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गुलमोहर के फूल, पत्तियों और छाल से बनेगी पाइल्स और डायरिया की दवाई

 गुलमोहर के फूल, पत्तियों और छाल से बनेगी पाइल्स और डायरिया की दवाई

राजकुमार मल

भाटापारा- गुलमोहर। फूल, पत्तियां और छाल। इनमें मिले 10 मेडिशनल प्रॉपर्टीज, इस वृक्ष को बेहद खास बनाते हैं। दिलचस्प यह कि सेवन से अत्यधिक रक्तस्राव रोकने और घाव को जल्द भरने में मदद मिलती है, तो पाइल्स और मूत्र विकार भी ठीक किया जा सकता है। यही वजह है कि वनोपज कारोबार की मदद से यह आयुर्वेदिक औषधि निर्माण इकाइयों तक पहुंच रहीं है।


अपने प्रदेश में बहुतायत में मिलने वाले गुलमोहर की पहुंच अब आयुर्वेदिक औषधी निर्माण इकाइयों तक होने लगी है। खासकर फूल, पत्तियां और छाल की डिमांड सबसे ज्यादा हो रही है। वनोपज कारोबार क्षेत्र अपने-अपने हिसाब से कीमत तय कर रहा है क्योंकि यह अभी वनोपज की सूची से बाहर ही है। संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले बरस में गुलमोहर  इस सूची में शामिल कर लिया जाएगा।

यह मेडिशनल प्रॉपर्टीज

गुलमोहर पर हुए अनुसंधान में जिन औषधीय गुणों की पहचान हुई है, उनमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीमाइरियल, एंटीफंगल, एंटीमाइक्रोबीयल, कार्डियो प्रोटेक्टिव, गैस्ट्रो प्रोटेक्टिव, जैसे तत्व मुख्य हैं। इसके अलावा हेपेटोप्रोटेक्शन, फ्लेवोनॉयड्स और एंटी डायबिटिक जैसे औषधिय तत्वों के मौजूद होने की जानकारी आई है।

इनसे राहत

गुलमोहर के फूल, पत्तियां और छाल में जो औषधीय तत्व मिले हैं, उनकी मदद से पाइल्स, गठिया, दस्त या डायरिया जैसी बीमारी  दूर की जा सकती है। इसके अलावा चोट लगने के बाद रक्तस्राव भी रोका जा सकता है। घाव यदि जल्दी नहीं भर रहे हैं तो, ऐसी स्थितियों में भी यह फौरन राहत देते हैं। बालों का झड़ना भी रोकने की क्षमता इसमें है।

हैं कई नाम



हिंदुस्तान में मिलने वाले पुराने वृक्षों में से एक गुलमोहर को कई नाम से पहचाना जाता है। फ्लेम ट्री या फायर ट्री के नाम से जाना पहचाना जाने वाला यह पेड़ डेलोनिक्स रेजिया,रॉयल पॉइंसियाना, के नाम से भी जाना जाता है।

चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य

गुलमोहर के फूल, पत्तियां और छाल में कई औषधीय गुणों की पहचान हुई है लेकिन सेवन से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लिया जाना आवश्यक होगा।

- अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट, (फॉरेस्ट्री) टीसीबी कॉलेज ऑफ एग्री एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर