breaking news New

वैदिक वाङ्मय का सर्वोच्च ग्रंथ भागवत - पंडित महेश शास्त्री

वैदिक वाङ्मय का सर्वोच्च ग्रंथ भागवत - पंडित महेश शास्त्री

धमतरी, 17 मार्च। दाऊ भरतलाल जी गुप्ता, कृष्ण कुमार गुप्ता के परिवार जनों के द्वारा स्व. ग्रेप्सी गुप्ता के पुण्य स्मृति में आयोजित श्री मद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के कथा व्यास  पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य के कृपा पात्र शिष्य पंडित महेश शास्त्री धमतरी ने कहा भागवत कथा वेदरूपी कल्पवृक्ष का परिपक्व फल है ,जिस फल को शुकदेव स्वरूप परमहंस ने चोंच मारा जिसको पीने के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है वैदिक वाङ्मय का सर्वोच्च ग्रंथ है भागवत ,कोई सामान्य कहानी या साहित्य नही, जीवन  मे सत्संग का होना बहुत जरूरी है सतसंग विहीन जीवन पशु तुल्य माना गया है जो सत्संग करता है उसे जीवन मे गोकर्ण की प्राप्ति होती है , जो सत्संग नही करता उसे धुंधकारी मिलता है ,आत्मदेव ने सत्संग किया तो गोकर्ण की प्राप्ति हुई इसीलिए जीवन मे सत्संग का बहुत महत्व है - 

बिनु सत्संग न हरि कथा

तेहि बिनु  मोह न भाग।

मोह गये बिनु राम पद,

होई न दृढ अनुराग।।


इस आयोजन में पंडित अमलेश झा ,पंडित रामावतार  पण्डित कामेश्वर पांडे वैदिक विद्वानों के द्वारा विशेष परायण संपन्न हो रहा है भागवत कथा 14 मार्च से 22 मार्च तक चलेगी ,कथा समय दोपहर 3 बजे से रखा गया है सुबह 9 बजे मूल परायण किया जा रहा है ,आयोजक परिवार ने भक्तों से को अधिकाधिक संख्या में पहुँचकर कथा श्रवण करने का आग्रह किया।