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कोरिया ब्रेकिंग कई सालों से नही बदला बाबुओं का टेबल,जिले में हो रहे अंगद साबित.....

कोरिया ब्रेकिंग कई सालों से नही बदला बाबुओं का टेबल,जिले में हो रहे अंगद साबित.....

कोरिया - कोरिया जिले के विकासखण्डो से लेकर जिला कार्यालय तक कई बाबू ऐसे है जो की कई सालों से एक ही कार्यालय ,स्थान पर टिके हुए है। इनके ट्रांसफर तो होते है। पर उस स्थान की महत्वता इनके अलावा कोई और नही समझ सकता। ट्रांसफर रुकवाने और उसी स्थान पर टिके रहने के लिए एडी चोटी का जोर लगा देते है। परिणाम की लंबे समय से एक ही स्थान पर कुंडली मार कर बैठे है। कई विभाग के बाबू तो 15 से 20 साल तक एक ही स्थान पर टिके हुए है। इनका लंबे समय से एक ही स्थान में जमे रहने से कार्य शैली क्रिया कलाप में कही न कही ऊपर नीचे होने की जानकारी सूत्रों से नजर आती रही है। पर सवाल यही उठता है कि आखिर क्यों ट्रांसफर नीति को ठेंगा दिखाया जा रहा है।

कोरोना काल से मिली है राहत

रायपुर में पत्रकारों से चर्चा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था, ‘समन्वय के माध्यम से कर्मचारियों का तबादला हो रहा है। लेकिन कोरोना की वजह से व्यापक ट्रांसफर करना उचित भी नहीं होगा।' प्रदेश में सामान्य तौर पर जून-जुलाई में तबादला नीति जारी होती है। इसके तहत एक-डेढ़ महीने के भीतर विभागों में व्यापक स्तर पर तबादला होता है। इसमें जिलों के भीतर से अंतर जिला तबादले तक शामिल होते हैं। इसमें प्रशासनिक, स्वयं के व्यय पर और समन्वय से तबादले तीनों शामिल होते हैं।

2019 में आई थी आखिरी तबादला नीति

छत्तीसगढ़ की आखिरी तबादला नीति 2019 में आई थी। इसमें तृतीय तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्थानांतरण जिले के प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से कलेक्टर द्वारा करने का प्रावधान था। स्थानांतरण के लिए आवेदन 15 जून से 25 जुलाई तक संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों के कार्यालयों को दिए जाने थे। तय हुआ था कि तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के मामले में उनके संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के मामलों में अधिकतम पांच प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकेंगे। परस्पर सहमति से स्वयं के व्यय पर किए गए तबादलों की गणना इस सीमा के लिए नहीं की जाएगी।