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सत्ता में परिवर्तन के बावजूद भारत - अमेरिका के साथ रिश्ते होंगे' बेहतर

 सत्ता में परिवर्तन के बावजूद भारत - अमेरिका के साथ रिश्ते  होंगे' बेहतर

वाशिंगटन। अमेरिका में सत्ता में परिवर्तन के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विकास पर इसका कोई असर नहीं पड़ता.  विदेश नीति के मोर्चे पर ये सबसे अहम रिश्ता है जिसका आधार रणनीतिक साझेदारी है. यानी ये साधारण ‘गिव एंड टेक’ फॉर्मूले से कहीं ऊपर है.  

जो बाइडेन-कमला हैरिस की जोड़ी की जीत के साथ भारत-अमेरिका रिश्तों में कई मोर्चों पर निरंतरता जारी रहना निश्चित है. बराक ओबामा प्रशासन में उपराष्ट्रपति रहते हुए बाइडेन अमेरिका की दक्षिण एशिया रणनीति में अहम रोल निभा चुके हैं. 

सकारात्मक नोट पर शुरुआत करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाइडेन-हैरिस की "शानदार" जीत पर बधाई के ट्वीट किए. 

बाइडेन के लिए उन्होंने लिखा- बधाई, आपकी शानदार जीत पर! उपराष्ट्रपति रहते आपका भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए दिया योगदान अहम और मूल्यवान है. मैं आपके साथ एक बार फिर घनिष्ठता के साथ काम करने के लिए आगे देख रहा हूं जिससे भारत-अमेरिका संबंधों को महान ऊंचाई तक ले जाया जा सके. 

कमला हैरिस को  बधाई वाले ट्वीट में पीएम मोदी ने कहा- हार्दिक बधाई! आपकी सफलता पथप्रवर्तक है, अत्यंत गौरव का विषय है ना आपकी चिट्टीस के लिए बल्कि सभी भारतीय-अमेरिकियों के लिए. मुझे विश्वास है कि आपके समर्थन और नेतृत्व से जीवंत भारत-अमेरिका संबंध और भी मजबूत बनेंगे. 

भारतीय-अमेरिका पॉलिसी स्ट्डीज में वाधवानी चेयर, रिचर्ड रोसो ने इंडिया टुडे से कहा, “बाइडेन प्रशासन संभवतः रक्षा और आतंकवाद विरोधी क्षेत्रों में सकारात्मक गति बनाए रखेगा. व्यापार में खिंचाव का कारण बना रहेगा. तीन क्षेत्रों में जहां मुझे सबसे बड़ा बदलाव दिखाई देता है वो हैं- स्किल्ड इमिग्रेशन पर कम दबाव; जलवायु परिवर्तन पर नए सिरे से सहयोग."

दोनों पक्ष विभिन्न मोर्चों पर, विशेष रूप से इंडो-पैसिफिक मोर्चे पर निरंतरता और मजबूती होते हुए देखेंगे. ओबामा प्रशासन के दौरान 'एशिया पैसिफिक' पर एक विज़न डॉक्यूमेंट के रूप में एक पहल ने आकार लिया, जो कि इस क्षेत्र में चीनी चुनौतियों का सामना करने के लिए है. 

वास्तव में, 2015 के मोदी-ओबामा के 'एशिया-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए संयुक्त रणनीतिक विजन' नामक ओबामा-बैठक के बाद एक अलग दस्तावेज जारी किया गया था जो विशेष रूप से 'दक्षिण चीन सागर' पर केंद्रित था. जबकि नामकरण "एशिया-प्रशांत" से बदल कर "भारत-प्रशांत" में बदल गया, लेकिन मकसद समान है.