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कांकेर जिला का 53 गांव को षडयंत्र पूर्वक नारायणपुर जिले में सम्मिलित करने का घोर विरोध, शासन-प्रशासन को कड़ी चेतावनी

कांकेर जिला का 53 गांव को षडयंत्र पूर्वक नारायणपुर जिले में सम्मिलित करने का घोर विरोध, शासन-प्रशासन को कड़ी चेतावनी

भानुप्रतापपुर। शासन के द्वारा कांकेर जिले के 53 ग्राम पंचायतो को नारायणपुर जिले में शामिल किए जाने को लेकर आज सोमवार को गोंडवाना भवन में सर्व समाज के लोग एकत्रित होकर इसका घोर विरोध किया गया। यदि सरकार इस पर तत्काल रोक नही लगाएगी तो सर्व समाज द्वारा आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

इस संबंध में मानक दरपट्टी अध्यक्ष कांकेर गोंडवाना समाज के जिला ने कहा कि दल्ली राजहरा से लेकर रावघाट तक बिछाई गई परियोजना को षडयंत्र पूर्वक नारायणपुर जिले में मिलाने की साजिश चल रहा है। उसका हम सभी विरोध कर रहे है। कल 17 अगस्त को बस्तर कमिश्नर, आईजी एवं प्रदेश स्तर के सचिव मिलकर वीडियो कांफ्रेंस बैठक रखा गया है। उसमें इन लोग प्रभावित 53 गांव तालाबेड़ा, मुड़पाल, मड़पा, कोलर, पंढरगांव, बहिया सलेभाट, अधरेल, कन्दाड़ी, रेखा बेड़ा, फूलपाल, छोटे जैतखुरी, डांगरा, टोटिन डांगरा, पल्ला कसार, भैस गांव, कुम्हारी, आतुरबेड़ा, पोटे बेड़ा, निबरा, कोहका, छिंदघाट, वरचे, पोंगली, ददम पारा, हिरका दंड, चॉपर हूर, अलानार,तमोडा, ओट कोड़ो, पंडा पाल, कोह बेड़ा, किस कोड़ो, देव गांव, पीतरा, हुचाडी, कोटकुरसई, टेका पानी, गवाड़ी, रायचपई, गडदा, कुदुर पाल, घोटिया, करमरी,कोंगेरा, बेचानार, मुल्ले, तेलंगा, मातला ब, परल मेटा, बेरतानार, बुड़ाकरसईजो कि कांकेर जिले में है जिसे नारायणपुर जिला में शामिल किए जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि दल्ली राजहरा से रावघाट तक के आने वाले भविष्य का जो सपना देखते हुए हजारों किसान अपने जमीन को अधिग्रहण करने सहमति दिए है, व मुआवजा भी नही के बतौर मिला हैं। इसलिए कि हम आने वाले समय मे हमारे पीढी के लिए यह जीवनदायिनी होगा,क्षेत्र का विकास होगा और हम आगे बढ़ेंगे लेकिन जिस तरह से बस्तर कमिश्नर व आईजी के द्वारा गुपचुप तरीके से जो प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा है वह  बहुत ही निन्दनीय है जिसका हम पुरजोर विरोध करते इसे खारिज करते है। हम चेतावनी देते है कि बस्तर के मौहोल शांत है, उसे अशांत करने की स्थिति पैदा किया जा रहा है जो हम किसी भी हाल में होने नही देंगे।

सर्व समाज के द्वारा रणनीति बनाये जायेंगे, यदि राज्य सरकार हमारे मांगो नही मानेगी तो इस आंदोलन को रोड में लड़ेंगे। यदि शासन हठधर्मिता दिखाएगी तो  कच्चे से रावघाट तक अधिग्रहण जमीन पर रेल्वे ट्रेक उखाड़ फेंकेंगे। वही इस सम्बंध में क्षेत्र के विधायक व सांसद को मालूम नही है यह केवल गोपनीय ढंग से प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस सम्बंध में बस्तर आईजी से बात किया गया तो उन्होंने ने इसे नक्सली, राजस्व,वनमंडल व जिला पंचायत के लिये परेशानी व समस्या बताए जा रहे है, जबकि कोई भी ऐसे स्थिति व परिस्थिति नही है। कांकेर जिला के साथ घोर अन्याय हो रहा है, कांकेर जिले के किसानों की जमीन और नारायणपुर  को राजस्व मिले यह कतई बर्दाश्त किया जाएगा।

वीरेन्द्र सिंह ठाकुर ब्लाक अध्यक्ष युवा कांग्रेस भानुप्रतापपुर ने कहा कि ये जो भी षडयंत्र किया जा रहा है गलत है। पूरा त्याग व समर्पण हमारे क्षेत्र के लोगों ने किये है, अपने अच्छे- अच्छे भूमि को रेल्वे लाईन के लिए दिए है, ये वही कीमती खेत है जिनसे उनके जीविकोपार्जन आधारित थी। आखिर क्यों दिए है इसके पीछे भी हमारे कुछ अरमान है कि जब रावघाट प्लांट खुलेंगे तो  हमारे आने वाले पीढ़िया जिन्हें हम धान बेचकर आई टी आई व अन्य कोर्स करा रहे है ताकि भविष्य में उन्हें नॉकरी मिल सके उनके भविष्य संवर सके। लेकिन बस्तर कमिश्नर व आईजी जो कर रहे है वह अन्याय है। विधायक व सांसद इस बारे में अनजान है उन्हें अवगत कराएं जाएंगे। वही मुख्यमंत्री संवेदनशील है मुझे विश्वास है वो हमारे बातों को जरूर सुनेंगे व हमारे जनहित में कार्य करेंगे।

अंतत राम कोठारी अध्यक्ष व्यापारी संघ भानुप्रतापपुर ने कहा कि क्षेत्र का विकास व व्यापार भी रावघाट तक जुड़ा हुआ है। कांकेर जिला का जो भी व्यापारी है वो नही चाहेगा कि हमारे गांव दूसरे जिले में जाय।