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अतिथि व्याख्याताओं की सेवाओं को लेकर महाविद्यालय प्राचार्यों की मनमानी

अतिथि व्याख्याताओं की सेवाओं को लेकर महाविद्यालय  प्राचार्यों की मनमानी


रायपुर, 11 जून। आपात स्थितियों में उच्च शिक्षा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने 31 जुलाई तक अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति आदेश  22 फरवरी को जारी किया गया था आदेश को हर संभवत: पालन करने के निर्देश के साथ शासन ने अतिथि व्याख्याताओं के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाते हुए  नियुक्ति करने के लिए महाविद्यालय के प्राचार्य को कहा किंतु जून माह में महाविद्यालय के प्राचार्य  सेवा समाप्ति का पत्र देने लगे किसी ने फोन से सेवा समाप्ति की सूचना दी .किसी ने पीडीएफ बना करके भेजा .और किसी ने मौखिक रूप से सेवा समाप्ति के आदेश दिएl जबकि शासन का आदेश स्पष्ट रूप से उनके नियुक्ति पत्र में 31 जुलाई तक लिखा गया हैl 

इस संदर्भ में जानकारी लिए जाने पर प्राचार्यो का गोलमोल जवाब रहा, प्राचार्य जो है जवाब देने में निरुत्तर रहे उनका कहना था की अध्यापन कार्य की आवश्यकता नहीं है 75% अध्यापन के कार्य पूरे हो चुके हैं कोर्स पूरा हो चुका है , जबकि ऐसी स्थिति महाविद्यालयों में नहीं थी प्रायोगिक कार्य बचे थे 25% अध्यापन के कार्य बचे थे और आदेश में शासन ने स्पष्ट किया था कि जरूरत के अनुसार प्राचार्य कार्य ले सकेंगे, किंतु प्राचार्य ने शासन के आदेश की अवहेलना करते हुए अपना मनमाना आचरण दिखाया 

इसी बीच अतिथि व्याख्याता संघ के द्वारा विभागीय सचिव महोदय धनंजय देवांगन उच्च शिक्षा विभाग से बातचीत की , अतिथि व्याख्याता संघ ने आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग महोदया शारदा वर्मा से बातचीत की और बातचीत के आधार पर सचिव महोदय ने स्पष्ट किया की आदेश शासन ने 31जुलाई तक का किया है और उन्होंने प्राचार्य को मौखिक एवं व्हाट्सएप के माध्यम से अतिथि व्याख्याताओं को ना हटाया जाने के आदेश प्रदान किए इसके बावजूद भी 254 से अधिक महाविद्यालयों में प्राचार्य ने छत्तीसगढ़ शासन के आदेश की अवहेलना करते हुए उन अतिथि व्याख्याताओं को जो प्राचार्य के समक्ष विरोध प्रकट  नहीं कर सकते थे या जिन्होंने हटाए जाने का विरोध नहीं किया सेवा समाप्ति का पत्र थमा दिया हटाए गए अतिथि व्याख्याताओं ने  अपने महासंघ से बातचीत की इस पर  उन्होंने विरोध प्रकट किया है इसी बीच छत्तीसगढ़ में महाविद्यालयों में दो तरह की स्थिति बन गई एक वह छत्तीसगढ़ मूल के प्राचार्य जिन्होंने अतिथि व्याख्याताओं को नहीं हटाया दूसरा आउटसाइडर जो छत्तीसगढ़िया लोगों के साथ सहानुभूति नहीं रखते हैं ऐसे प्राचार्य ने असंवेदनशील रवैया अपनाते हुए अतिथि व्याख्याताओं को महाविद्यालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया है हटा दिया।

 इस तरह शांति प्रिय उच्च शिक्षित अतिथि व्याख्याताओं के साथ महाविद्यालयों के प्राचार्य ने मनमानी की है अतिथि व्याख्याता संघ को निरंतर यह जानकारी प्राप्त हो हो रही है कि  अतिथि व्याख्याताओं को महाविद्यालयों से हटाया जा रहा है जबकि छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 31 जुलाई 2021 तक की नियुक्ति का स्पष्ट आदेश दिया गया है कॉलेज के प्राचार्य के द्वारा उच्च शिक्षा विभाग के आदेश का पालन न करते हुए उच्च शिक्षा विभाग एवं शासन के छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं प्राचार्य और महाविद्यालय के अकाउंटेंट की आदत बन चुकी है कि शासन के आदेश की गलत व्याख्या करना कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या करना और अतिथि व्याख्याताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना अकाउंटेंट एक तरफ पेमेंट नहीं बनाने की बात करते हैं प्राचार्य दूसरे तरफ सेवा मुक्त करने का लेटर थमा देते हैं  प्राचार्य से ज्यादा महाविद्यालय के अकाउंटेंट  अतिथि व्याख्याता के ऊपर हावी हो जाते हैं संभवत ऐसा प्राचार्यो के सह पर होता हैl 

अतिथि व्याख्याताओं से अपनी रुकी हुई शिक्षा व्यवस्था संपादित कराने के बाद आदेशित तिथि से पहले मनमाने तरीके से बाहर निकालना और उच्च शिक्षा विभाग के आदेशों का पालन न करना उसकी अवहेलना करना प्राचार्य के अनुशासन हीनता दर्शा रहा है क्रिस्टल क्लियर है एकदम पारदर्शी है कि महाविद्यालय प्राचार्य छत्तीसगढ़ शासन के आदेश का पालन नहीं करना चाहते हैं शायद वह अपनी आदत बना रखें है वह ऐसे की उच्च शिक्षा  सचिव अर्थात विभाग प्रमुख छत्तीसगढ़ शासन के दिए गए 31 जुलाई तक के नियुक्ति आदेश ना मानते हुए अतिथि व्याख्याताओं की सेवा समाप्ति करना आदेश की अवहेलना है lजो एक गलत कार्य है निश्चित तौर पर गलत हैl इस पर छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता महासंघ ने आपत्ति जताई है और अपना विरोध प्रकट किया है महासंघ के समस्त पदाधिकारियों ने उच्च शिक्षा विभाग के 31 जुलाई तक नियुक्ति के आदेश का पालन करने प्राचार्य से आग्रह किया है साथ ही अपनी शिकायत उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को प्रेषित की है अपने पत्र में लिखा है कि 31 जुलाई तक नियुक्त रखना सुनिश्चित करें नहीं तो जिलेवार आंदोलन की स्थिति बनेगी।

धमतरी, बलोदा बाजार,नगरी सिहावा,मुंगेली,पथरिया लोरमी, कोतरी नवीन महाविद्यालय एमोरा ,जमुना प्रसाद वर्मा कॉलेज जरहाभाटा, बिलासपुर,शासकीय नवीन महाविद्यालय बट गन और अनेकों महाविद्यालय से प्राचार्य द्वारा सेवा समाप्ति के जो आदेश जारी किए हैं को भेजकर महासंघ से और उच्च शिक्षा विभाग से प्रचार यों के इस मनमानी आचरण का विरोध किया है छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता महासंघ ने भी शासन प्रशासन से निवेदन किया है कि कालेज प्राचार्यो के इस मनमाने रवैए को तुरंत संज्ञान में लिया जाए और निकाले गए अतिथि व्याख्याताओं को तुरंत कार्य में बुलाया जाए कॉलेज जैसी संस्थाओं में कार्यरत निमित्त लोगों के नकारात्मक रवैया पर अफसोस जाहिर किया है आखिर उच्च शिक्षित अनुभवी छत्तीसगढ़ के अतिथि व्याख्याताओं के प्रति इतना ज्यादा नकारात्मक सोच रखना कहां तक उचित है अपने लिए तो बहुत अच्छी व्यवस्था चाहते हैं लेकिन दूसरों के लिए दूसरे दर्जे का हिसाब किताब करना चाहते हैं यह बेहद शर्मनाक बात है कॉलेज जैसे उच्च संस्था में कार्यरत लोग शासन के आदेश का पालन करना नहीं चाहते हैं इससे तो छत्तीसगढ़ शासन की छवि धूमिल होगी ऐसा वक्तव्य डॉक्टर आशीष दीवान एवं चंद्रशेखर तिवारी ने अपने संयुक्त वक्तव्य में प्रकट किया है।