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मोदी की लोकप्रियता सात साल के निम्नतम स्तर पर, नरेंद्र मोदी ब्रांड बुरी तरह अपनी चमक खो रहा

मोदी की लोकप्रियता सात साल के निम्नतम स्तर पर, नरेंद्र मोदी ब्रांड बुरी तरह अपनी चमक खो रहा

नई दिल्ली, 20 मई।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पिछले सात साल के न्यूनतम स्तर पर है। हालांकि वे अभी भी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं, पर उन्हें पसंद करने वालों से ज़्यादा संख्या उन्हें नापसंद करने वालों की है और यह भी सात साल में पहली बार हुआ है। 

सर्वेक्षण करने वाली एजेंसी सी-वोटर ने अपने हालिया सर्वेक्षण में पाया है कि इसमें भाग लेने वालों में से सिर्फ 37 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे नरेंद्र मोदी के कामकाज से बहुत संतुष्ट हैं। 

पिछले साल के सर्वेक्षण में मोदी के कामकाज से बहुत संतुष्ट लोगों की तादाद 65 प्रतिशत थी। ज़ाहिर है, यह बहुत बड़ी गिरावट है। 

सी-वोटर के संस्थापक यशवंत दशमुख ने कहा,नरेंद्र मोदी अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं।

लेकिन इसके सर्वेक्षण से ही यह भी पता चलता है कि नरेंद्र मोदी लोकप्रियता गिरने के बावजूद देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं।

दूसरी ओर, 'मॉर्निंग कंसल्ट' नामक अमेरिकी संस्था ने कहा है कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में सितंबर 2019 से अब तक 22 प्रतिशत अंक की गिरावट आई है।

राजनीतिक सर्वेक्षण करने वाली इस कंपनी का कहना है कि उसने अगस्त 2019 से भारतीय प्रधानमंत्री की लोकप्रियता पर सर्वेक्षण करना शुरू किया था। तब से यह सबसे बड़ी गिरावट आ रही है।

'मॉर्निंग कंसल्ट' का कहना है कि नरेंद्र मोदी की रेटिंग इस हफ़्ते 63 फ़ीसदी रही, जो अप्रैल की तुलना में 22 पॉइंट कम है।

इस सर्वे में भी महामारी से निपटने के मामले में सरकार के प्रति लोगों का भरोसा कम हुआ है। सर्वे में शामिल केवल 59 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि सरकार ने संकट से निपटने में अच्छा काम किया है।

कोरोना की पिछली लहर में ऐसे लोगों की तादाद 89 फ़ीसदी थी। मोदी को 2024 के पहले आम चुनाव का सामना नहीं करना है।

इन दोनों सर्वेक्षणों के नतीजों का अध्ययन किया जाए तो यह साफ़ होता है कि कोरोना महामारी, इसका कहर, उससे मरते लोग और तबाही के मंजर के बीच सरकार व सत्तारूढ़ दल का डैमेज कंट्रोल बहुत कारगर नहीं हो रहा है और नरेंद्र मोदी ब्रांड बुरी तरह अपनी चमक खो रहा है।

'मॉर्निंग कंसल्ट' के सर्वेक्षण का नतीजा ऐसे समय आया है जब गाँवों में एकाएक मौत के मामले बढ़ गए हैं। गंगा में सैकड़ों लाशें तैरती मिल रही हैं। हज़ारों लाशों को गंगा किनारे रेत में दफ़न करने की ख़बरें हैं। गाँवों में बड़ी संख्या में बुखार से पीड़ित होने की रिपोर्ट है।

गाँवों में तो लोगों के पास कोरोना जाँच की सुविधा ही नहीं है या फिर लोग जाँच करा नहीं रहे हैं। डॉक्टर और एंबुलेंस जैसी सुविधा भी नहीं है। गंभीर हालत होने पर मरीज़ों को शहरों में लेकर जाँच कराने पर अधिकतर मामलों में कोरोना की रिपोर्ट आ रही है। कई मरीज तो शहरों के अस्पताल पहुँचते-पहुँचते ही दम तोड़ दे रहे हैं।