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मुख्यमंत्री जी, अब तो पेंशनरों के निवेदन को सुनें !

मुख्यमंत्री जी, अब तो पेंशनरों के निवेदन को सुनें !


डॉ. चन्दर सोनाने


               केंद्र सरकार ने गत 14 जुलाई को ही केंद्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों का रोका हुआ महँगाई भत्ता बहाल कर दिया है । अब उनका महँगाई भत्ता 11 प्रतिशत बढ़ाकर 17 प्रतिशत से 28 प्रतिशत कर दिया गया है । किन्तु मध्यप्रदेश सरकार ने अभी तक इस संबंध में अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए कुछ नहीं किया है !

               पिछले दिनों राज्य पेंशनर्स संघ के निर्देश पर प्रदेश के हर जिले में जिला पेंशनर संघों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नाम अपने - अपने जिलों के कलेक्टरों को ज्ञापन सौंप कर उनकी प्रमुख मांगों के निराकरण के लिए निवेदन किया है । उज्जैन में भी संघ के अध्यक्ष श्री अरविंद भटनागर , सचिव श्री आर सी शर्मा तथा संघ के अन्य सदस्यों ने कलेक्टर के प्रतिनिधि को अपना ज्ञापन सौंपा । उसमें उन्होंने मुख्यमंत्री जी से अपनी प्रमुख मांगों के निराकरण के लिए निवेदन किया है कि राज्य सरकार द्वारा पूर्व से ही आदेशित जुलाई 2019 से 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाए । केंद्र सरकार द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप प्रदेश के पेंशनरों को भी बड़ा हुआ महंगाई भत्ता दिया जाए । केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों को जनवरी 2020 , जुलाई 2020 और जनवरी 2021 से रोके गए तीन महंगाई भत्ता देने पर से रोक हटा दी । उन्के महंगाई भत्ते में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है । पूर्व में उन्हें 17 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा था । अब उन्हें 28 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलना शुरू भी हो गया है । 

                पेंशनरों की अगली मांग है , छठे वेतनमान का 32 माह का एरियर ब्याज सहित दिया जाए । यह एरियर कर्मचारियों को तो उसी समय मिल गया था , किंतु पेंशनरों को एरियर दिया ही नहीं गया । इस संबंध में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पेंशनरों के पक्ष में निर्णय भी दिया जा चुका है । इसके बावजूद राज्य सरकार की हठधर्मिता के कारण उन्हें अभी तक एरियर मिल नहीं पाया है । इसी प्रकार पेंशनरों को सातवें वेतनमान का भी 27 माह का एरियर ब्याज सहित दिया जाए । राज्य के कर्मचारियों को तो यह एरियर उसी समय दे दिया गया है , किंतु पेंशनरों का एरियर अभी तक उन्हें नहीं दिया गया है। पेंशनरों की अंतिम प्रमुख मांग यह है कि स्टेट रिआर्गेनाइजेशन एक्ट की धारा 49 को विलोपित किया जाए । इस धारा के अंतर्गत राज्य सरकार पेंशनरों का महंगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय यदि लेती भी है तो उसे इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य सरकार से सहमति लेनी पड़ती है । इसके बाद ही राज्य सरकार पेंशनरों को बड़ा हुआ महंगाई भत्ता दे सकती है । बीस साल पहले छत्तीसगढ़ राज्य बनने के समय यह गैर जरूरी नियम बना दिया गया था , जो राज्य सरकार और पेंशनरों के लिए गले की हड्डी बन गई है । इसके अतिरिक्त कोरोना काल में बीमार होने पर पेंशनरों की मुश्किलें तो और भी बढ़ गई है । इसलिए जैसा राजस्थान सरकार ने पेंशनरों के हित में अत्यंत उपयोगी उपचार योजना शुरू की है । वैसी ही इस राज्य में भी शुरू की जाए । अथवा अत्यंत ही उपयोगी और लोकप्रिय आयुष्मान योजना का लाभ पाने वालों की सूची में पेंशनरों को भी शामिल कर लिया जाए तो यह पेंशनरों के लिए राज्य सरकार का बहुत बड़ा उपकार होगा ।

               पिछला इतिहास रहा है कि जब भी केंद्र सरकार महंगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लेती है तो हमेशा ही वह निर्णय कर्मचारियों और पेंशनरों दोनों के लिए ही समान रूप से लागू होता रहा है । मध्यप्रदेश में भी ऐसा ही होता रहा था । किंतु कांग्रेस के मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल के समय आईएएस लॉबी के दबाव के कारण मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार एक अत्यंत ही गलत निर्णय मुख्यमंत्री द्वारा ले लिया गया ! वह निर्णय यह था कि जब भी केंद्र सरकार अपने केंद्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए महंगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लेती है , तो उसी समय से राज्य में पदस्थ अखिल भारतीय सेवा के तीनों वर्गों आईएएस , आईपीएस और आईएफएस के अधिकारियों का भी महंगाई भत्ता स्वतः ही बढ़ जाएगा ! इसके पहले होता यह था कि जब भी केंद्र सरकार महंगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लेती थी तो राज्य में पदस्थ उक्त तीनों सेवाओं पर लागू नहीं होता था , क्योंकि ये सभी राज्य में ही पदस्थ होते थे और राज्य के नियम ही उन पर भी लागू होते थे । राज्य सरकार कर्मचारियों के बार - बार निवेदन और मांग करने के बाद ही केंद्र सरकार के अनुरूप महंगाई भत्ता बढ़ाने का आदेश देती थी । इसका तोड़ आईएएस अधिकारियों ने बहुत ही चालाकी से निकाल लिया । वे यह अच्छी तरह जानते थे कि केवल आईएएस के लिए ही बात करेंगे तो बात बनेगी नहीं , इसलिए उन्होंने अखिल भारतीय सेवा के दो और वर्गों आईपीएस और आईएफएस को भी बड़ी ही शातिराना तरीके से जोड़ कर अपना पक्ष मजबूत कर लिया ! फिर आईएएस लॉबी ने मुख्यमंत्री को पटा कर चुपचाप यह आदेश निकाल लिया कि जब- जब केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों और अधिकारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लेगी , तो स्वतः ही राज्य में पदस्थ उक्त तीनों सेवाओं के अधिकारियों का भी महंगाई भत्ता बढ़ जाएगा ! इसके लिए राज्य सरकार के किसी आदेश की जरूरत ही नहीं होगी ! बस तभी से उन्होंने राज्य के कर्मचारियों , अधिकारियों तथा पेंशनरों के महंगाई भत्ते बढ़ाने की चिंता लेना छोड़ ही दिया ! 

               यहाँ यह उल्लेखनीय है कि राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों को छठा वेतनमान और सातवाँ वेतनमान का लाभ इसी भाजपा सरकार और इन्हीं मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ही दिया है । किंतु इसी शिवराज सरकार ने राज्य के समस्त कर्मचारियों और अधिकारियों को तो वेतनमान और उसका एरियर दे दिया , किन्तु दोनों बार पेंशनरों को दोनों वेतनमान का लाभ देने के बावजूद उन्हें उनके अधिकार का एरियर अभी तक नहीं दिया ! मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा छठे वेतनमान का एरियर देने के आदेश भी दे दिए गए हैं , किन्तु राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय का यह आदेश भी अभी तक नहीं माना है ! इसी प्रकार सातवें वेतनमान के एरियर का प्रकरण उच्च न्यायालय में अभी चल रहा है । प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान एक संवेदनशील मुख्यमंत्री के रूप में राज्य और देश भर में लोकप्रिय हैं । इसके बावजूद उनके सलाहकार और वित्त विभाग के आईएएस अधिकारी बार - बार किसी न किसी बात का अड़ंगा लगा कर पेंशनरों के एरियर और महंगाई भत्ते के फैसले पर सांप की तरह कुंडली मार कर बैठे हुए हैं !

               प्रदेश के मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान को चाहिए कि वे राज्य के पेंशनरों की आर्थिक समस्याओं को समझें और उनकी हया नहीं लें ! उनकी वाजिब मांगों का निराकरण कर उनकी सहानुभति प्राप्त करें ! निश्चित रूप से वे उन्हें अपना आशीर्वाद ही देंगे ! बाबा महाकाल से यही प्रार्थना है कि वे मुख्यमंत्री को इस संबंध में सद्बुद्धि दे!