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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -मिलेगा तो लगाएंगे

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -मिलेगा तो लगाएंगे

सुभाष मिश्र
जी हां, ये एक मई से शुरू होने टीकाकरण अभियान को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कह रहे हैं।
विनोद कुमार शुक्ल का एक उपन्यास है खिलेगा तो देखेंगे उसी स्वर में छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्यमंत्री को कहना पड़ रहा है कि मिलेगा तो लगाएंगे। दरअसल देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की थी कि पूरे देश में 18 वर्ष से अधिक की आयु के लोगों को एक मई से टीका लगाया जायेगा। अभी तक यह टीका कैसे उपलब्ध होगा इसकी जानकारी राज्यों को नहीं है। क्या केंद्र सरकार पहले की तरह टीके उपलब्ध करायेगी? फिलहाल जो दो देसी कंपनियां कोरोना का टीका दे रही है, वे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से भारत सरकार के अधीन है। राज्य सरकार ने दोनों कंपनियों को 25-25 लाख टीके का आर्डर दे दिया है। किन्तु भारत सरकार की ओर से अभी तक यह नहीं बताया गया है कि कब-कब कितनी वैक्सीन मिलेंगी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में टीकाकरण तभी चालू हो पायेगा जब हमें केंद्र के माध्यम से वैक्सीन मिलेगे। हमने प्रधानमंत्री की घोषणा और बैठक में हुई चर्चानुसार विश्वास करके एक मई से 18 साल से 45 साल तक की आयु वर्ग के एक करोड़ 35 लाख लोगों के लिए टीकाकरण का पूरा प्रोग्राम बनाकर तैयार कर लिया है। बस टीके मिलने की देर है। चूंकि यह टीका राज्य सरकारों की ओर से लगाया जाना है और छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे नि:शुल्क लगाने के लिए अपनी ओर से एक हजार करोड़ रूपये खर्च कर रही है। बस देर केन्द्र सरकार से मिलने वाले टीको की है, मिलेगा तो लगायेगें।
फिराक गोरखपुरी का एक शेर है जो इस समय के हालातों पर बहुत मौंजूं है।
न कोई वादा न कोई यक़ीं न कोई उमीद
मगर हमें तो तिरा इंतिज़ार करना था।।
राज्य सरकारें जिस तरह से ऑक्सीजन सिलेडर, जीवन रक्षक दवाईयों की प्रतिक्षा कर रही है, उसी तरह उन्हे अब वैक्सीन की प्रतीक्षा करनी होगी।
छत्तीसगढ़ की ही तरह राजस्थान, पंजाब और झारखंड के स्वास्थ्य मंत्रियों सभी कांग्रेस शासित, गैर-भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने कहा है की रविवार को 1 मई से 18 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए वैक्सीन की खुराक की कमी के कारण देरी हो सकती है।
राज्यों का कहना है कि वैक्सीन के समान वितरण को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों की भूमिका होनी चाहिए, कुछ राज्यों को डर है कि 1 मई को जब टीकाकरण 18 से अधिक के लिए खोला जाता है, तो कमी का संकट हो सकता है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने अपना रेट कार्ड जारी किया है- केंद्र के लिए 150 रुपये, राज्यों के लिए 400 रुपये, निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपये। निर्माताओं ने यह नहीं बताया है कि वे राज्यों और निजी अस्पतालों के बीच वितरण को कैसे प्राथमिकता देंगे।
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा ने कहा है कि सरकारों को इस बात पर प्राथमिकता तय करनी चाहिए कि पहले कौन प्राप्त करेगा। निजी कंपनी की भूमिका केवल खरीद से संबंधित होनी चाहिए। शैलजा ने कहा कि एक चिंता का विषय था कि बड़े निजी अस्पतालों और कुछ राज्यों के नेटवर्क से बड़े भंडार हो सकते हैं।
केंद्र ने यह तय नहीं किया है कि खुले बाजार से कितने निजी अस्पताल को वैक्सीन मिलेंगे। इससे गरीबों को नुकसान होगा। एक डर यह भी है कि निर्माता सौदेबाजी के बाद निजी अस्पतालों के साथ मिलकर वैक्सीन की कीमत में वृद्धि कर सकते है।
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि हमारे पास टीके के वितरण के बारे में कोई विवरण नहीं है। केंद्र ने 17 अप्रैल को 11 स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ एक वीडियो सम्मेलन किया था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस तरह के एक महत्वपूर्ण निर्णय का उल्लेख नहीं किया। यहां तक कि कीमत की घोषणा सीरम ने एकतरफा की।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बधेल के अनुसार कोविड वैक्सीनेशन के मामले में छत्तीसगढ़ देश के कई विकसित और साधन सम्पन्न राज्यों को पीछे छोड़ चुका है। प्रदेश में 53 लाख से ज्यादा डोज वैक्सीन के लग चुके हैं और देश के बड़े राज्यों में हमारा स्थान दूसरा हैं। छत्तीसगढ़ में आगामी 1 मई से हम एक नया इतिहास रचने जा रहे हैं। इसके तहत प्रदेश के 18 वर्ष से लेकर 44 वर्ष तक के लोगों को मुफ्त में कोविड वैक्सीन लगाने के लिए सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक दोनों को 25-25 लाख वैक्सीन डोज अर्थात कुल 50 लाख डोज के लिए आदेश भी कर दिया गया है।
महामारी विशेषज्ञों की राय है की भारत में जिलों को प्राथमिकता देकर 18+ टीकाकरण शुरू करना चाहिए। उन जिलों में जहां सकारात्मकता दर 15 से ऊपर है, पहले इसे प्राप्त करना चाहिए, उसके बाद 5 और 15 के बीच। यह वैक्सीन आपूर्ति पर दबाव को कम करने में मदद करेगा। कुछ लोगो ने वैक्सीन की कमी के समय टीकाकरण के मानदंड का विस्तार करने के कदम पर सवाल उठाया है। उनका मानना है की निजी क्षेत्र, जोड़तोड़ करने वाले और मौद्रिक लाभ पाने वाले लोग सभी मिलकर पूरी अराजकता पैदा करेंगे। यह काफी संभावना है कि जो अधिक भुगतान करने में सक्षम होंगे उन्हें एक्सेस मिल जाएगा। आम आदमी को अभी और इंतजार करना होगा।
एक राष्ट्र एक दाम की बात करके छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री चाहते हैं की हमें टीको की उपलब्धता और संख्या के बारे में मालूम होना चाहिए ताकि हम अपने राज्य में बेहतर तरीके से टीकाकरण कर सकें। जिस तरह टीकाकरण अभियान के प्रथम चरण में इसे लेकर जो भांर्तियां फैली थी, कहीं इस चरण में टीको की उपलब्धता को लेकर हाय तौबा ना मचे। इस राष्ट्रीय आपदा को लोग अपने लाभ के अवसर में ना बदलें।