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बेमेतरा : 2500 से 3000 अतिथि प्रोफेसरों को रोजगार मुक्त करने छत्तीसगढ़ शासन की तैयारी

 बेमेतरा :  2500 से 3000 अतिथि प्रोफेसरों को रोजगार मुक्त करने छत्तीसगढ़ शासन की तैयारी

 बेमेतरा- छत्तीसगढ़  लोक सेवा आयोग द्वारा सहायक प्राध्यापकों के पद विज्ञापित किए जाने से और प्रोफेसरों के पद भरे जाने की घोषणा से महाविद्यालय में कार्यरत अतिथि प्राध्यापकों की सेवाओं पर ग्रहण लगने वाला है।छत्तीसगढ़ शासन शीघ्र ही परीक्षा लेने वाली है उसके पश्चात उनकी पोस्टिंग कर दी जाएगी।जिससे पूर्व से कार्यरत अतिथि प्राध्यापकों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी ।कम मानदेय पर अतिथि प्राध्यापक महाविद्यालय में सेवा देते हैं और अच्छी सेवा देते हैं। क्योंकि ₹200 प्रति  कालखंड के हिसाब से उनको पैसा मिलता है ।इसलिए अध्यापन कार्य में रूचि लेते हैं और बच्चों को अच्छे से पढ़ाते हैं। वहीं  नियमित अध्यापक महाविद्यालय केअन्य कार्य में लगे रहते हैं ।लेकिन शासन बिना सर्वे कराए बिना किसी सोच या दृष्टि के अतिथि प्राध्यापकों को उनके सेवाओं से वंचित करने जा रही है ,पूर्व में इस तरह तदर्थ नियुक्ति आपातकालीन  सुपरन्यूमैरेरी पीएससी फेल जो प्राध्यापक सेवा में थे, उनको शासन नियमित कर चुकी है किंतु अभी शासन को ऐसा लग रहा है कि यह ढाई हजार अतिथि प्राध्यापक शासन पर  बोझ हो गए हैं।उनके कारण आर्थिक भार शासन पर आ रहा है ।जबकि वह एक नियमित अध्यापक के वेतन में सात से आठ अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति करती है। अतिथि प्राध्यापक राज कुमार त्रिपाठी ने बताया है कि अतिथि प्राध्यापक राज्य शासन की गलत नीतियों के कारण ही  आर्थिक मानसिक शोषण के शिकार हो रहे हैं ।जबकि देश के अन्य राज्यों दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश ,महाराष्ट्र,बिहार, पश्चिम बंगाल राजस्थान आदि राज्यों में अतिथि प्राध्यापक की स्थिति बेहतर है ।उन्हें वहां एकमुश्त मासिक वेतन पूर्णकालिक सेवा तथा स्थानांतरण से सुरक्षा मिली है ।वहीं उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश सरकार को भी अतिथि प्राध्यापकों की सेवाओं का ध्यान रखना चाहिए। छात्रों को जागरूक होना चाहिए, पालकों को माता-पिता को जागरूक होना चाहिए यदि अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं तो शासन से  अतिथि प्राध्यापक की अच्छी जन सेवा का लाभ उठाना चाहिए।प्राध्यापक चंद्रशेखर तिवारी  ने बताया कि अतिथि प्राध्यापकों को हटाये जाने से अध्यापन की निरंतरता समाप्त हो जाएगी नए प्राध्यापक नए ढंग से पढ़ाएंगे। पुराने ज्ञान की कड़ियां टूटेंगे ।अतिथि प्राध्यापकों के परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।  इस अतिथि प्राध्यापक भर्ती परीक्षा हेतु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने गवर्नर को ज्ञापन दिया और उनके ज्ञापन पश्चात ही लोक सेवा आयोग ने विज्ञापन करके भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की है। तो इस तरह से कांग्रेस के उन घोषणा पत्र जिसमें सभी अनियमित कर्मचारियों को ना हटाये जाने की बात कही गई है झूठा साबित होगा शासन चाहे तो  अतिथि प्राध्यापकों के लिए अलग से फंड बना  सकती है और उनकी सेवाओं को निरंतर जारी रख सकती है।इससे अतिरिक्त बोझ या भार नहीं पड़ेगा। शासन उच्च शिक्षा अनुदान आयोग से अनुदान प्राप्त करती है नियमित अध्यापकों की भर्ती करें किंतु अतिथि प्राध्यापकों के लिए भी थोड़ा सा यदि वित्तीय व्यवस्था सरकार कर दें तो समस्या का हल निकल जाएगा।