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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - लॉकडाउन को लेकर दुविधा

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - लॉकडाउन को लेकर दुविधा

-सुभाष मिश्र
बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए देश के कुछ राज्यों में नाईट कफ्र्यू, कुछ में आंशिक लॉकडाउन लगा है किंतु अधिकांश जगह पूर्ण लॉकडाउन को लेकर सरकार और आम जनता में दुविधा की स्थिति बनी है। नागपुर में जहां पिछले 15 दिनों से लॉकडाउन था, वहां भी आज से इसे हटाकर कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत देकर खोल दिया गया है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव छत्तीसगढ़ में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए जरुर लॉकडाउन लगाने पर विचार करने की बात करते हैं किन्तु जमीनी हकीकत और लोगों की रोजमर्रा की आर्थिक कठिनाईयों से वाकिफ प्रदेश के मुख्यमंत्री लॉकडाउन के कतई पक्ष में नहीं हैं। जो लोग रोज कमाते-खाते हैं या जिन्हें अपने शारीरिक श्रम या सेवा देने के बदले मेहनताना मिलता है, लॉकडाउन में ऐसे लोगों के सामने भूखों मरने की नौबत आ जाती है। पिछले एक साल में कोरोना के दौरान लगे लॉकडाउन में बहुत से लोगों के गहने, बर्तन, जमीन, मकान तक बिक गये। बहुत से लोगों के सामने जीने का संकट आ पड़ा। सरकार की ओर से की गई सहायता ने कुछ गरीब परिवारों को थोड़ी राहत जरुर दी परंतु यह पूरक पोषण आहार जैसी ही थी। जो लोग सरकारी नौकरी में हंै या जिनके पास खाने-पीने, मजे से रहने के लिए पर्याप्त धनराशि है, वे जरूर चाहते हैं कि लॉकडाऊन लग जाये।  

देश में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस (कोविड-19) के मामलों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है और ये 72 हजार की संख्या को पार कर चुके हैं। विभिन्न राज्यों से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना के 72,021 नये मामले सामने आए और इसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या एक करोड़ 22 लाख 20 हजार 620 हो गई है। इस दौरान 40,385 मरीज स्वस्थ हुए हैं जिसे मिलाकर अब तक 1,14,72,462 मरीज कोरोनामुक्त भी हो चुके हैं। सक्रिय मामले 27,763 और बढ़कर 5,80,329 पहुंच गये हैं। इसी अवधि में 457 और मरीजों की मौत के साथ इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 1,62,959 हो गई है। देश में रिकवरी दर आंशिक घटकर 93.87 फीसदी और सक्रिय मामलों की दर बढ़कर 4.74 प्रतिशत हो गई  है जबकि मृत्युदर घटकर 1.34 फीसदी रह गयी है। देश में कोरोना महामारी से सबसे गंभीर रूप से प्रभावित महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों के दौरान साढ़े 39 हजार से अधिक नये मामले सामने आये और सक्रिय मामलों में 14,000 से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई जो पूरे देश में सर्वाधिक है। इस दौरान सक्रिय मामलों में 14,361 की और वृद्धि होने से इनकी संख्या आज बढ़कर 3,56,248 तक पहुंच गई है। इसी अवधि में 23,600 मरीजों के स्वस्थ होने से इस संक्रमण से निजात पाने वालों की संख्या बढ़कर 24,00,727 हो गई है तथा सबसे अधिक 225 और मरीजों की मौत होने से मृतकों का आंकड़ा 54,647 तक पहुंच गया है। राज्य में मरीजों के स्वस्थ होने की दर आंशिक गिरावट के साथ 85.34 फीसदी पर पहुंच गई है जबकि मृत्यु दर 1.94 प्रतिशत है।

सरकार ने कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए 45 साल से ऊपर के सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने की अनुमति दे दी है। लोगों को बार-बार समझाईश देकर मास्क पहनने, दूरी बरतने और सैनेटाईज होने की समझाईश दी जा रही है।  दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश जैसे कोरोना संक्रमण से जूझ रहे प्रदेशों ने भी पूर्ण लॉकडाउन के लिए मना करते हुए रविवार के लॉकडाउन के साथ रात के कफ्र्यू पर सहमति जताई है। दरअसल, हमारी समूची अर्थव्यवस्था पिछले एक साल में चरमरा सी गई है। सरकारों के पास स्वयं के उतने संसाधन नहीं हंै कि वह अपने यहां की जनता को घर बैठे मुफ्त अनाज देकर खिलाती रहे। लोग भी अब घर में बैठना नहीं चाहते। लॉकडाउन की सख्ती के बाद फैलते कोरोना संक्रमण ने उनके विश्वास को डिगाया है। देश की अधिकांश जनता जो गरीब है, मेहनतकश है वह नहीं चाहती कि लॉकडाउन लगे। आम जनता चुनाव की रैलियों, नेताओं की सभाओं, क्रिकेट मैच की भीड़, मंदिर दर्शन के नाम पर नेताओं के जुलूस और अन्य बहुत से आयोजनों को देखकर दुखी है। आम जनता को लगता है कि इस देश के नेता, बड़े रसूखदार लोगों को ये कब समझ में आयेगा। उनके द्वारा बरती जा रही लापरवाही को हम क्यों भुगतें।  

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसाइटीज़ (सीएसडीएस) का अध्ययन बताता है कि बड़े शहरों में कमाने -खाने वाली आबादी में से 29 फीसदी लोग दिहाड़ी मज़दूर होते हैं। वहीं, उपनगरीय इलाक़ों की खाने-कमाने वाली आबादी में दिहाड़ी मज़दूर 36 फ़ीसदी हैं। गांवों में यह आंकड़ा 47 फ़ीसदी है जिनमें से ज़्यादातर खेतिहर मज़दूर हैं। यह साफ है कि देश की इतनी बड़ी आबादी को लॉकडाउन बढऩे पर रोजग़ार नहीं मिलेगा। वित्त वर्ष की पहली तिमाही के अंत में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 6.5 फीसदी हो गई है। फरवरी माह के 6.9 फीसदी की तुलना में इसमें 0.4 फीसदी तक की कमी आई है। इस दौरान शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर ज्यादा (7.2 फीसदी) और ग्रामीण क्षेत्रों में कम (6.3 फीसदी) दर्ज की गई है।

कोरोना संक्रमण से लडऩे के लिए सरकार ने 1.7 लाख करोड़ रुपए की आर्थिक मदद की घोषणा की है और दूसरी तरफ़ 15000 करोड़ स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार करने के लिए ये हमारी जीडीपी का महज़ 0.8 फ़ीसदी हिस्सा है। साफ़ है सरकार के पास ना तो बीमारी से लडऩे के पैसे हैं और ना ही उद्योग जगत की मदद करने के लिए पैसे तकरीबन 80 फ़ीसदी उद्योग में लॉकडाउन की वजह से काम बंद हैं। जिसका सीधा असर नौकरियों पर पडऩे वाला है।  

देश के छह राज्यों (महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात) में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। देश में कोरोना के जितने भी नए मामले आ रहेहैं, उनमें से 78.56 प्रतिशत केस इन्हीं राज्यों से हैं। महाराष्ट्र ने लॉकडाउन जैसे सख्त प्रतिबंधों के संकेत दिए हैं, लेकिन पूरी तरह से लॉकडाउन लगाने की घोषणा से परहेज किया है। इसके बदले में भीड़भाड़ वाली जगहों जैसे रेस्तरां, गार्डंस, पार्क, मॉल्स और समुद्री किनारों पर एक अप्रैल से कड़ी पाबंदी लगाई जा सकती है। छत्तीसगढ़ और गुजरात जैसे राज्यों में नाइट कफ्र्यूू का ऐलान किया गया है, जबकि उत्तराखंड और गुजरात में दूसरे स्थानों से आने वालों के लिए कोरोना टेस्टिंग को अनिवार्य बनाया गया है।

हमारे देश में जहां कोरोना की दूसरी लहर देखी जा रही है। वहीं फ्रांस में कोरोना की दूसरी लहर के बाद 4 हफ्तों का लॉकडाउन लगाया गया है। कोरोना वायरस की तीसरी लहर का सामना कर रहे फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देशभर में 4 हफ्तों के लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। इस दौरान शिक्षण संस्थानों से लेकर कारोबार की जगह तक सब बंद रहेंगे। पिछले लॉकडाउन के दौरान कृषि को छोड़कर, अर्थव्यवस्था में विकास के अन्य सभी प्रमुख संकेतक बड़े पैमाने पर प्रभावित हुए थे। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र निर्माण (-50 प्रतिशत), व्यापार, होटल और अन्य सेवाएं (-47 प्रतिशत), विनिर्माण (-39 प्रतिशत) और खनन (-23 प्रतिशत) थे।  एक दूसरे के पाले में बॉल डालने की इस कवायद में पहले भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केन्द्र सरकार पर भेदभाव करने का आरोप लगा चुके हैं। इससे पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी केन्द्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगा चुकी हैं। कोरोना से उपजी स्थिति ने पूरे समाज जीवन में एक हलचल, अघोषित भय और एक दूसरे के प्रति अविश्वास का भाव पैदा कर दिया है। अभी लोग अपने कोरोना पॉजिटिव होने को छिपा रहे हैं। जब तक आक्सीजन का लेबल कम ना हो जाये, जान सांसत में ना आ जाये कोई कुछ बताने को तैयार नहीं है। कोरोना से उपजी स्थिति और उसके बाद ताबड़तोड़ तरीके से लिए गये निर्णय लोगों को सहज स्वीकार नहीं हैं। यही वजह है कि अब लोग अब चेतावनी को भी गंभीरता से नहंी ले रहे हैं।

वे संत कबीर की तरह अमरत्व की बात सोच रहे हैं - हम न मरैं, मरिहें संसारा। हम कूं मिला जियावनहारा।। वैसे आजकल सोशल मीडिया पर इस तरह के संदेश भी तेजी से वायरल हो रहे हैं।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर बहुत तेजी से फैल रही है इसलिए खुद को और दूसरों को सुरक्षित रखें क्योकि -
पुराण के अनुसार निम्न महापुरुषों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है....
1 - राजा बाली..
2 - अश्वत्थामा..
3 - वेदव्यास..
4 - हनुमान जी..
5 - विभीषण..
6 - कृपाचार्य..
7 - परशुराम..
8 - मार्कण्डेय..
यदि आपका नाम उपर्युक्त सूची में नहीं है...तो कृपया मास्क पहनें, सामाजिक दूरी का पालन करें, हाथ धोते रहें, सैनिटाइजर का उपयोग करें...।