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कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः दिनांक में बचा रह गया समय

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः दिनांक में बचा रह गया समय


दिख रहा है पत्तियों से उड़ता रंग

स्मृति में धूमिल शब्द

दिख रहा है टूट कर गिरता पंख

तिनके पर ठहरी बूँद में प्रतिबिम्ब

दिख रहा है स्तब्ध वृक्ष

घोसले में बैठा अकेला मौन पक्षी

बादल से झाँकती एक किरन

दिख रहा है दिनाँक में

बचा रह गया समय

अधपके फल पर चोंच का निशान


अक्सर नहीं दिखता था

अब दिख रहा है


दिख रहा है टिमटिमाता दुख

तृष्णा के विस्तार में

ठिठकी हुई सुख की उड़ान

दिख रहा है प्रेम नीले रंग का

गहरे गगन में


अक्सर नहीं दिखता था

अब दिख रहा है ....