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नगरी में पारंपरिक माता पहुंचानी संपन्न,दिखी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक झलक

नगरी में पारंपरिक माता पहुंचानी संपन्न,दिखी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक झलक

नगरी। नगर में गुरुवार को पारंपरिक माता पहुंचानी का आयोजन किया गया।जिसमें प्रात: काल जुड़वास की रीति संपन्न हुई।तत्पश्चात दोपहर में माता पहुंचानी का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ । नई बस्ती माता सेवा दल और पुरानी बस्ती माता सेवा दल नगरी के भक्तों के द्वारा संबंधित लोगों को भव्य शोभायात्रा निकालकर माता रानी के जस गीत की अनुपम प्रस्तुति के साथ माता देवालय पहुंचाया गया। शोभायात्रा को प्रचलित शब्दों में माता की बारात कहा जाता है। इसमें शामिल सभी नये वस्त्र धारण करते हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार शोभायात्रा में शामिल महिलाओं को अपना सिर खुला रखने की परंपरा है।अस्वस्थता की स्थिति में जिसके ऊपर माता सवार होती है वे मन्नत की चीजें माता देवालय में अर्पित करते हैं। फुल, अगरबत्ती,श्रीफल, और चावल सामान्यत: अर्पित किये जाते हैं। पुजारी के कर-कमलों से नीम की पत्तियों से सिर पर दुध का आचमन कर शांति कराई गई।इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की संस्कृति की बानगी स्पष्ट झलक रही थी।इस आयोजन को सफल बनाने में आयोजक नगर व्यवस्था समिति नगरी के अध्यक्ष ललित प्रसाद शर्मा,उपाध्यक्ष माखन भरेवा, सचिव ज्वाला साहु कोषाध्यक्ष श्रवण नाग, सहसचिव नोहर साहु , नगर पुरोहित पण्डित ठकुरीधर शर्मा,पुजारी गण रमेश कश्यप,सुखुराम साहु, अरुण सार्वा,तिहारु राम मरकाम, उत्तम गौर के अलावा हृदय नाग,बृजलाल सार्वा, नरेश छेदैहा, नागेंद्र शुक्ला, हेमलाल सेन,गेंदलाल पटेल ,अशोक पटेल , प्रकाश पुजारी,परसादी राम चंद्रवंशी, ,गिरजा शंकर सोम , रमेश सार्वा, वीर कुमार हिरवानी,लोकनाथ साहु, देवीचंद ढेलढिय़ा, नोहरू साहु ,कार्तिक पटेल ,रघुराम साहु, जोहन साहु झाड़ूराम यादव,हरी राम साहू ,खेलन कुंजाम,सुरेश साहू ,रवि चिण्डा,अश्वनी यादव ,संत कुमार नेताम, मनीराम साहू ,संतोष साहू आदि का योगदान रहा।