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मध्यप्रदेश की डायरी: भोपाल ब्यूरो चीफ प्रणव पारे की कलम से (रहा किनारे बैठ)- दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए। दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए।।

मध्यप्रदेश की डायरी: भोपाल ब्यूरो चीफ प्रणव पारे की कलम से (रहा किनारे बैठ)- दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए। दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए।।


बुरे फंसे गुलफाम
डबरा विधानसभा के छीमक ग्राम में एक सभा में सिंधिया के सामने इमरती देवी भावुक हो गई और रो पड़ी। दरअसल, कमलनाथ ने अपरोक्ष रूप से उन्हें आइटम बोल दिया था। सिंधिया ने इमरती देवी के आंसू देखे तो रौद्र रूप धारण कर लिया और इमरती देवी को गले लगाते हुए पूरी चम्बल की बहु-बेटियों के सम्मान के साथ इसको जोड़ दिया। बताने वाले बता रहे हैं कि सिंधिया का ये रौद्र रूप किसी ने भी पहले नहीं देखा और ये अब हर सभा में प्रतिध्वनित होगा। कांग्रेस पार्टी के लोग अब रक्षात्मक रुख अपना कर मामले का डेमेज कण्ट्रोल कैसे हो इस जुगत में हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी भी इस मामले में दो फाड़ दिख रही है। दिग्विजय सिंह और मानक अग्रवाल ने इसे आपत्तिजनक माना और कहा कि राहुल गाँधी की आपत्ति के बाद कमलनाथ को माफ़ी मांग लेनी चाहिए। कांग्रेस में मचे इस घमासान के बाद कमलनाथ चौतरफा घिर गए हैं और सफाई दे रहे है की हम सब आइटम ही है, लेकिन तीर तो कमान से छूट गया है। अब भाजपा इस बात को मुद्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। सिंधिया के रौद्र रूप ने चम्बल इलाके में भाजपा में जान फंूक दी है। कमलनाथ के इस बयान के बाद कांग्रेस की मुसीबत बढ़ गई है और अब विरोध के स्वर अंदरूनी तौर पर भी उभरने शुरू हो गए है। कांग्रेस पार्टी के अंदर कमलनाथ विरोधी खेमे का उत्साह राहुल गाँधी के बयान के बाद चरम पर है। अब देखना यह है कि ये अंदरूनी लड़ाई उपचुनावों पर क्या असर डालेगी।  

दरअसल कांग्रेस पार्टी के भीतर और बाहर ये माना जा रहा है कि बिगड़ते हुए बोल से कांग्रेस पार्टी को सर्वाधिक नुकसान हो रहा है। यदि कमलनाथ समय रहते इमरती देवी से माफ़ी मांग लेते तो शायद ये मामला उतना तूल नहीं पकड़ता लेकिन राहुल गाँधी ने इस मामले को और बिगाड़ दिया। जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से कमलनाथ की इस बात पर खिंचाई कर दी नेतृत्व गुण इसे ही कहते हैं कि अपने आदमी की आलोचना कमरे के भीतर करो और तारीफ खुले मंच से। ये बहुत मूलभूत समझ है जिसे राहुल गाँधी ने या तो जानबूझकर या नासमझी में अंजाम दे डाला जो अब कांग्रेस की अंदरूनी फुट ही दिखा रही है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा ये तो कोढ़ में खाज जैसी हालत है। राहुल जी को कमलनाथ को व्यक्तिगत तौर पर दबाव डाल कर माफ़ी मंगवाना था और बाद में अपनी असहमति सार्वजानिक करनी चाहिए थी। अब सिंधिया ने पलटवार किया कि ये राहुल जी की कांग्रेस है या कमलनाथ कांग्रेस है। बहरहाल, भाजपा को इस घटना ने लाभ की स्थिति में ला ही दिया है।   

प्रियंका का दौरा टल सकता है
इस बीच इमरती देवी पर अभद्र टिप्पणी से उपजे विवाद के बाद प्रियंका वाड्रा का मध्यप्रदेश दौरा निरस्त होने के समाचार भी मिल रहे हैं। विश्वस्त सूत्र बता रहे हैं कि इमरती देवी वाले मामले में सबसे ज्यादा सवाल प्रियंका से किये जा सकते है। चूँकि, महिला मामले में वो कमलनाथ या पार्टी का पक्ष कतई भी नहीं रख पाएंगी। इस लिए असहज स्थिति को टालने के लिए या तो दौरे को आगे बढ़ाया जा सकता है या फिर निरस्त भी किया जा सकता है। मध्यप्रदेश के इस दौरे में उनका टूर कुछ इस ढंग से तैयार किया गया था कि वो चम्बल, ग्वालियर के कुछ पांच विधानसभा क्षेत्रों से रोड शो कि तरह गुजरती और दतिया में पीताम्बरा शक्तिपीठ के दर्शन भी करती लेकिन उनके इस दौरे का लाभ अब कांग्रेस उम्मीदवारों को नहीं मिलेगा इसकी संभावना अब ज्यादा है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस बयान को कांग्रेस आलाकमान किस ढंग से लेगा ये उपचुनावों में होने वाले नुकसान से तय होगा। कमलनाथ को अब निश्चित तौर पर पार्टी के अंदर और बाहर भाजपा, दोनों मोर्चो पर लड़ाई-लडऩा होगा। देखना तो अब ये है कि ऊँट अब किस करवट बैठेगा।

चलते-चलते
इधर, वल्लभ भवन में उपचुनावों के बाद की स्थिति पर क्या होगी इसको लेकर गंभीर मंथन चल पड़ा है। अधिकारियों की जमावट और प्लान अभी से तैयार होने लगे है। क्योंकि मंत्रियों के विभागों में भी बड़ी हेरफेर की संभावना दिखाई पड़ रही है। हालांकि ये अभी तय नहीं है कि किस को क्या मिलेगा पर किलेबंदी और मेल-मिलाप, गिले-शिक़वे दूर करने की कवायद में तेजी आ गयी है। इधर इमरती देवी पर अभद्र टिप्पणी के बाद भाजपा की बढ़त निश्चित मानी जा रही है। इसके चलते भाजपा के अंदरूनी समीकरणों पर भी असर दिखाई पड़ रहा है। मंत्रालयों को ट्यून करना और सेटिंग वाले लाइसिनिंग वाले अपने-अपने घोड़े छांव में बांधने की जुगत में हंै। बस अब इंतज़ार यदि है तो 10 नवम्बर का। पहले से तय तरकीबों का पिटारा खुलना शुरू हो जायेगा। दांव-पेंच के नए दौर शुरू होने में बस अब मात्र 20 दिनों का फासला रह गया है।