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विवेकानंद केंद्र द्वारा आयोजित युवा कार्यशाला के द्वितीय दिवस डॉ राजीव चौधरी का व्याख्यान जो पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी रायपुर में अधिष्ठाता छात्र कल्याण हैं

विवेकानंद केंद्र द्वारा आयोजित युवा कार्यशाला के द्वितीय दिवस डॉ राजीव चौधरी का व्याख्यान जो पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी रायपुर में अधिष्ठाता छात्र कल्याण हैं


रायपुर !  विवेकानंद केंद्र द्वारा आयोजित युवा कार्यशाला के द्वितीय दिवस में युवा एवं स्वास्थ्य विषय पर डॉ राजीव चौधरी का व्याख्यान हुआ जो पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी रायपुर में अधिष्ठाता छात्र कल्याण हैं ।  उन्होंने डब्ल्यूएचओ द्वारा दी गई स्वास्थ्य के परिभाषा से अपना व्याख्यान प्रारंभ किया एवं सुश्रुत संहिता तथा चरक संहिता से होते हुए शरीर एवं मन के अंतर्संबंध को बताया ।




उन्होंने कहा डब्ल्यूएचओ के अनुसार स्वास्थ्य अर्थात शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य आवश्यक है । आयुर्वेद के क्षेत्र में सुश्रुत संहिता में स्वास्थ्य को परिभाषित किया गया है जिसमें कहा गया है कोई व्यक्ति स्वस्थ तभी कहा जा सकता है जब -  उसका सम दोषै हो अर्थात वात पित्त एवं कफ समान हो किसी का भी दोष होगा तो गड़बड़ होगा  । सम अग्नि होना चाहिए सम धातु हो तथा मल क्रिया सुव्यवस्थित होती हो। सभी इंद्रियां प्रसन्न रहो अर्थात मन एवं आत्मा प्रसन्न हो ।



उन्होंने बताया चरक संहिता के अनुसार स्वास्थ्य के तीन पिलर हैं आहार निद्रा एवं ब्रह्मचर्य । इसलिए हमारा आहार उचित हो, निद्रा भी पूरी होनी चाहिए जो कि आज के लाइफस्टाइल में कम हो गई है एवं इंद्रियों का संयम भी आवश्यक है ।

उन्होंने बताया मन एवं शरीर का आपस में संबंध होता है दोनों का एक दूसरे पर प्रभाव पड़ता है । मन का शरीर पर गहरा प्रभाव होता है मनोदैहिक रोग या साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर का एक उदाहरण है अल्सर जो तनाव आदि के कारण भी उत्पन्न होता है । मन का शरीर पर सकारात्मक प्रभाव भी होता है जैसे डॉक्टर ने किसी को पुड़िया में शक्कर दे दिया और बोला यह दवाई खा कर तुम ठीक हो जाओगे एवं उसका ठीक हो जाना इसी का उदाहरण है ।



शरीर से दिमाग का संबंध बताते हुए उन्होंने कहा यदि हमें सर्दी है या हाथ जल गया है तो इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है और मन प्रसन्न नहीं रह पाता ।
ध्यान का मस्तिष्क पर सीधा एवं स्वैच्छिक प्रभाव पड़ता है । इसीलिए प्राणायाम एवं ध्यान मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है ।

उन्होंने अन्नमय कोष, सूक्ष्म शरीर एवं कारण शरीर के बारे में बताया । मनुष्य जन्म लेता है वृद्धि करता है वह स्थिरता को प्राप्त करता है अंत में मृत्यु होती है यह अन्नमय में कोष में आता है, सूक्ष्म शरीर अर्थात आत्मा एवं कारण शरीर अर्थात स्थूल रूप । उन्होंने कछुआ एवं खरगोश की कहानी को नए ढंग से बताते हुए चार बार दौड़ होने का जिक्र किया जैसा कि सभी जानते हैं प्रथम बार कछुआ जीता, द्वितीय बार में अपनी कमियों को दूर कर खरगोश जीता, तीसरी दौड़ में रास्ते का निर्धारण कछुआ किया अतः कछुआ जीता तब खरगोश बोला एक चौथा और अंतिम रेस करते हैं दोनों की आंतरिक क्षमताएं अलग अलग थी इसलिए रास्ते में जब नदी आएगा तो खरगोश कछुए के ऊपर बढ़ जाएगा एवं जब मैदानी भाग में चलना होगा तो कछुआ खरगोश के ऊपर बैठ जाएगा इस प्रकार सहयोग के साथ आप अपने स्व के प्रदर्शन की तुलना में हमेशा अच्छा प्रदर्शन करेंगे ।



 द्वारा किया गया । कार्यक्रम में 112 युवा प्रतिभागी शामिल हुए । भंवर सिंह राजपूत, डॉ उल्हास वारे, प्रतीक शर्मा, संजय आयदे,
आशुतोष शुक्ल, टिकेश्वर कौशिक, अनिल साहू, मनीषा गर्ग मावजीभाई भाई पटेल, rachna Jani दीदी सुभाष चन्द्राकर, बलवीर कुशवाहा, शिवदयाल पटेल, श्रुति संध्या vinay manikpuri रघुवर पटेल विनोद साहू प्रवीण यादव आदि उपस्थित रहे ।