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तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं - डॉ. ममता व्यास

तेरा मेरा मनवाः आप पूछे हम बताएं, मन से मन की उलझन सुलझाएं - डॉ. ममता व्यास

मानसिक रोगों के लक्षण हर व्यक्ति में अलग –अलग हो सकते हैं। मन की हजार उलझनों के सुलझाव भी मन के रास्तों से ही निकलते हैं। तेरा मेरा मनवा भी कुछ ऐसी ही बात करता है।

समस्या - मैं 45 वर्षीय हाउस वाइफ हूँ। कुछ वर्षों पहले मेरी रजोनिवृत्ति (menopause) हो गयी है मुझे लगता है इसके बाद से मैं ज्यादा बीमार रहने लगी हूँ। किसी भी काम में मन नहीं लगता। पहले घर के सदस्यों की किसी भी बात से मुझे बुरा नहीं लगता था लेकिन अब छोटी –छोटी बातों पर रोना आ जाता है। कभी मन बहुत खुश रहता है तो कभी बहुत उदास। क्या ये कोई मानसिक रोग के लक्षण हैं ?

समाधान– आपकी जो समस्या है वो  अमूमन हर उस महिला की समस्या है जो मेनोपाज़ से गुजर रही है या जिनका मेनोपाज हो चुका है। उम्र बढ़ने के साथ  शरीर में हार्मोन का संतुलन गड़बड़ा जाता है, जिसकी वजह से कई तरह की समस्याएँ आती है। अक्सर महिलाओं में  डिप्रेशन, चिढ़चिढ़ा पन की समस्या देखी गयी है। आप को योगा या मेडिटेशन करना चाहिए। खुद को अपनी पसंद के क्रिएटिव कार्यों में व्यस्त रखिए। ये कोई मानसिक रोग नहीं है।


समस्या - मैं एक प्रायवेट कंपनी में सेल्समेन हूँ। कुछ दिनों से मुझे भूलने की बीमारी हो रही है। अभी मेरी उम्र तीस वर्ष है। अक्सर मोबाइल या घर की चाभी भूल जाता हूँ। काम करते करते मुझे टाइम का भी पता नहीं चल पाता। लोगों के नाम और चेहरे भी भूलने लगा हूँ। रात को ठीक से नींद भी नहीं आती है। घर ओर आफिस दोनों जगह खुद को थका हुआ महसूस करता हूँ। किसी से बात करने का मन भी करता। जिंदगी मशीन बन गयी है।

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समाधान– मुझे लगता है आप पर काम का बोझ ज्यादा है इसलिए आपको भरपूर नींद नहीं मिल रही। नींद नहीं होने से दिमाग ठीक तरीके से अपना काम नहीं कर पाता। इसलिए आप चीजों को भूल रहे हैं हमेशा हड़बड़ी में ना रहे। आराम से अपने काम कीजिये। अपना रूटीन सेट कीजिये । खाना खाने का , सोने का समय निर्धारित कीजिये। दोस्तों से मिलिये खुश रहने की आदत डालिए। ज़िंदगी को बोझ न समझे । आप इसे मशीन बना लेंगे तो ये मशीन ही बन जाएगी। अपनी सोच बदल कर देखिये सब बदल जाएगा।

समस्या - मेरी समस्या यह है कि मैंने पिछले साल स्कूल की पढ़ाई पूरी की है। अब मेरे परिवार के लोग मेरी शादी करवाना चाहते हैं। मुझे लगता है जब तक मैं सेल्फ डिपेंड न हो जाऊँ तब तक शादी ना करूँ, लेकिन घर वालों से बोल भी नहीं सकती वे बार -बार कहते हैं कि जो भी करना है अपने ससुराल में जाकर करना। मेरी बड़ी बहन के साथ भी यही हुआ था वो पढ़ना चाहती थी लेकिन बहुत कम उम्र में उसकी शादी कर दी गयी। परिवार के लोगों को कैसे समझाऊँ, सुझाव दीजिये।

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समाधान– आप की स्थिति समझ सकती हूँ। हमारे समाज में सब कुछ बहुत तेजी से बदल रहा है लेकिन अभी भी कुछ परिवारों में बेटियों को लेकर पुरातन सोच चली आ रही है। वे बेटियों को ज्यादा पढ़ाने के पक्ष में नहीं होते। अक्सर  सामाजिक दबाव में आकर बेटियों की जल्दी से जल्दी शादी करवा कर अपने दायित्वों से मुक्त होना चाहते हैं। आप को हिम्मत से काम लेना होगा। पढ़ने से आपको कोई नहीं रोक सकता। ज़िंदगी आपकी है उसके फैसले भी आप को लेने होंगे। आप पहले अपने परिवार को प्रेम से समझाइए और ना माने तो सख्ती से कह दीजिये कि मुझे पढ़कर अपने पैरों पर खड़े होना है उसके बाद ही शादी होगी। मुझे लगता है आपकी हिम्मत देखकर उन्हें आपकी बात समझ आ जाएगी।

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समस्या - मेरी पत्नी को अजीब सा सफाई करने का रोग है, वो आए दिन घर के पूरे कपड़े (दरी, चादर, पर्दे) धो डालती है। बार बार पोंछा लगाती है, और खुद भी सारा दिन हाथ साफ करती रहती है। उसे लगता है चारों तरफ गंदगी ओर रोगाणु फैले हुये हैं। कोविड 19 के बाद तो वो कुछ ज्यादा ही परेशान हो गयी है। हर चीज को बार बार साफ करना ओर परेशान रहना। मेरा पूरा परिवार उनकी इस आदत की वजह से बहुत परेशान हो गए हैं। क्या ये कोई मानसिक रोग है ? कृपया समझाये।

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समाधान– आपकी समस्या सुनकर मुझे लगता है कि आपकी पत्नी को मनोग्रसित बाध्यता विकार यानि आव्सेसिव कंपलसिव डिसोर्डर, ओसीडी हो सकता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को रोगाणुओं द्वारा दूषित हो जाने का डर हो जाता है, जिससे बचने के लिए वह बार- बार सफाई करता है। इस रोग में  कुछ लोग बार-बार दरवाजों के ताले चेक करते हैं या पूजा पाठ ज्यादा करने लगते हैं। शर्ट  की बटन या पेंट की जिप बार -बार चेक करते हैं। ऐसा वे तनाव या अवसाद में आकर करते हैं। आप उन्हें किसी मनोचिकित्सक को दिखाये... फायदा होगा।