breaking news New

येदियुरप्पा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संदेश का कर रहे हैं इंतजार

येदियुरप्पा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संदेश का कर रहे हैं इंतजार

बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे पर रविवार को बेलगावी में हैं लेकिन उन्हें भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के उस संदेश का इंतजार है जो यह साफ करेगा कि वह मुख्यमंत्री के पद पर रहेंगे या इस पद से हटाए जाएंगे।
इससे पहले मीडिया को दिये वक्तव्य में  येदियुरप्पा ने आज शाम तक दिल्ली से संदेश प्राप्त होने की उम्मीद जाहिर की थी।  येदियुरप्पा के 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा जैसे केंद्रीय नेताओं से मुलाकात के बाद दिल्ली से आने के तुरंत बाद, उनके मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने की अटकलें पूरे मीडिया में फैल गईं हैं।
गत 17 जुलाई को श्री येदियुरप्पा ने अपने इस्तीफे की अटकलों को साफ खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात के दौरान इस संबंध में एक शब्द भी बात नहीं हुई।
उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपने के एक सवाल के जवाब में कहा,“नहीं... यह एक अफवाह है। इस मुद्दे पर उन्होंने या केंद्रीय नेताओं ने एक भी शब्द पर चर्चा नहीं की। अगर मैंने इस्तीफा दे दिया होता तो मेरे छिपने का कोई कारण नहीं है।”

येदियुरप्पा ने कहा कि श्री नड्डा ने उनसे आगामी 2023 राज्य विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी को मजबूत करने को कहा है।
इसके बाद 20 जुलाई से श्री येदियुरप्पा के समर्थन में वीरशैव-लिंगायत समुदाय के धार्मिक प्रमुख आने लगे। चित्रदुर्ग में आनन-फानन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुरुघा मठ के संत शिवमूर्ति शरणारू ने कहा कि श्री येदियुरप्पा ने सभी जातियों और धर्मों के लोगों के विकास के लिए समान रूप से काम किया है और इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए।
उन्होंने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को श्री येदियुरप्पा को हटाए जाने पर वीरशैव और लिंगायत समुदायों का विश्वास खोने की चेतावनी भी दी, जिसका पार्टी पर नकारात्मक असर पड़ेगा। मुरूघा के पुजारी ने कहा, “ श्री येदियुरप्पा जमीनी स्तर के नेता हैं। उन्हें हटाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने पार्टी को सिरे से खड़ा किया है।”
भ्रष्टाचार और प्रशासन में हस्तक्षेप के आरोपों के साथ, कुछ असंतुष्ट भाजपा नेताओं ने उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाया था जिसके मद्देनजर  येदियुरप्पा के हटाने की संभावना के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं।
 येदियुरप्पा ने 22 जुलाई को पहली बार यह कहकर अपनी चुप्पी तोड़ी कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कहा जाता है तो वह केंद्रीय नेतृत्व के फैसले का पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि वह 25 जुलाई को केंद्रीय नेतृत्व के संदेश का इंतजार कर रहे हैं और उसका पालन करेंगे और अगले दिन से अपना काम शुरू करेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि कोई नहीं जानता कि संदेश क्या होगा। येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के मुद्दे पर सभी राज्य भाजपा नेताओं ने अनभिज्ञता जाहिर की है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और ब्राह्मण नेता प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा था कि उन्हें श्री येदियुरप्पा के इस्तीफे की जानकारी नहीं है क्योंकि उन्होंने जिन केंद्रीय नेताओं से मुलाकात की उनमें से किसी ने भी इस बारे में बात नहीं की। उन्होंने उन खबरों को भी खारिज कर दिया कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहन की दौड़ में वह सबसे आगे हैं।
अगर श्री येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कहा जाता है तो श्री जोशी के नाम के अलावा, सी टी रवि और अरविंद बेलाड के नाम भी मीडिया में आ रहे हैं। श्री रवि मलनाड क्षेत्र के एक प्रमुख वोक्कालिगा नेता हैं और अपनी हिंदुत्व की राजनीति के लिए जाने जाते हैं। श्री बेलाड हुबली-धारवाड़ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से दो बार निर्वाचित हुए हैं। वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक लोकप्रिय नेता हैं और उन्होंने गरीबों को घर उपलब्ध कराया है, जो कि श्री मोदी के सभी के लिए आवास की अवधारणा की तर्ज पर है।
खान एवं भूविज्ञान मंत्री मुरुगेश निरानी का भी नाम सामने आ रहा है। वह श्री अमित शाह के करीबी हैं और लिंगायत समुदाय में सबसे बड़े पंचमशाली संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं।इसके अलावा श्री बसवराज बोम्मई भी एक प्रमुख दावेदार हैं और श्री येदियुरप्पा के करीबी सहयोगी हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री एसआर बोम्मई के बेटे हैं और लिंगायत समुदाय से आते हैं।