वस्थ होने के लिए एक दो साल दवाई लेना अनिवार्य थी, लेकिन भागमती के घर मे ध्यान देने वाले कोई नही होने से उसे बिलासपुर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कराते हुए शान्ति फाउंडेशन के सदस्यों ने रायपुर के नारी निकेतन में भर्ती कर दिया गया। जहाँ उसके देखभाल सहित अगरबत्ती बनाने का काम भी सीख रही थी। 

 भागमती कोरेटी की कहानी 

भागमती के नाम भानुप्रतापपुर से लगा हुआ 3 एकड़ कीमती पैतृक

जमीन थी, लालच में आकर उसके नाना एवं सगे संबंधियों ने शांति फाउंडेशन के सदस्यों को आग्रह किया कि हम भागमती को घर लाकर उसका देख-भाल करेंगे एवं नियमित दवा खिलाएंगे। परिवार के कई बार निवेदन के बाद भी शान्ति फाउंडेशन के सदस्यों ने उनकी बात नही मानी क्योकि वे जानते थे कि भागमती से लगाव न होकर परिवार की नजर उनकी कीमती जमीन पर थी। नाना व उनके परिजन ने शान्ति फाउंडेशन के बिना जानकारी दिए ही रायपुर नारी निकेतन जाकर उसे वहां से ले आये। जानकारी लगते ही तुषार ठाकुर व सदस्यों  ने उनके घर जाकर भागमती से मुलाकात करते हुए परिवार वालो को फटकार भी लगाया। उस समय भागमती के हालत में बहुत सुधार हो गई थी, वे कहती थी मेरी शादी होने वाली है आप लोग जरूर आना कहती हुई मुस्कुराती रही। लेकिन उसके नाना एवं सगे संबंधियों ने भागमती को इसलिए लेकर आये की उसकी जमीन बेच सके और हुआ भी ऐसा ही जमीन बेचने के बाद उसे वैसा ही छोड़ दिया जैसे 2 साल पहले छोड़ा था। परिवार वाले की लापरवाही एवं समय पर दवाई नही लेने के कारण वह फिर मानसिक रोगी हो गई व सड़को में घूमने लगी। 

 जमीन बिक्री पर रोक के बावजूद बेच दिया गया 

भागमती के नाम से तीन एकड़ जमीन थी जो वर्तमान में करोड़ो की है। मानसिक स्थिति को देखते हुए शांति फाउंडेशन के सदस्यों ने तहसीलदार आनन्द राम नेताम से आग्रह एवं निवेदन किया था कि भागमती की स्थिति अच्छी नही है, उसका उपचार चल रहा है, वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाएगी तो जीविकोपार्जन के लिए वह जमीन उसकी काम आएगी। 

 भागमती के साथ हुआ अनाचार

मानसिक स्थिति ठीक न होने से भागमती दिन रात इधर-उधर भटकती रहती थी, जिसका असामाजिक तत्वों द्वारा फायदा उठा कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

 एसडीएम जितेंद्र यादव की सराहनीय पहल 

नवनियुक्त पदस्थ आईएएस जितेंद्र यादव का भानुप्रतापपुर आये कुछ दिन ही हुए है, वे प्रशासनिक कार्यो के साथ ही जनहित व मानव सेवा कार्यो में भी अपनी सहभागिता निभाते हुए सहयोग दे रहे है। भागमती की हालत को देखते हुए त्वरित उसके बेहतर उपचार के लिए यथासंभव मदद की जा रही है

इस संबंध मेंशांति फाउंडेशन के अध्यक्ष तुषार ठाकुर ने बातचीत में बताया कि आईएएस जितेंद्र यादव एसडीएम भानुप्रतापपुर ऐसे मामलों में बहुत ही गंभीर है और बहुत ही सहयोगी है जिनके सहयोग से हम भगवती कोरोटी को पुनः उच्च स्तरीय  इलाज के लिए भेज पाए। भागमती के मिलते ही जानकारी के तुरंत बाद एसडीएम और एसडीओपी प्रशांत पैकरा  दोनों ही मौके पर पहुंचे। प्रशासन का बहुत बड़ा अहम रोल रहा जिससे हम शांति फाउंडेशन के सदस्यों को प्रेरणा, हिम्मत मिलती है। ऐसे कार्यों को पूरा करने के लिए हम प्रशासन का बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं।