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Big.Breaking : 01 अप्रैल से देश में सिर्फ चार बैंक, 10 छोटे बैंकों का चार बड़े बैंकों में महाविलय, जानिए आप किस बैंक का हिस्सा बनेंगे, अब बैंकों में चीफ रिस्क आफिसर

Big.Breaking : 01 अप्रैल से देश में सिर्फ चार बैंक, 10 छोटे बैंकों का चार बड़े बैंकों में महाविलय, जानिए आप किस बैंक का हिस्सा बनेंगे, अब बैंकों में चीफ रिस्क आफिसर

अनिल द्विवेदी


देश की अर्थव्यवस्था जब 'कोरेना नामक महामारी से जूझ रही है तब भारतीय रिजर्व बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मेगा विलय योजना पर आगे बढ़ रहा है. दो दिन बाद यानि एक अप्रैल से देश में सिर्फ चार ही बड़े बैंक होंगे, बाकी इन सबमें ​विलय हो जाएंगे. इनमें भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक शामिल हैं.

जानते चलें कि पिछले साल केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में संचालित 10 बड़े बैंकों को चार बैंकों में संविलियन करने की घोषणा की थी. योजना के अनुसार, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक को अवशोषित करेगा, जो भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा.

इसी तरह, सिंडिकेट बैंक को केनरा बैंक के साथ विलय किया जायेगा. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आंध्र बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक दोनों को अवशोषित करेगा. इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक का भी विलय होगा.

विगत 28 मार्च को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि ये सभी विलय 01 अप्रैल से प्रभावी होंगे. इलाहाबाद बैंक की शाखाएं 1 अप्रैल से इंडियन बैंक की शाखाओं के रूप में काम करेंगी. आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक की शाखाएँ यूनियन बैंक आफ इण्डिया की शाखाओं के रूप में काम करेंगी. ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक की शाखाएं पीएनबी की शाखाओं के रूप में कार्य करेंगी. सिंडिकेट बैंक की शाखाएं 1 अप्रैल से केनरा बैंक की शाखाओं के रूप में काम करेंगी. इन बैंकों के जमाकर्ताओं को अब इन्हीं बैंक के साथ शामिल किया जाएगा.

इन विलय के साथ, वित्त मंत्री ने घोषणा की थी कि राज्यों द्वारा संचालित बैंकों में चीफ रिस्क आफिसर की नियुक्ति की जाएगी और बाजार के जोखिमों पर और बड़े खाताओं पर नजर रखेगा.  अब तक, जोखिम प्रबंधन को सरकारी बैंकों में पर्याप्त महत्व नही मिला है.

इस महाविलय के साथ, भारत में कम से कम छह बड़े बैंक होंगे। हालाँकि, कुछ प्रश्न शेष हैं: जैसे क्या मेगा विलय से ये बैंक मजबूत होंगे? इनमें से अधिकांश बैंकों में अपेक्षाकृत उच्च गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) हैं। इन बैंकों को विलय करने से एनपीए गायब नहीं होगा, लेकिन यह छोटी समस्याओं को एक बड़े हिस्से में बांधने जैसा होगा। साथ ही, इन बैंकों को समर्थन देने के लिए आवश्यक पूंजी उच्च स्तर पर होगी।

दूसरा क्या यहां वास्तविक तालमेल हो सकेगा? इनमें से अधिकांश बैंक, बड़े लोगों को छोड़कर, मजबूत क्षेत्रीय फोकस रखते हैं। कार्य संस्कृति भी उसी के अनुसार निर्मित होती है। सरकार ने उसी प्रौद्योगिकी मंच का उपयोग करके बैंकों को क्लब करके प्रौद्योगिकी तालमेल का ध्यान रखा है। लेकिन, कार्य संस्कृति और क्षेत्रीय फोकस के बारे में अभी कोई नीति सामने नही आ सकी है.

तीसरा पीएनबी एक ऐसा बैंक है जो अपने खराब प्रशासन और बड़े भ्रष्टाचार का केंद्र रहा है. नीरव मोदी प्रकरण को याद रखें. इसे कैसे संभाला जाएगा खासकर जब आप दो और बैंकों को इसमें विलय करने जा रहे हैं.

चौथा यह कि बड़े बैंकों के प्रमुख जो सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, अगला प्रमुख कहां से नियुक्त होगा. जिन बैंकों को विलय किया जा रहा है, क्या उन्हीं में से किसी अधिकारी को यह मौका मिलेगा, या किसी बाहरी अर्थशास्त्री को लाया जाएगा.

पांचवा यह कि राज्य-संचालित बैंकों में मजबूत ट्रेड यूनियन हैं जो इन संस्थाओं के संचालन में प्रभावशाली पदों पर अपनी कमान रखते हैं और दशकों से नीति निर्माण को प्रभावित करते रहे हैं. क्या सरकार ने इन कर्मचारी यूनियनों को विश्वास में लिया है? विलय योजना के खिलाफ कर्मचारी संघों ने पहले ही हड़ताल की धमकी दी है.

और अंतिम बात यह कि इन बैंकों के निजीकरण और व्यापार से बाहर निकलने की सरकार की प्रतिबद्धता का क्या हुआ? 2014 में, पीजे नायक पैनल ने पीएसबी के निजीकरण की सिफारिश की थी ताकि सरकार इन बैंकों को चलाने के बोझ से मुक्त हो जाए.

ये सब महत्वपूर्ण सवाल हैं जिनका जवाब सरकार को देना होगा. इसके अलावा, ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही है, इन विलय को लागू करने से बैंक प्रबंधन पर अतिरिक्त बोझ तो नही पड़ेगा। यह एक समय है जब बैंकों को परिसंपत्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए उत्पादक क्षेत्रों को ऋण गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है. कोरोना संकट के मददेनजर क्या सरकार को मेगा विलय प्रक्रिया को स्थगित नही करना चाहिए था, यह भी विचार करने के लायक है.